अपनाएं चेतन चीता की ये पांच खूबियां और बनें उनकी ही तरह जांंबाज
सीआरपीएफ कमांडेंट चेतन कुमार चीता अपनी बहादुरी और अपने आत्मविश्वास की वजह से ही आज मौत को चकमा देने में भी सफल हो पाएं हैं। जानिए उनकी वह पांच खूबियां जो आपको भी उनकी तरह बना सकती हैं।
नई दिल्ली। चेतन कुमार चीता, एक ऐसा नाम जिससे शायद दो माह पहले देश के लोग वाकिफ नहीं थे लेकिन आज हर तरफ उनकी और उनकी बहादुरी की ही बातें हो रही हैं। सीआरपीएफ कमांडेंट चेतन चीता ने साबित कर दिया है 'भाग्य सिर्फ बहादुरों' का ही साथ देता है। नौ गोलियां लगने के बाद भी वह आज मौत को चकमा देकर जिंदगी के साथ आ गए हैं। एम्स में करीब दो माह तक कोमा से जूझने के बाद अब यह जांबाज घर जाने को तैयार है। एक ऐसा जाबांज जिसकी बहादुरी ने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया। 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के बांदीपोर में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों के साथ मुठभेड़ में सीआरपीएफ कमांडेंट चेतन चीता बुरी तरह से जख्मी हो गए थे। आइए आपको उनकी पांच ऐसी खूबियों के बारे में बताते हैं जिसके बाद भी आप भी उनकी ही तरह जाबांज बन सकते हैं।

दृढ़ निश्चय
चेतन चीता को 14 फरवरी के बाद श्रीनगर से एयरलिफ्ट करके एम्स में भर्ती कराया गया था। जिस समय उन्हें एम्स लाया गया था वह बहुत ही नाजुक स्थिति में थे। जिन डॉक्टरों ने उनका इलाज किया उनका कहना है कि चेतन चीता ने लगातार दृढ़ निश्चय और साहस का परिचय दिया और इसकी वजह से ही उन्हें दो माह तक कोमा में रहने के बाद भी इस लड़ाई को जीतने की ताकत मिली। चेतन चीता जब बुधवार को मीडिया के सामने थे और उनसे सवाल पूछा गया तो उनका कहना था, 'इट्स रॉकिंग।'

हर वादे को पूरा करने वाले चीता
चेतन चीता की पत्नी उमा सिंह जो उनके साथ एक चट्टान की तरह खड़ी रहीं, कहती हैं कि उन्हें पूरा भरोसा था कि उनके पति इस जंग को जरूर जीतेंगे। उमा सिंह अपने पति को स्कूल के दिनों से जानती हैं और कहती हैं कि वह एक इंसान हैं जो अपना हर वादा पूरा करते हैं। उमा ने बताया कि जिस समय चेतन चीता को श्रीनगर से एयरलिफ्ट किया गया था उनकी आंखें बंदी थीं और वह बेहोश थे। लेकिन जब उन्होंने देखा कि चेतन चीता सांस ले रहे हैं, तो उन्हें भरोसा हो गया कि वह जरूर ठीक हो जाएंगे।

मजबूत इच्छाशक्ति
डॉक्टरों ने बुधवार को कहा कि चेतन चीता की मजबूत इच्छाशक्ति की वजह से ही आज वह इस मुकाम पर पहुंच चुके हैं। उनकी पत्नी भी कहती हैं कि डॉक्टरों ने उन्हें बताया था कि वह कोमा में हैं लेकिन जब कभी भी वह, उनका हाथ पकड़ती तो वह प्रतिक्रिया देते थे। इसकी वजह से ही उन्हें और डॉक्टरों को भरोसा हुआ कि वह जरूर वापस आएंगे। डॉक्टरों ने उनके आत्मविश्वास और मजबूत इच्छाशक्ति की भी तारीफ की और कहा कि इसके दम पर ही आज वह मौत को हराने में सफल हो सके।

हार नहीं मानूंगा
चेतन चीता को नौ गोलियां लगी थीं और आतंकियों ने 30 राउंड फायरिंग की थी। यह नौ गोलियां उन्हें जांघ, दोनों हाथों, कंधे , पेट, पेट का निचला हिस्से जैसे अंग शामिल हैं और एक गोली तो उनकी आंख को चीरती हुई बाहर निकल गई थी। इसके बाद भी जिंदगी को जीतने और मौत के साथ लड़ने की ताकत, जो उनके कभी हार नहीं मानने वाले रवैये को दिखाती है, ने उन्हें आज फिर से वापस लौटा दिया है।

संघर्ष करने की आदत
चेतन चीता आतंकियों के साथ मोर्चा लेते समय बुरी तरह जख्मी हो गए थे। इसके बाद भी वह लड़ते रहे और उन्होंने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी को भी ढेर किया। अब जबकि वह ठीक हैं, उनके लिए अगले कुछ माह संघर्ष भरे होने वाले हैं। उन्हें रिहैबिलिटेशन से गुजरना होगा लेकिन उनके करीबियों को भरोसा है कि वह इस संघर्ष को भी जीतेंगे और जल्द ही फिर से यूनिफॉर्म में नजर आएंगे।












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