Medicine Price Hike: मंडाविया ने 2013 के आदेश का जिक्र किया, खड़गे को जवाब- 651 दवाओं की औसत कीमत घटेगी
Medicine Price Hike पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को जवाब दिया है। उन्होंने दवाओं की कीमतों में वृद्धि पर नौ साल पुराने आदेश का जिक्र कर जानकारी दी है।

रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने कहा है कि आवश्यक दवाओं या अनुसूचित योगों की अधिकतम मूल्य सीमा होती है। इसे उच्चतम मूल्य कहा जाता है। इसे थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर प्रत्येक वर्ष बढ़ाया जा सकता है। सरकार औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ), 2013 के माध्यम से दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करती है। नियमों के आधार पर ही दवाओं की कीमतें बढ़ाई जा सकेंगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे को जवाब दिया कि फार्मा कंपनियां पूरा दाम नहीं बढ़ाती हैं।
दवाओं की कीमतों में उछाल की आशंका पर सरकार का जवाब
सिलसिलेवार ट्वीट में खड़गे को जवाब देते हुए केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा, भले ही फार्मा कंपनी WPI के आधार पर दवाओं की कीमतें बढ़ाएगी, लेकिन दवाओं की कीमत में 6.73% की गिरावट का अनुमान लगाया गया है।
I would like to humbly tell you some facts about the information you disseminated through tweet, on increase in the prices of medicines...Even if the company increases the prices based on WPI, a dip of 6.73% has been estimated: Union Health Minister Mansukh Mandaviya responds to… pic.twitter.com/786EFkhKi0
— ANI (@ANI) April 3, 2023
Medicine Price Hike पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को जवाब दिया है। उन्होंने कहा, "दवाओं की कीमतों में वृद्धि पर आपके (खड़गे) द्वारा ट्वीट के माध्यम से प्रसारित जानकारी के बारे में विनम्रतापूर्वक कुछ तथ्य बताना चाहता हूं।"

रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने कहा है कि आवश्यक दवाओं या अनुसूचित योगों (scheduled formulations) की अधिकतम मूल्य सीमा होती है। इसे उच्चतम मूल्य कहा जाता है। इसे थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर प्रत्येक वर्ष बढ़ाया जा सकता है। सरकार औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ), 2013 के माध्यम से दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करती है। नियमों के आधार पर ही दवाओं की कीमतें बढ़ाई जा सकेंगी।

मंडाविया ने खड़गे को विस्तार से दिए जवाब में कहा कि भारत में सरकार औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ), 2013 के माध्यम से दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करती है। आवश्यक दवाओं (Essential medicines) या अनुसूचित योगों (scheduled formulations) की अधिकतम मूल्य सीमा होती है जिसे उच्चतम मूल्य कहा जाता है। इसे थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर प्रत्येक वर्ष बढ़ाया जा सकता है सरकार की तरफ से निर्धारित दर। साल 2022 के लिए, WPI दर 12.12% निर्धारित की गई थी। अब फार्मा कंपनी और दवा निर्माता 1 अप्रैल, 2023 से इसी सीमा के भीतर कीमतें बढ़ा सकते हैं।

रसायन और उर्वरक मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया, सितंबर 2022 में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची (NLEM) में बदलाव करते हुए 870 दवाओं को जोड़ा। इन दवाओं को DPCO, 2013 के तहत निर्धारित किया गया था और नेशनल फार्मास्युटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने इन दवाओं की वैध अधिकतम कीमतों को संशोधित करना शुरू कर दिया था। 870 essential medicines में से 651 की नई अधिकतम कीमतें हैं। इसके परिणामस्वरूप औसतन 16.62% की कमी आई है। इसलिए, 12.12% की अपेक्षित वृद्धि के बजाय, इन 651 आवश्यक दवाओं की वैध अधिकतम कीमतों में औसतन 6.73% अनुमानित कमी आएगी।
इसका मतलब यह है कि 1 अप्रैल, 2023 से WPI के कारण आवश्यक दवाओं की कीमतों में वृद्धि की भरपाई 651 आवश्यक दवाओं की वैध अधिकतम कीमतों में औसत कमी से की जाएगी। केमिकल और फर्टिलाइजर मिनिस्ट्री के बयान में कहा गया है कि कुल मिलाकर, यह खबर भारतीय पाठकों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह जरूरी दवाओं (Essential Medicine) की कीमतों को प्रभावित करती है। इसका उनके स्वास्थ्य संबंधी खर्चों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।












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