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Chhattisgarh: पत्रकार मुकेश चंद्राकर को की गई संदिग्ध कॉल ने खोला 'राज', ठेकेदार नहीं चचेरा भाई मुख्य आरोपी

Chhattisgarh journalist hatyakand: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या और ठेकेदार के सेप्टिक टैंक के अंदर पत्रकार मुकेश चंद्राकर का शव मिलने के मामले की गुत्थी अब लगभग सुलझ गई है। मामले की जांच कर रही पलिस ने हत्याकांड में मुकेश के चचेरे भाई को मुख्य आरोपी बनाया है। पत्रकार के अपहरण और हत्या से पहले एक कॉल को लेकर पुलिस की शक की सुई रितेश चंद्राकर (मुकेश चंद्राकर के चचेरे भाई) पर पहले ही घूम रही थी।

छत्तीसगढ़ के पत्रकार मुकेश चंद्राकर का शव 3 जनवरी को बीजापुर में ठेकेदार सुरेश चंद्राकर की संपत्ति पर बने सेप्टिक टैंक में मिला था। उनकी हत्या की जांच ने एक महत्वपूर्ण मोड़ ले लिया है, क्योंकि अधिकारियों ने मुकेश के चचेरे भाई की पहचान मुख्य संदिग्ध के रूप में की है।

Journalist Mukesh Chandrakar file photo

अपनी मृत्यु से पहले मुकेश बस्तर के गंगालूर से नेलसनार गांव तक 120 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना से जुड़े कथित भ्रष्टाचार घोटाले की जांच कर रहे थे। इस परियोजना की शुरूआत में कीमत 50 करोड़ रुपये थी, लेकिन इसके दायरे में कोई बदलाव किए बिना इसकी लागत दोगुनी से भी अधिक हो गई। इसमें शामिल ठेकेदार सुरेश चंद्राकर थे।

1 जनवरी को सुरेश के चचेरे भाई रितेश चंद्राकर का फोन आने के कुछ ही देर बाद मुकेश गायब हो गया। बताया जाता है कि रितेश ने मुकेश और सुरेश के बीच मीटिंग तय की थी। इस मीटिंग के बाद मुकेश का फोन ऑफलाइन हो गया, जिसके बाद उसके बड़े भाई युकेश ने 2 जनवरी को उसके लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई।

मुकेश के खुलासे के बाद राज्य सरकार ने सड़क परियोजना की जांच शुरू कर दी है। उसके खुलासे ने इलाके के ठेकेदारों के लिए चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। जांच अब मामले में परिवार के सदस्यों की संलिप्तता पर केंद्रित है।

मुकेश के खोजी काम का स्थानीय राजनीति और व्यावसायिक हितों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा। सड़क परियोजना के वित्तपोषण में विसंगतियों को उजागर करके, उन्होंने क्षेत्रीय ठेकेदार हलकों में संभावित भ्रष्टाचार की ओर ध्यान आकर्षित किया।

पत्रकार की खोजों के कारण परियोजना में शामिल लोगों पर जांच और दबाव बढ़ गया। इस स्थिति ने स्थानीय ठेकेदारों के बीच तनाव पैदा कर दिया, जो उसकी रिपोर्टिंग से फंस गए थे।

दरअसल, यह मामला भ्रष्टाचार और गलत कामों को उजागर करने वाले पत्रकारों के सामने आने वाले खतरों को उजागर करता है। ऐसे में मुकेश के चचेरे भाई का संदिग्ध के रूप से हत्याकांड में शामिल होना कई सारे सवाल खड़े करता है।

बस्तर में ठेकेदार लॉबी का खासा दबदबा है। आरोप है कि ठेकेदार सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देकर बड़ी परियोजनाएं हासिल करते हैं। इन भ्रष्ट गतिविधियों को उजागर करने का प्रयास करने वाले पत्रकारों को अक्सर धमकियों और खतरों का सामना करना पड़ता है। यह घटना क्षेत्र में मीडिया कर्मियों और ठेकेदारों के बीच तनावपूर्ण संबंधों को उजागर करती है।

मुकेश की संदिग्ध मौत ने इन तनावों की ओर ध्यान खींचा है। यह मामला उन जोखिमों को रेखांकित करता है जो पत्रकारों को शक्तिशाली हलकों में भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग करते समय झेलने पड़ते हैं। बस्तर में ठेकेदारों का प्रभाव जगजाहिर है और इस दुखद घटना ने उनकी पहुंच को और उजागर कर दिया है। मुकेश की मौत की चल रही जांच से भ्रष्टाचार के खिलाफ रिपोर्ट करने वालों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में और अधिक जानकारी मिल सकती है।

मुख्य आरोपी तक कैसे पहुंची पुलिस?
पत्रकार मुकेश चंद्राकर 1 जनवरी से लापता थे। पुलिस को मुकेश के आखिरी लोकेशन सुरेश के घर पर मिली। जिस पर पुलिस ने सुरेश के घर पर छापा मारा। शव की खराब हालत के बावजूद मुकेश की पहचान उसके कपड़ों से हुई। पूछताछ में ये सामने आया है कि 1 जनवरी को सुरेश के भाई रितेश चंद्राकर ने मुकेश को फोन करके लोकेशन पर बुलाया था। उस कॉल के बाद मुकेश का फोन बंद हो गया और फिर कभी उसका पता नहीं चला।

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