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इन छुट्टियों में छात्र सीखेंगे नई लैंग्वेज! धर्मेंद्र प्रधान ने CBSE की 'भारतीय भाषा समर कैंप' का किया शुभारंभ

CBSE Bharatiya Bhasha Summer Camps: भारत एक ऐसा देश है जहां हर राज्य, हर क्षेत्र की अपनी भाषा और संस्कृति है। इसी भाषायी विविधता को बच्चों के बीच लोकप्रिय बनाने और उन्हें एक-दूसरे की भाषाएं समझने व बोलने के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक बड़ी पहल की जा रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के विजन को ध्यान में रखते हुए, CBSE अब देशभर के अपने स्कूलों में 'भारतीय भाषा समर कैंप 2025' आयोजित करने जा रहा है।

इस अनोखी पहल के जरिए छात्र अपनी मातृभाषा के अलावा एक नई भारतीय भाषा सीख सकेंगे, वह भी खेल-कूद और सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए। यह कैंप केवल भाषा सिखाने का जरिया नहीं होगा, बल्कि छात्रों को देश की सांस्कृतिक विविधता से जोड़ने का एक जरिया भी बनेगा। वर्चुअल टूर, लोकगीत, नृत्य, कहानी सुनाना, संवाद अभ्यास और भाषा प्रतियोगिताओं के ज़रिए ये समर कैंप बच्चों के लिए न सिर्फ रोचक होंगे बल्कि यादगार भी बनेंगे।

CBSE Summer Camp

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 19 मई, 2025 को नई दिल्ली में भारतीय भाषा समर कैंप का शुभारंभ किया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप इस पहल का उद्देश्य छात्रों में बहुभाषावाद और सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देना है। CBSE गर्मियों की छुट्टियों के दौरान देश भर में अपने संबद्ध स्कूलों में ये शिविर आयोजित करेगा।

22 भाषाओं में मिलेगा कोर्स और गाइडेंस

20 मई तक एनसीईआरटी 22 अनुसूचित भाषाओं में एक संक्षिप्त कोर्स और स्टैंडर्ड गाइडेंस मटेरियल ऑनलाइन उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा, सीखने के लिए ऑडियो-विजुअल कंटेंट एनसीईआरटी, एससीईआरटी और डीआईईटी द्वारा तैयार किया गया है। कुछ कंटेंट पीएम-ई-विद्या चैनलों पर भी प्रसारित किया जाएगा।

छुट्टियों में होंगे समर कैंप

ये समर कैंप गर्मी की छुट्टियों के दौरान आयोजित किए जाएंगे और इनका समय स्कूलों के स्थानीय शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार तय होगा। हर स्कूल में 75 से 100 छात्रों के लिए कुल 28 घंटे का कैंप आयोजित किया जाएगा। संचालन के लिए NCRT तकनीकी मदद और सामग्री देगा, जबकि राज्य शिक्षा विभाग, एससीईआरटी और डीआईईटी राज्य और जिले स्तर पर समन्वय का जिम्मा संभालेंगे।

रोचक गतिविधियों से होगा भाषा सीखना आसान

कैंप में छात्रों को नए शब्दों, संवाद अभ्यास, और सांस्कृतिक जानकारियों के जरिए व्यावहारिक तरीके से भाषा सिखाई जाएगी। खरीदारी, रास्ता पूछने, और परिचय देने जैसी दैनिक गतिविधियों पर आधारित सत्र होंगे। संगीत, नृत्य और कहानियों के जरिए भी भाषा से जुड़ाव बढ़ाया जाएगा।

स्थानीय भाषा शिक्षक और वालंटियर्स करेंगे मदद

शिक्षण के लिए स्कूल अपनी उपलब्ध भाषा, कला या संगीत फैकल्टी का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, स्थानीय समुदाय से योग्य वालंटियर्स को भी जोड़ा जा सकता है। स्कूल अपनी जरूरत और उपलब्धता के हिसाब से आस-पास की भाषाएं भी सिखा सकते हैं।

अंतिम दिन होगा प्रदर्शन और प्रमाण पत्र वितरण

कैंप का सात दिवसीय शेड्यूल धीरे-धीरे छात्रों को भाषा में दक्ष बनाएगा। शुरुआत होगी अभिवादन से, फिर होंगे वर्चुअल टूर, स्थानीय व्यंजन और इतिहास की जानकारी, और अंत में छात्रों के परफॉर्मेंस और प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी दिए जाएंगे।

स्थायी भाषा क्लब बनाने की सलाह

स्कूलों को आगे भी भाषा अभ्यास के लिए भारतीय भाषा क्लब बनाने की सलाह दी गई है। साथ ही, हर स्कूल को गतिविधियों की ऑनलाइन रिपोर्ट और फोटो भी भेजनी होंगी।

एक भारत श्रेष्ठ भारत की ओर कदम

यह पहल 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' अभियान को मजबूती देती है और देश की भाषायी विविधता को संरक्षित रखने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।

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