Chandrayaan-2: भारत के दूसरे चंद्रमा अभियान की 10 बड़ी और रोचक बातें

नई दिल्ली- चंद्रयान-2 स्पेस टेक्नॉलोजी की दुनिया में पूरे विश्व की मानवता के लिए भारत का बहुत बड़ा योगदान साबित होने जा रहा है। अमेरिका, रूस, चीन और जापान जैसे बड़े-बड़े देश हैरान हैं कि भारत ने अपने देश में इतनी बड़ी टेक्नॉलोजी कैसे विकसित कर ली है और वो भी उन सबके मुकाबले बहुत ही मामूली लागत में। यह मिशन भारत को चांद के बारे में वैसी जानकारियां जुटाने में मदद करेगा, जिससे अब तक दुनिया अनजान है। जाहिर की इस मिशन की कामयाबी से स्पेस की दुनिया में भारत की पहचान को बहुत ज्यादा सम्मान मिलने वाला है। आइए चंद्रयान-2 से जुड़ी हुई 10 रोचक तथ्यों पर नजर डालते हैं।

बड़ी और रोचक बात- 1

बड़ी और रोचक बात- 1

यह पहला स्पेस मिशन है, जिसमें चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र में किसी स्पेस मशीन की सॉफ्ट लैंडिंग होनी है। इसके सतह का भू-भाग चांद के उत्तर ध्रुवीय इलाके से कहीं ज्यादा बड़ा है और ये हमेशा छाए में रहता है।

बड़ी और रोचक बात- 2

पृथ्वी के लिए चंद्रमा ब्रह्मांड का निकटतम पिंड है, जिसके आधार पर अंतरिक्ष की खोज और उसे सहेजने की कोशिश की जा सकती है। लेकिन, खास बात ये है कि चंद्रयान-2 से पहले किसी भी देश ने चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र की खोजबीन की कोशिश ही नहीं की। पूर्व इसरो चीफ जी माधवन नायर ने कहा है कि, "चंद्रयान-2 इसरो के अबतक के सभी अभियानों में सबसे ज्यादा कॉम्पलेक्स मिशन साबित होने जा रहा है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह चंद्रयान-1 द्वारा जुटाए गए डाटा की पुष्टि करने का फॉलोअप मिशन है। यह युवा वैज्ञानिक समूहों के लिए बहुत बड़ा मोटिवेटर साबित होने जा रहा है।"

बड़ी और रोचक बात- 3

बड़ी और रोचक बात- 3

चंद्रयान-2 भारतीय स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) का मून मिशन है, जिसमें एक ऑर्बिटर, एक लैंडर (विक्रम) और एक रोवर (प्रज्ञान) शामिल हैं।

बड़ी और रोचक बात- 4

बड़ी और रोचक बात- 4

जीएसएलवी मार्क-3 जो चंद्रयान-2 को उसके निर्धारित ऑर्बिट तक लेकर जा रहा है, भारत का अबतक का सबसे शक्तिशाली स्पेस लॉन्चर है।

बड़ी और रोचक बात- 5

बड़ी और रोचक बात- 5

इस मिशन में ऑर्बिटर की लाइफ एक साल और एक मीटर लंबे रोबर की संभावित उम्र वन लूनर डे यानी धरती के 14 दिनों के बराबर है।

बड़ी और रोचक बात- 6

बड़ी और रोचक बात- 6

स्पेसक्राफ्ट लैंडर (विक्रम) की टेस्टिंग के लिए इसरो ने बेंगलुरु के अपने चल्लाकेरे साइंस सिटी में चंद्रमा की सतह की तरह का एक परीक्षण स्थल का निर्माण किया था।

बड़ी और रोचक बात- 7

बड़ी और रोचक बात- 7

लैंडर (विक्रम) की टेस्टिंग के लिए बेंगलुरु के चल्लाकेरे साइंस सिटी में जो जमीन तैयार की गई, उसके लिए मिट्टी तमिलनाडु में सलेम के पास के कुछ खास जगहों से जुटाई गई थी। कई राष्ट्रीय एजेंसियों के भू-वैज्ञानिकों ने पाया था कि 'अनॉर्थोसाइट' की चट्टानें संरचना और विशेषताओं में चंद्रमा की मिट्टी से काफी मिलती-जुलती हैं।

बड़ी और रोचक बात- 8

बड़ी और रोचक बात- 8

हिंदी में विक्रम का मतलब साहस और वीरता से जुड़ा है। विक्रम (लैंडर) का नाम भारतीय स्पेस कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है।

बड़ी और रोचक बात- 9

बड़ी और रोचक बात- 9

चंद्रयान-2 में 14 इंडियन पेलोड्स या अध्ययन उपकरण हैं, जिससे चंद्रमा के टोपोग्राफी, सिस्मोग्राफी, खनीजों की पहचान और उनका वितरण और उसकी सतह की रासायणिक संरचनाओं की स्टडी की जा सकेगी।

बड़ी और रोचक बात- 10

बड़ी और रोचक बात- 10

15 जुलाई के तड़के 2.51 बजे लॉन्चिंग के बाद यह 52 से 54 दिनों की यात्रा करके चांद की सतह पर उतरेगा। इस दौरान यह पृथ्वी से चंद्रमा के बीच 3.84 किलोमीटर की यात्रा कर लेगा।

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