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चंद्रयान-3: चांद की जमीन का आखिर कौन है असली मालिक, क्‍या वहां पर जमीन खरीदना या बेचना वैध है?

Chandrayaan-3 Moon land: ISRO का चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरकर विश्‍वविजेता बन चुका है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि चांद के साउथ पोल यानी दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला भारत पहला देश बन चुका है। 23 अगस्‍त 2023 की शाम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्‍थान (ISRO) के वैज्ञानिकों को मिली इस कामयाबी का अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश तक गुणगान कर रहे हैं वहीं भारत के चंद्रयान-3 के चांद पर पहुंचते ही चांद की जमीन की खरीद-फरोख्‍त का बाजार गर्म हो चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहा है आखिर चांकी जमीन का मालिक कौन हैं और चांद पर क्‍या जमीन खरीदना कानूनी हैं?

is it legal to buy land on moon

बता दें चंद्रयान-3 की कामयाबी के बाद लोग चांद पर जमीन खरीदने के लिए और अधिक उत्‍सुक हैं। ऐसे में ये जानना और भी जरूरी हो जाता है कि क्‍या सच में किसी देश या कंपनी के पास चांद की जमीन बेचने का मालिकाना हक है? क्‍या अगर इनसे हम चांद पर जमीन खरीदते हैं तो क्‍या जब चांद पर भविष्‍य में कालोनियां बसेगी तो हमें चांद की जमीन पर प्‍लॉट काट कर दिए जाएंगे?

शाहरुख खान के फैन ने गिफ्ट की है चांद पर जमीन

बता दें चांद की जमीन बेचने का काम धरती पर बैठी कई कंपनियां कर रही है जिसने स्‍वर्गीय सुशांत सिंह राजपूत ने अपने जीते जी चांद के 'सी ऑफ मकसिवो' पर जमीन खरीदी थी उनके अलावा अब तक कई लोग चांद पर जमीन खरीद भी चुके है। शाहरुख खान के फैन ने भी उन्‍हें चांद पर जमीन गिफ्ट की है।

ये कंपनियां बेच रही हैं चंद्रमा की जमीन

ऐसी खबरों को सुनकर धरती पर बैठ कर चांद की जमीन बेचने वाली Luna Society International और International Lunar Lands Registry जैसी कंपिनयों के दावों पर भरोसा और बढ़ गया है लोगों को लग रहा है कि थोड़ी बहुत वो भी चांद पर अपनी आने वाली पुस्‍तों के लिए क्‍यों ना खरीद ली जाए।

कौन है चांद की जमीन का असली मालिक?

हालांकि सच जानकर ताज्‍जुब होगा कि भले ही अमेरिका, रूस, चाइना और भारत चांद पर पहुंच कर अपना झंडा गाड़ चुका है लेकिन चांद की जमीन का कोई मालिक नहीं है। कोई भी पृथ्‍वी को छोड़कर चांद या किसी भी गृह की जमीन का एक भी इंच बेच नहीं सकता है।

चांद की जमीन बेचना क्‍या कानूनी है

इसके पीछे वजह है कि 10 अक्टूबर, 1967 के आउटर स्पेस ट्रीटी (outer Space Treaty 1967) हुई थी जिसके अनुसार चांद पर जमीन खरीदना गैरकानूनी है। आउटर स्पेस ट्रीटी अंतरिक्ष का पहला कानूनी दस्‍तावेज भी है। इस ट्रीटी यानी इस समझौते पर दुनिया के 109 देशों के हस्‍ताक्षर हैं, इस समझौते में भारत भी शामिल है। इस समझौते के अनुसार किसी भी देश का चांद पर अधिकार नहीं है। वहीं चांद और अन्‍य गृहों पर एस्‍ट्रोनॉट्स को जाने की इसलिए परमीशन है क्‍योंकि अंतरिक्ष का अध्‍ययन दुनिया के सभी देशों के लाभ के लिए है।

अंतरिक्ष मानवजाति की साझा विरासत लेकिन....

इस ट्रीटी के अनुसार अंतरिक्ष मनुष्‍यों की साझा विरासत है। इंडियन एक्‍सप्रेस की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार विशेषज्ञों का इस बारे में कहना है कि अंतरिक्ष मानवजाति की साझा विरासत का तात्‍पर्य है कि कोई भी इसका उपयोग अपने निजी उद्देश्‍य से नहीं कर सकता और ना ही इस पर हक जता सकता है। ये संधि केवल दुनिया भर की स्‍पेस एजेंसियों को अंतरिक्ष में शोध करने का अधिकार देती है। इसके साथ ही कोई भी गैर कानूनी संस्‍था को अंतरिक्ष में शोध करने का अधिकार नही है।

फिर किस आधार पर ये कंपनियां बेच रही है चांद की जमीन

अब ऐसे में सवाल उठता है कि जब चांद पर जमीन बेचना गैर कानूनी है तो ये कंपनियां कैसे वहां की जमीन बेचने का दावा कर रही हैं। तो इसका जवाब है कि Luna Society International और International Lunar Lands Registry जैसी कंपनियां चांद पर जमीन बेच रही हैं वो ये कहती हैं कि उन्‍हें इसके लिए उनके देश ने अधिकृत किया है जबकि इस बयान के सपोर्ट में उनके पास कोई सबूत या प्रमाण नहीं है। ऐसे में आप भी अगर चांद पर जमीन खरीदने की सोच रहे हैं तो सावधान हो जाइए।

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