'Chandrayaan-3 Live Stream वाकई चौंकने वाला वीडियो!' YouTube भारत के सीईओ ने ISRO को दी बधाई

भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो के चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग की लोगों को कितनी बेसब्री से प्रतीक्षा थी, इसका अंदाजा यूट्यूब पर लाइव स्ट्रीम से जुड़े दर्शकों से संख्या से लगाया जा सकता है। व्यूवर्स की संख्या ने इस वीडियो के लिए एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया। ऐसे में यूट्यूब इंडिया से सीईओ नील मोहन से भी रहा नहीं गया। उन्होंने इस लाइव स्टीम वीडियो पर व्यूवर्स की संख्या को आश्चर्य व्यक्त किया है।

यूट्यूब के सीईओ नील मोहन ने इसरो के चंद्रयान-3 मिशन के विश्व स्तर पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली लाइव स्ट्रीम बनने पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक्स (पू्र्व में ट्विटर) पर लिखा है कि लाइव स्ट्रीम को 8 मिलियन से अधिक दर्शकों ने देखा। मोहन ने यूट्यूब इंडिया के आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने बताया कि कितने दर्शकों ने चंद्रयान-3 लॉन्च और चंद्रमा पर चंद्रयान के सॉफ्ट लैंडिंग की लाइव स्ट्रीम देखी थी।

Neil Mohan on Chandrayaan-3 Live Stream

यूट्यूब के सीईओ नील मोहन ने एक्स पर लिखा, "ऐसी चीजें जिन्होंने हमें आश्चर्यचकित कर दिया, भारत चंद्रमा पर उतरा! यूट्यूब पर @isro के लाइवस्ट्रीम में 8 मिलियन से अधिक दर्शकों का रिकॉर्ड है- हम बहुत खुश हैं!" उन्होंने आगे लिखा, "यह देखना बहुत रोमांचक था - @isro की पूरी टीम को बधाई। 8 मिलियन समवर्ती दर्शक अविश्वसनीय हैं!"

यूट्यूब के सीईओ की इस पोस्ट को कुछ घंटे पहले तक करीब 8,200 बार देखा जा चुका है। बता दें कि इसरो के चंद्रयान-3 मिशन के तहत 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह अंतरिक्ष यान ने सफल सॉफ्ट लैंडिंग की थी। जिसके बाद चीन, रूस और अमेरिका के बाद चांद पर कदम रखने वाला भारत चौथा देश बन गया।

कोरिया के विज्ञान,आईसीटी मंत्रालय और एयरोस्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट की ओर जारी बयान में कहा गया है कि चांद पर टचडाउन के बाद से, रोवर ने व्यापक रिसर्च की। इस दौरान कई अहम डेटा मिले। जिसमें मुख्य रूप से चंद्रमा की मिट्टी और वातावरण की संरचना का विश्लेषण शामिल है। चंद्रयान-3 के रोवर ने अपना असाइनमेंट पूरा करने के बाद उसे उसे स्लीप मोड में डाल दिया। एपीएक्सएस और एलआईबीएस पेलोड्स को भी बंद कर दिया गया है। इसरो के मुताबिक इन पेलोड्स में दर्ज सभी डेटा लैंडर के जरिए पृथ्वी पर ट्रांसमिट किया जा चुका है। जबिक रोवर प्रज्ञान की बैटरी पूरी तरह से चार्ज है। इसरो को उम्मीद है कि 22 सतंबर को जब चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर फिर से सूर्य की रोशनी पड़ेगी तो ये फिर से काम कर सकेगा।

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