दिव्यांग होने के कारण जिस बेटी को नहीं मिला एडमिशन, वही लेकर आई 96% अंक

वैभवी दिव्यांग है और एकमात्र इसी वजह से शहर के एक नामी स्कूल ने उसे एडमिशन देने से मना कर दिया। वैभवी ने हार नहीं मानी...और इतिहास रच दिया।

नई दिल्ली। 'नदी में तलब है कहीं जो अगर, समंदर कहां दूर है...दमक की गरज है सोने में अगर, तो जलना भी मंजूर है...', यूं तो ये महज फिल्म उड़ान का एक गीत है, लेकिन अगर इसके शब्दों के मायने समझे जाएं तो बात बहुत गहरी है। और...इन्हीं शब्दों को हकीकत में तब्दील किया है यूपी के जिला गाजियाबाद की एक बेटी वैभवी सिंह ने। वैभवी, जो दिव्यांग है और एकमात्र इसी वजह से शहर के एक नामी स्कूल ने उसे एडमिशन देने से मना कर दिया। वैभवी ने हार नहीं मानी...अपने सपनों को सामने रखकर दिन रात मेहनत की और आखिरकार वो कर दिखाया, जो शायद एक सामान्य छात्र या छात्रा के लिए बेहद मुश्किल हो। बीते गुरुवार को को घोषित हुए सीबीएसई के 12वीं के नतीजों में वैभवी ने 96 प्रतिशत अंक हासिल कर एक इतिहास रच डाला।

वैभवी ने साबित किया,वो किसी से कम नहीं

वैभवी ने साबित किया,वो किसी से कम नहीं

दिल्ली से सटे यूपी के गाजियाबाद में रहने वाली वैभवी सिंह ने करीब 2 साल पहले शहर के ही एक नामी स्कूल में दाखिले के लिए टेस्ट दिया। टेस्ट का रिजल्ट आया तो वैभवी सिंह एडमिशन की बाकी तैयारियों में जुट गई। वैभवी की आंखों में सपने थे, उम्मीदें थी, लेकिन ये सभी उस वक्त टूट गए जब स्कूल ने उसे एडमिशन देने से मना कर दिया था। वैभवी की मां रनिता सिंह का कहना है कि उनकी बेटी ने टेस्ट पास कर लिया था, लेकिन स्कूल ने उसके दिव्यांग होने की वजह से उसे एडमिशन नहीं दिया और आखिरकार वैभवी को उस स्कूल में एडमिशन नहीं मिला। मां-बाप ने भागदौड़ की, शासन-प्रशासन से गुहार भी लगाई, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। हारकर वैभवी को गाजियाबाद के ही एक दूसरे स्कूल में एडमिशन लेना पड़ा। लेकिन... यहां से वैभवी ने ठान लिया कि अब वो ये साबित करके दिखाएगी की वो किसी भी मामले में किसी से कम नहीं है।

किस सब्जेक्ट में मिले कितने अंक

किस सब्जेक्ट में मिले कितने अंक

सीबीएसई बोर्ड की 12वीं परीक्षा के नतीजे गुरुवार को घोषित हुए तो वैभवी 96 प्रतिशत अंकों के साथ इतिहास रच चुकी थी। मां-बाप के चेहरे खिल गए, रिश्तेदारों और जानकारों के फोन आने लगे। क्योंकि... ये वही बच्ची थी, जिसे दिव्यांग होने के कारण स्कूल में दाखिला नहीं मिला था। वैभवी की मां रनिता सिंह ने वन इंडिया से बात करते हुए बताया कि 2 साल पहले जो कुछ हुआ, उसे लेकर कानूनी लड़ाई आज भी जारी है, और हम इस लड़ाई को लड़ते रहेंगे, लेकिन अब हमें हमारी बेटी ने एक नई ऊर्जा और हिम्मत दी है। वैभवी का सपना अब दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेकर आईएएस सेवा में जाने का है। वैभवी की मार्कशीट के बारे में जानकारी देते हुए उनकी मां रनिता सिंह ने बताया कि उसे इतिहास में 100 में से 100 नंबर, सोशियोलॉजी में 100 में से 99 नंबर, साइकोलॉजी में 100 में से 97 नंबर, पॉलिटिकल साइंस में 100 में से 97 नंबर और अंग्रेजी में 100 में से 86 नंबर मिले हैं।

'कोई मुश्किल आपके कदमों को नहीं रोक सकती'

'कोई मुश्किल आपके कदमों को नहीं रोक सकती'

वैभवी को पढ़ाई-लिखाई का बहुत शौक है। वैभवी की मां रनिता बताती हैं कि अगर उसे कुछ पढ़ने को ना मिले तो वो बोर होने लगती है। इसके अलावा वैभवी को सिंगिंग भी काफी पसंद है। रनिता सिंह ने बताया कि उनकी बेटी ने किसी भी विषय की कोई कोचिंग नहीं ली। वैभवी ने अपने हर विषय को उसके मुताबिक समय दिया। वो बताती हैं कि वैभवी ने इस आधार पर अपनी तैयारी की, कि किस विषय को कितने दिन में खत्म करना है। आज जब वैभवी ने अपनी मेहनत और ना टूटने वाले हौंसले के बल पर एक इतिहास बनाया है तो एक बार फिर ये बात साबित हो गई है कि अगर आपके अंदर कामयाब होने का जज्बा है तो फिर कोई मुश्किल आपके कदमों को नहीं रोक सकती।

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