आपके घर तक पानी-सीवर पहुंचाने के लिये पहली किश्त जारी
आपके घर तक सीवर-लाइन और पानी की पाइपलाइन बिछाने के लिये केंद्र सरकार ने पहली किश्त जारी कर दी है। अब अगर काम समय पर नहीं हो, तो आप केंद्र को नहीं, राज्य सरकार पर निशाना साधियेगा। अरे हां आपको बता दें कि पहली किश्त में उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्य नहीं हैं। यह किश्त अटल मिशन परियोजना के तहत जारी की गई है।

शहरी विकास मंत्रालय ने अटल मिशन के अंतर्गत वित्त वर्ष 2015-16 के लिए कायाकल्प और शहरी परिवर्तन (अमृत) के लिए 13 राज्यों को 1.062.27 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी है। यह 13 राज्यों को घोषित 5,311.38 करोड़ रुपये की कुल केंद्रीय सहायता का हिस्सा है। मंत्रालय ने 2015-16 के लिए अटल मिशन कार्य योजना को स्वीकृति दी है। इसके अंतर्गत 13 राज्यों के 286 शहरों में 11,671.76 करोड़ रुपये निवेश किए जाएंगे। मंत्रालय ने अभी तक 286 शहरों के लिए कुल 939 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। ये परियोजनाएं अधिकतर पानी सप्लाई तथा सीवर नेटवर्क सेवाओं से जुड़ी हैं।
यूपी बिहार गायब
पहली किश्त में यूपी बिहार गायब है। जबकि 2017 के चुनाव के लिहाज से उत्तर प्रदेश मोदी सरकार के लिये बहुत अहम है, वहीं बिहार को जो सवा लाख करोड़ के पैकेज का वादा किया है, उसकी वजह से लोग केंद्र से अच्छी निधि की आस लगाये बैठे हैं।
पहली किश्त में तमिलनाडु को 274 करोड़ रुपये, मध्य प्रदेश को 134 करोड़ रुपये, गुजरात को 113 करोड़ रुपये, पश्चिम बंगाल को 110 करोड़ रुपये , राजस्थान को 92 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश को 60 करोड़ रुपये मिले हैं।

अटल मिशन के मुख्य बिंदु-
- अटल मिशन इस वर्ष जून में लांच किया गया था।
- इसका उद्देश्य प्राथमिकता के आधार पर प्रति दिन प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी की सप्लाइ करना है।
- 500 मिशन शहरों में सभी घरों को पानी सप्लाई कनेक्शन और सीवर कनेक्शन देना मुख्य लक्ष्य है।
- बारिश के पानी के लिए नाली बनाने, गैर-मोटर परिवहन प्रणाली को प्रोत्साहित करने का काम किया जायेगा।
- पार्क तथा हरित क्षेत्र की व्यवस्था को व्यापक रूप से विकसित किया जायेगा।
- अटल मिशन के अंतर्गत वस्तुपरक मानक के आधार पर केंद्रीय सहायता दी जाती है।
- प्रत्येक राज्य की कुल शहरी आबादी और वैधानिक शहरी निकायों की संख्या को समान महत्व दिया जाता है।
- मिशन के अंतर्गत 5 वर्षों के लिए 50,000 करोड़ रुपये की कुल केंद्रीय सहायता देने का प्रावधान है।
- केंद्रीय सहायता के रूप में 10 लाख से कमी आबादी वाले शहरों के लिए परियोजना लागत का 50 प्रतिशत और 10 लाख से अधिक
- आबादी वाले शहरों के लिए लागत की एक तिहाई तक दिया जाता है।












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