Chandra Grahan 2025: चंद्रमा को लगा वर्ष का आखिरी ग्रहण, सुर्ख लाल रंग के चांद का हुआ दीदार
Chandra Grahan 2025: आज 7 सितंबर को वर्ष का दूसरा और आखिरी पूर्ण चंद्रग्रहण लगा। हाल के वर्षों में यह सबसे लंबी अवधि का चंद्रग्रहण है। इस चंद्रग्रहण ने खगोलविदों और लोगों को मंत्रमुग्ध करने वाली है, क्योंकि यह दुर्लभ खगोलीय घटना है जिसमें सुर्ख लाल रंग के चांद का दीदार हो रहा है, इसे "ब्लड मून" कहा जाता है।
9:47 से ये चंद्र ग्रहण शुरू हो चुका और पूर्ण ग्रहण रात 11:01 बजे IST तक होगा। चंद्रमा 82 मिनट तक पृथ्वी की छाया में पूरी तरह से ढका रहेगा।

इससे पहले 8 नवंबर, 2022 को बीजिंग में एक पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान भी 'ब्लड मून' देखा गया था। जैसे ही पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के ठीक बीच में आती है, यह सूर्य के प्रकाश को चंद्रमा की सतह तक पहुंचने से रोक देती है। केवल लाल-फ़िल्टर्ड किरणें ही पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजर पाती हैं, जिससे चंद्रमा एक अजीब, तांबे जैसी रोशनी में नहाया हुआ दिखाई देता है।
कोलकाता में रेड मून का हुआ दीदार
क्या नग्न आंखों से देख सकते हैं चंद्र ग्रहण?
सूर्यग्रहण के विपरीत, इस चंद्रग्रहण का नग्न आंखों से आनंद लेना पूरी तरह से सुरक्षित है। किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं है, हालांकि दूरबीन और टेलीस्कोप से ग्रहण वाले चंद्रमा की सूक्ष्म बनावट और रंगों का पता लगाने के लिए उत्साही लोगों के लिए दृश्य को बढ़ाया जा सकता है।
भारत में कहां-कहां दिखा रेड मून
यह ग्रहण भारत में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता सहित भारत के प्रमुख शहरों में देखने को मिला। बेंगलुरू के लोगों को बादल के कारण रेड मून का दीदार नहीं हो सका।
विदेश में कहां दिखा ग्रहण?
इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, सुदूर पूर्व, मध्य पूर्व, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भी दिखाई दिया। हालांकि, उत्तर और दक्षिण अमेरिका के लोग इस खगोलीय घटना को नहीं देख पाए।
भारत में अब कब दिखेगा अगला पूर्व चंद्रग्रहण?
खगोलविदों के मुताबिक, 27 जुलाई, 2018 के बाद यह पहली बार था कि पूर्ण चंद्रग्रहण भारत के सभी हिस्सों से देखा जा सका। इस ग्रहण की एक और खास बात यह थी कि यह 2022 के बाद का सबसे लंबा पूर्ण चंद्रग्रहण था। अगला पूर्ण चंद्रग्रहण 3 मार्च, 2026 को होगा।
कब होता है चंद्रग्रहण?
चंद्रग्रहण तब होता है जब पृथ्वी चंद्रमा और सूर्य के ठीक बीच में आ जाती है, जिससे पृथ्वी की छाया चंद्रमा की सतह पर पड़ती है। नासा के अनुसार, इससे चंद्रमा धुंधला हो जाता है और कभी-कभी कुछ घंटों के लिए इसकी सतह लाल रंग की हो जाती है। यह घटना पूर्णिमा के दिन होती है।












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