5 राज्यों से 195 लोगों ने तोड़ा ऑक्सीजन की कमी से दम, सरकार ने कहा- राज्यों से नहीं मिले रिकॉर्ड

नई दिल्ली, जुलाई 21: कोरोना की दूसरी लहर का भयानक मंजर आज भी लोगों को याद हैं। कैसे अस्पताल मरीजों से अट पड़े थे। लोग दवाओं और कोविड लेकर से लेकर ऑक्सीजन के लिए दर की ठोकर खाने को मजबूर थे। इस दौरान हजारों लोगों को कोरोना की दूसरी लहर ने अपना निशाना बनाया। इस बीच मंगलवार को राज्यसभा में सरकार ने बताया कि ऑक्सीजन की कमी से किसी की भी मौत की जानकारी नहीं है। सदन में एक सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि ऑक्सीजन की कमी से किसी के भी मरने की कोई सूचना राज्य या केंद्रशासित प्रदेश से नहीं मिली है। ऐसे में टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट कुछ और कहानी बयां कर रही हैं।

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    oxygen shortage

    जहां केंद्र सरकार ने सदन में बताया है कि राज्यों से ऑक्सीजन की कमी के कारण मौत की कोई जानकारी नहीं है। वहीं TOI की रिपोर्ट के मुताबिक 5 राज्यों से ही ऑक्सीजन की किल्लत के चलते करीब 195 लोगों की दम तोड़ा हैं। उन राज्यों में दिल्ली, गोवा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और हरियाणा शामिल हैं।

    दिल्ली में ऑक्सजीन की किल्लत से 12 लोगों की मौत

    दिल्ली के बत्रा स्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. एससीएल गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया था कि 1 मई को ऑक्सीजन की कमी के कारण 12 मरीजों ने दम तोड़ा था। आईसीयू में 6 मरीज और वार्ड में भर्ती 2 अन्य मरीजों की मौत हुई। वहीं 4 दूसरे और मरीज जिनकी इस परेशानी के चलते सांसें उखड़ गई थी। बत्रा अस्पताल में हुई मौतों पर दुख व्यक्त करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उस दौरान इसे बेहद दर्दनाक बताया था। साथ ही दिल्ली के ऑक्सीजन कोटे का भी मांग की गई थी। यहीं नहीं 25 जून को एक अन्य ट्वीट में भाजपा द्वारा दिल्ली सरकार पर शहर की ऑक्सीजन की मांग को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप लगाने के बाद उन्होंने कहा था कि ऑक्सीजन की कमी के कारण लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है। उन्हें झूठा मत कहो, उन्हें बहुत बुरा लग रहा है।

    गोवा में कम से कम 83 लोगों की मौत

    टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक गोवा में 11 से 15 मई के बीच ऑक्सीजन की किल्लत के कारण कम से कम 83 लोगों की जान गई हैं। सबसे ज्यादा 26 मौतें पहले दिन हुईं। 11 मई को गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने कहा था कि ऑक्सीजन की बाधित आपूर्ति के कारण हमें लगता है कि गोवा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 2 बजे से 6 बजे के बीच कई लोग की मौत हो रही हैं। एक दिन में जरूरत लगभग 1,200 सिलेंडर थी, लेकिन 400 सिलेंडर मिले थे। वहीं कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि उसके सामने रखी गई सामग्री ने स्थापित किया कि कुछ रोगियों ने ऑक्सीजन की आपूर्ति के अभाव में दम तोड़ दिया।

    कर्नाटक में 36 मरीजों की मौत

    कर्नाटक के चामराजनगर जिले में 2 और 3 मई को ऑक्सीजन की कमी के कारण 24 मरीजों की मौत हो गई। कर्नाटक हाईकोर्ट की ओर से गठित एक पैनल ने निष्कर्ष निकाला कि वास्तव में ऑक्सीजन की कमी के कारण 36 मरीजों की मौत हुई थी न कि 24 की। हाई कोर्ट पैनल की रिपोर्ट में कहा गया था कि जिले में मेडिकल ऑक्सीजन के बफर स्टॉक की कमी के कारण लोगों की मौत हुई है। अब तक 24 मरीजों को मुआवजा दिया गया।

    आंध्र प्रदेश में 45 कोविड मरीजों की मौत

    टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक आंध्र प्रदेश में मई में ऑक्सीजन की कमी से 45 कोविड मरीजों की मौत हुई, लेकिन राज्य सरकार ने ऐसी 23 मौतों को ही स्वीकार किया। सभी मौतें रायलसीमा क्षेत्र से हुई हैं। 28 जून को सरकार ने उच्च न्यायालय के समक्ष स्वीकार किया कि तिरुपति के एक सरकारी संस्थान रुइया अस्पताल में 23 लोगों की मौत हुई थी। सरकारी वकील ने उच्च न्यायालय को बताया कि मौतें ऑक्सीजन टैंकर के आने में देरी के कारण हुई हैं।

    हरियाणा में 19 मौतों के जांच के आदेश

    हरियाण सरकार ने 5 अप्रैल से 1 मई के बीच ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई कम से कम 19 मौतों की जांच के आदेश दिए। ये रेवाड़ी के विराट अस्पताल से 4, गुड़गांव के कथूरिया अस्पताल से 4, हिसार के सोनी बर्न अस्पताल से 5 और गुड़गांव में कृति अस्पताल से 6 मरीजों की मौत रिपोर्ट की गई थी।

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