छत्‍तीसगढ़ की पाली-तानाखार विधानसभा सीट, यहां सिर्फ दल-बदलू को ही मिलती है जीत

छत्‍तीसगढ़ की पाली-तानाखार विधानसभा सीट, यहां सिर्फ दल-बदलू को ही मिलती है जीतशॉर्ट हेडलाइन

बिलासपुर। छत्‍तीसगढ़ के बिलासपुर संभाग की पाली-तानाखार विधानसभा सीट का अजीब सा किस्‍मत कनेक्‍शन है। यहां पिछले दो विधानसभा चुनावों में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए नेता के सामने भाजपा छोड़कर आए कांग्रेस उम्‍मीदवार के बीच मुकाबला हुआ। मतलब बीजेपी और कांग्रेस दोनों के पास दल-बदलुओं को मैदान में उतारने के अलावा कोई विकल्‍प नहीं रहा। इस बार बीजेपी-कांग्रेस के अलावा अजीत जोगी की जनता कांग्रेस छत्‍तीसगढ़ और बसपा एक साथ ताल ठोक रहे हैं। ऐसे में संभव है कि पिछले दो विधानसभा चुनावों का रिकॉर्ड इस बार टूट जाए।

भाजपा से कांग्रेस में आए रामदयाल उइके तीन बार जीते, इस बार बीजेपी से लड़ेंगे

भाजपा से कांग्रेस में आए रामदयाल उइके तीन बार जीते, इस बार बीजेपी से लड़ेंगे

वैसे पाली-तानखार विधानसभा सीट बीजेपी के लिए जरा अनलकी रही है। उसे यहां लगातार हार का सामना करना पड़ा है, लेकिन इस बार बीजेपी ने बड़ा दांव चला है और कांग्रेस के तीन बार चुनाव जीत चुके रामदयाल उइके को मैदान में उतारा है। जहां तक उइके के बीजेपी में आने की बात है तो यह उनके लिए घरवापसी है। वह मरवाही विधानसभा सीट से बीजेपी के विधायक रह चुके हैं, लेकिन तब छत्‍तीसगढ़ नहीं बना था। 2003 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और वह जीत गए। 2008 और 2013 में उइके जीत दर्ज करने में सफल रहे। हालांकि, बीजेपी ने उनके सामने 2013 में कांग्रेस के श्‍यामलाल मरावी को मैदान में उतारा पर ये दल-बदलू उतना करिश्‍मा नहीं कर सके।

2018 में भी मुकाबला दो दल-बदलुओं के बीच

2018 में भी मुकाबला दो दल-बदलुओं के बीच

पाली-तानखार विधानसभा सीट पर 2018 विधानसभा चुनाव में भी मुकाबला दो दल-बदलुओं के बीच ही है। कांग्रेस के तीन बार के विजेता रामदयाल उइके को इस बार बीजेपी ने यहां से टिकट दिया है तो वहीं कांग्रेस भी बीजेपी के मोहित केरकेट्टा को तोड़कर ले आई है। मतलब मुकाबला 2018 में भी दल-बदलुओं के बीच ही है। देखना होगा इस बार नतीजा क्‍या आता है।

जल-प्रपात और प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है यह सीट

जल-प्रपात और प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है यह सीट

पाली-तानाखार विधानसभा क्षेत्र केंदई जलप्रपात और चैतुरगढ़ के प्राचीन मंदिरों के लिए बेहद प्रसिद्ध है। इसके बावजूद ये इलाका कोरबा जिले का सबसे पिछड़ा इलाका माना जाता है। यहां न तो इंडस्‍ट्री है और न ही मूलभूत सुविधाएं।

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