आखिर उस रात CBI मुख्यालय में क्या हुआ था, जिसके बाद उठ गया सियासी बवंडर

देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) में दो वरिष्ठ अधिकारियों के बीच मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मामले में सरकार की ओर से की गई कार्रवाई के बाद अब इसे लेकर सियासत भी तेज हो गई है।

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) में दो वरिष्ठ अधिकारियों के बीच मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मामले में सरकार की ओर से की गई कार्रवाई के बाद अब इसे लेकर सियासत भी तेज हो गई है। घूसखोरी मामले में सीबीआई के निवर्तमान चीफ आलोक वर्मा को आधी रात में ही छुट्टी पर भेजे जाने को लेकर विपक्ष ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाए हैं। वहीं, इस मामले की जांच कर रहे डीएसपी अजय बस्सी को भी पोर्ट ब्लेयर भेजा दिया गया है। आखिर मंगलवार की उस रात सीबीआई मुख्यालय में क्या हुआ था, जिसके बाद ये सियासी बवंडर खड़ा हो गया। आइए जानते हैं...

CBI परिसर में दाखिल हुई 15-16 अधिकारियों की टीम

CBI परिसर में दाखिल हुई 15-16 अधिकारियों की टीम

किसी भी सामान्य रात की तरह, उस रात भी सीबीआई मुख्यालय सन्नाटे में डूबा हुआ था। मुख्यालय की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ के जवानों की निगेहबानी के अलावा कहीं कोई हलचल नहीं थी। सूत्रों के मुताबिक, अचानक कुछ हलचल हुई और रात 10 बजे के आसपास इनोवा और एर्टिगा गाड़ियों में सवार 15-16 अधिकारियों की एक टीम सीबीआई परिसर में दाखिल हुई। एक सफेद रंग की सेडान कार में एम नागेश्वर राव भी पहुंचे, जिन्हें सीबीआई के अंतरिम निदेशक का कार्यभार सौंपा गया। यह अपने आप में एक इतिहास बन गया, क्योंकि सीबीआई के किसी भी निदेशक को इससे पहले इस तरह से नहीं बदला गया था।

निदेशक बदले जाने की किसी को नहीं थी जानकारी

निदेशक बदले जाने की किसी को नहीं थी जानकारी

सीबीआई के बाकी कर्मचारी एजेंसी में होने वाले इस बड़े बदलाव के बारे में बिल्कुल अनजान थे। ओडिशा कैडर के 1986 बैच के आईपीएस अधिकारी एम नागेश्वर राव सीधे अपने दफ्तर में गए और रात करीब 11:30 बजे सीबीआई निदेशक का कार्यभार संभाल लिया। आलोक वर्मा, जो अभी तक सीबीआई के निदेशक थे, अपने तय रूटीन के मुताबिक शाम करीब 7:30 बजे ही दफ्तर से जा चुके थे। इससे पहले अपने डिप्टी, स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के साथ विवाद के बीच आलोक वर्मा दिन में नॉर्थ ब्लॉक स्थित अपने दफ्तर गए थे। तब तक राकेश अस्थाना और आलोक वर्मा के बीच चल रहा विवाद कोर्ट में जा चुका था।

कोर्ट की कार्यवाही पर लगी थी वर्मा की निगाहें

कोर्ट की कार्यवाही पर लगी थी वर्मा की निगाहें

सूत्रों के मुताबिक, आलोक वर्मा दोपहर तक नॉर्थ ब्लॉक स्थित दफ्तर में रुके और इसके बाद लंच के लिए निकल गए। वर्मा की निगाहें स्थानीय अदालत की कार्यवाही पर लगी हुई थी, जहां सीबीआई अपने ही डिप्टी एसपी देवेंद्र कुमार की कस्टडी पाने के लिए मजबूती के साथ दलील रख रही थी।। डीएसपी देवेंद्र कुमार पर एक बिजनेसमैन के मामले की जांच में उसी बिजनेसमैन से उगाही करने का आरोप था। इसके अलावा वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही की भी जानकारी ले रहे थे, जहां राकेश अस्थाना ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कराने की याचिका दाखिल की थी। एक इसी तरह की याचिका देवेंद्र कुमार ने भी दाखिल की थी।

रात 8:30 बजे भेजी गई सरकार को सिफारिश

रात 8:30 बजे भेजी गई सरकार को सिफारिश

वहीं, शाम के वक्त, सतर्कता भवन में केंद्रीय सतर्कता आयोग एक अहम बैठक कर रहा था, जहां सीबीआई के दो बड़े अधिकारियों आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना की किस्मत का फैसला होना था। दोनों ही अफसरों ने एक दूसरे के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। राकेश अस्थाना के ऊपर सीबीआई ने भ्रष्टाचार के मामले में 15 अक्टूबर को केस दर्ज किया था। केंद्रीय सतर्कता आयोग ने उसके सामने मौजूद दस्तावेजों के आधार पर सर्वसम्मति से आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के सभी अधिकार वापस लेने के फैसले की सिफारिश की। सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार के समक्ष रात करीब 8-8:30 बजे के बीच दोनों के अधिकार वापस लेने की सिफारिश भेजी गई।

और नागेश्वर राव ने संभाल लिया चीफ का चार्ज

और नागेश्वर राव ने संभाल लिया चीफ का चार्ज

केंद्रीय सतर्कता आयोग की सिफारिश के आधार पर कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने अंतरिम उपाय के तौर पर संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को सीबीआई निदेशक का चार्ज सौंप दिया। सीबीआई निदेशक का कार्यभार संभालने संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद नागेश्वर राव ने अधिकारियों को उन सभी महत्वपूर्ण फाइलों का चार्ज लेने के निर्देश दिए, जिनकी मांग सीवीसी ने की थी। राव ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि वो सुनिश्चित करें कि उन फाइलों से किसी तरह की कोई छेड़छाड़ ना हो। आपको बता दें कि आलोक वर्मा ने खुद को छुट्टी पर भेजे जाने की कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

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