नक्सली हमले में शहीद हुए भाई की बंदूक पर बहन ने वर्दी पहन बांधी राखी

दंतेवाड़ा। पूरे देश में आज स्वतंत्रता दिवस के साथ-साथ भाई-बहन का पवित्र त्योहार रक्षाबंधन का भी मनाया गया। छत्तीसगढ़ में भाई-बहन के इस पर्व पर एक भावुक कर देने वाला वाक्या देखने को मिला। एक बहन ने भाई की कलाई पर राखी नहीं बल्कि उसकी बंदूक पर राखी बांध कर रक्षाबंधन का त्योहार मनाया। दरअसल छत्तीसगढ़ पुलिस में महिला कांस्टेबल कविता कौशल के भाई राकेश कौशल इस साल एक नक्सली हमले में शहीद हो गए थे।

बहन ने बंदूक को बांधी राखी

बहन ने बंदूक को बांधी राखी

नक्सली हमले में 31 अक्टूबर को जवान राकेश कौशल शहीद हो गए थे। इस हमले में राकेश के साथ दो अन्य पुलिसकर्मी और दूरदर्शन के कैमरामैन की जान चली गई थी। कविता ने बताया कि, मुझे अपने भाई के स्थान पर छत्तीसगढ़ पुलिस में नौकरी मिली है। मैंने विभाग से अनुरोध किया था कि मैं उसी बंदूक का उपयोग करना चाहता हूं जो मेरे भाई ने इस्तेमाल की थी। नक्सली कायर होते हैं। मैं दंतेश्वरी सेनानियों में शामिल होना चाहता हूं और अपने भाई की मौत का बदला लेना चाहती हूं। गुरुवार को कविता ने सामने भाई की तस्वीर रखकर इसी बंदूक को राखी बांधी।

 मैंने विभाग से अनुरोध किया था कि मुझे मेरे भाई की बंदूक ही दी जाए

मैंने विभाग से अनुरोध किया था कि मुझे मेरे भाई की बंदूक ही दी जाए

दंतेवाड़ा की रहने वाली कविता ने भाई की शहादत के बाद पुलिस की नौकरी को चुना, क्योंकि भाई का सपना था कि, उसकी बहन भी पुलिस की वर्दी पहने। इसके बाद कविता ने नक्सलियों से बदला लेने डॉक्टरी का सपना छोड़कर मई 2019 में आरक्षक की नौकरी ज्वाइन कर ली। कविता ने कहा, 'मुझे अपने भाई की जगह नौकरी मिली है। मैंने विभाग से अनुरोध किया था कि मुझे मेरे भाई की बंदूक ही दी जाए। नक्सली कायर हैं। मैं दंतेश्वरी फाइटर टीम को जॉइन करना चाहूंगी और अपने भाई की मौत का बदला लेना चाहूंगी।

डॉक्टरी का सपना छोड़ बहन ने पहनी खाकी

डॉक्टरी का सपना छोड़ बहन ने पहनी खाकी

एक वेबपोर्टल को दिए इंटरव्यू में कविता ने बताया कि, मैं तीन भाइयों की इकलौती बहन हूं। राकेश कौशल मेरे दूसरे नंबर के भइया थे। तीनों भाइयों में मेरी उनके साथ सबसे ज्यादा बनती थी। भाई मुझसे राखी बंधवाने रक्षाबंधन के दिन हर साल घर आते थे। राखी में हमेशा मुझे नए-नए सरप्राइज दिया करते थे। उनकी सबसे खास बात यह थी कि वे तब तक अपने हाथों में राखी रखते थे जब तक वह पूरी टूट ना जाए।

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