चिदंबरम बोले, मैं होता वित्त मंत्री तो नोटबंदी पर दे देता इस्तीफा
चिदंबरम ने नोटबंदी के फैसले पर सवाल भी खड़ा किया और कहा कि अगर आप करीब 45 करोड़ लोगों की आजीविका छीनते हैं तो क्या यह गलत नहीं है?
नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने रविवार को कहा है कि अगर वह वित्त मंत्री होते तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नोटबंदी न करने की सलाह देते। उन्होंने कहा कि ऐसी सलाह पर उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया होता।

यह बात उन्होंने दिल्ली लिटरेचर फेस्टिवल में उस सवाल के जवाब में कही, जब उनसे पूछा गया कि अगर वे अरुण जेटली की जगह वित्त मंत्री होते तो नोटबंदी के इस फैसले पर क्या करते।
उन्होंने कहा कि यह नोटबंदी नहीं है, बल्कि नोटबदली है। यह बात उन्होंने कार्यक्रम में 'मोदी सरकार: विपक्ष की भूमिका' विषय पर बोलते हुए कही। इस विषय पर चर्चा के दूसरो वक्ता जेडीयू सांसद पवन वर्मा थे, जबकि इस कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने किया।
चिदंबरम ने नोटबंदी के फैसले पर सवाल भी खड़ा किया और कहा कि अगर आप करीब 45 करोड़ लोगों की आजीविका छीनते हैं तो क्या यह गलत नहीं है? उन्होंने कहा कि अगर सरकार का फैसला लोगों से भीख मंगवाने और कर्ज लेने पर मजबूर करता है तो यह बिल्कुल गलत है।
वहीं जब चिदंबरम से पूछा गया कि सरकार और विपक्ष के बीच भरोसे की कमी है? तो उन्होंने कहा- मैं सोचता हूं आप इसे बढ़ा रहे हैं। वे बोले सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद जरूर हैं, लेकिन दोनों एक दूसरे से अलग नहीं हैं।
वहीं दूसरी ओर जेडीयू के सांसद पवन वर्मा ने नोटबंदी को लेकर ससंद में विपक्ष द्वारा लगातार हंगामा करके संसद ठप करने को लेकर ऐतराज जताया है। वे बोले- नोटबंदी पर विपक्ष की रणनीति भ्रमित करने वाली है।
वे बोले कि एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब विपक्ष ने हंगामा करके संसद की कार्रवाई को स्थगित करने पर मजबूर न कर दिया हो। उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपनी बात ढंग से रखनी चाहिए।












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