MSP और कृषि सुधार को लेकर ऐक्शन में केंद्र सरकार, उठाया बड़ा कदम
नई दिल्ली, 18 जुलाई: केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य और कृषि क्षेत्र में सुधारों को बढ़ावा देने के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण समिति गठित की है। इसकी जानकारी कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से दी गई है। मंत्रलाय की ओर से कहा गया है कि यह समिति जीरो-बजट आधारित खेती, फसलों के पैटर्न बदलने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को और ज्यादा प्रभावी और पारदर्शी गठित की जा रही है। इस समिति में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, किसानों के प्रतिनिधियों के अलावा कृषि वैज्ञानिकों और अर्थशास्त्रियों को भी शामिल किया गया है।

एमएसपी को लेकर केंद्र सरकार का बड़ा कदम
केंद्र सरकार ने एमएसपी और खेती के पैटर्न में बेहतर बदलाव के लिए जो समिति गठित करने का फैसला किया है, उस एमएसपी, फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती समिति की अध्यक्षता पूर्व कृषि सचिव संजय अग्रवाल करेंगे। न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर किसानों की कई तरह की शिकायतें रही हैं और इसलिए केंद्र सरकार ने इसे और अधिक प्रभावीऔर पारदर्शी बनाने की पहल की है। किसान आंदोलन के दौरान भी एमएसपी बहुत बड़ा मुद्दा रहा था। इसके साथ ही जीरो-बजट आधारित कृषि को बढ़ावा देने और फसलों के पैटर्न बदलने पर जोर बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पूर्व कृषि सचिव संजय अग्रवाल की अगुवाई में समिति
इस समिति में इसके अध्यक्ष संजय अग्रवाल के अलावा कई अहम नाम शामिल हैं। इनमें नीति आयोग के मेंबर (कृषि) रमेश चंद, किसानों के प्रतिनिधि के तौर पर संयुक्त किसान मोर्चा के तीन सदस्य (इनके नाम बाद में शामिल होंगे), कृषि अर्थशास्त्री डॉक्टर सीएससी शेखर और डॉक्टर सुखपाल सिंह, राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाले किसान भारत भूषण त्यागी और अन्य किसान संगठनों के सदस्यों में गुणवंत पाटिल, प्रमोद कुमार चौधरी, गुणी प्रकाश, कृष्णवीर चौधरी और सैयद पाशा पटेल भी शामिल रहेंगे।
सभी स्टेकहोल्डर्स को जगह देने की कोशिश
इस समिति में इफ्को के चेयरमैन दिलीप संघानी के अलावा सहकारिता क्षेत्र के ही विनोद आनंद और सीएसीपी के मेंबर नवीन सिंह को भी स्थान दिया गया है। कृषि वैज्ञानिकों में डॉक्टर पी चंद्रशेखर, डॉक्टर जेपी शर्मा और डॉक्टर प्रदीप कुमार बिसेन भी शामिल किए गए हैं। इनके अलावा इस समिति में केंद्र सरकार के जो प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं, वे हैं- कृषि सचिव, आईसीएआर के डायरेक्टर जनरल, खाद्य सचिव, सहकारिता सचिव और कपड़ा सचिव। इनके अलावा राज्यों के प्रतिनिधियों को भी इसमें जगह दी गई है।












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