टमाटर की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार का दावा, पिछले एक महीने में 22 प्रतिशत गिरावट दर्ज
टमाटर की कीमतों में एक महीने के भीतर 22 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। जिससे यह 67.50 रुपए प्रति किलोग्राम से घटकर 52.35 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गई है। यह गिरावट बेहतर आपूर्ति और अनुकूल मौसम परिस्थितियों का नतीजा है। कृषि विभाग के अनुसार 2023-24 के लिए टमाटर उत्पादन में 4 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। जो इसे 204.25 लाख टन से बढ़ाकर 213.20 लाख टन तक पहुंचा देगा।
मौसमी चक्रों का असर, आपूर्ति बनी प्रमुख कारक
टमाटर की खेती पूरे साल होती है। लेकिन इसका उत्पादन मौसमी चक्रों के आधार पर उतार-चढ़ाव करता है। बेहतर उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार के चलते प्रमुख बाजारों में कीमतों में गिरावट देखी गई। दिल्ली की आज़ादपुर मंडी में टमाटर की कीमतें 5,883 रुपए प्रति क्विंटल से गिरकर 2,969 रुपए प्रति क्विंटल हो गई। पिंपलगांव, मदनपल्ले और कोलार जैसे अन्य बाजारों में भी कीमतों में इसी तरह की गिरावट देखी गई।

अक्टूबर की बारिश से प्रभावित हुई थीं कीमतें
आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में अक्टूबर में लगातार बारिश के कारण फसल की गुणवत्ता और वितरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। इससे टमाटर की कीमतों में तेज उछाल आया था। हालांकि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात के उत्पादक क्षेत्रों से आपूर्ति में सुधार के साथ, कीमतों में स्थिरता देखी गई। अनुकूल मौसम परिस्थितियों ने उत्पादन में स्थिरता और बेहतर वितरण सुनिश्चित किया है।
लंबी अवधि में कीमतें अभी भी उच्च स्तर पर
हालांकि कीमतों में हालिया गिरावट उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आई है। लेकिन साल-दर-साल आधार पर टमाटर की कीमतें अभी भी काफी अधिक हैं। आईसीआईसीआई बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार टमाटर की कीमतों में पिछले वर्ष की तुलना में 161 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
नवंबर में सब्जियों की कीमतें महीने-दर-महीने 4.1 प्रतिशत तक गिरी। लेकिन आलू और प्याज जैसी अन्य आवश्यक सब्जियों में भी साल-दर-साल क्रमशः 65 प्रतिशत और 52 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। अक्टूबर में सब्जियों की कीमतें 57 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। जो बाजार में महत्वपूर्ण मुद्रास्फीति दबाव का संकेत देती हैं।
उपभोक्ताओं के लिए राहत और चुनौतियां
हालांकि टमाटर की कीमतों में आई गिरावट उपभोक्ताओं के लिए एक राहत है। लेकिन यह स्थिति कृषि बाजारों में मौजूद अस्थिरता को रेखांकित करती है। आपूर्ति और उत्पादन चक्रों पर मौसम के प्रभाव से बाजार की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहता है।
टमाटर की कीमतों में हालिया गिरावट बढ़ी हुई आपूर्ति और अनुकूल मौसम परिस्थितियों का परिणाम है। लेकिन लंबी अवधि में कीमतें उच्च स्तर पर बनी हुई हैं। यह स्थिति मौसम और कृषि बाजार के बीच गहरे संबंध को उजागर करती है। जो देश के उपभोक्ताओं और किसानों दोनों को प्रभावित करता है।
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