NDA सरकार में विपक्ष के 95% नेताओं पर CBI की तलवार, UPA में यह आंकड़ा 60%
नई दिल्ली, 20 सितंबर। विपक्ष के कई नेता सीबीआई जांच के दायरे में हैं। यूपीए सरकार के कार्यकाल में 60 फीसदी विपक्षी नेताओं के खिलाफ सीबीआई जांच चल रही थी, जबकि एनडीए सरकार के कार्यकाल में यह आंकड़ा बढ़कर 95 फीसदी तक पहुंच गया है। यूपीए-1 और यूपीए-2 के 2004 से 2014 के कार्यकाल के बीच 72 नेताओं के खिलाफ सीबीआई की जांच चल रही थी, जिसमे से 43 नेता विपक्ष के थे।

एनडीए सरकार में 124 नेताओं के खिलाफ केस
वहीं एनडीए सरकार की बात करें तो वर्ष 2014 से 2022 के बीच कुल 124 ने5ताओं के खिलाफ सीबीआई जांच चल रही है, जिसमे से 118 नेता विपक्ष के हैं। इसमे से 6 नेता भाजपा के हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार यूपीए कार्यकाल में जब नेता दल-बदल करते थे तो उनके खिलाफ सीबीआई जांच बैठा दी जाती थी, लेकिन अगर वह यूपीए के साथ आते थे तो उनके खिलाफ सीबीआई केस को खत्म कर दिया जाता था।

किसके कितने नेता सीबीआई की जद में
मौजूदा सरकार की बात करें तो एनडीए-2 के कार्यकाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के सर्वाधिक नेता सीबीआई के स्कैनर में हैं। टीएमसी के 30 नेताओं के खिलाफ सीबीआई की जांच चल रही है। इसके बाद कांग्रेस के 26 नेता और लालू यादव की पार्टी राजद के 10 नेता सीबीआई जांच के दायरे में हैं। यूपीए सरकार के कार्यकाल में सर्वाधिक भाजपा नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। इसके बाद बसपा के नेताओं और टीएमसी के नेताओं के खिलाफ सीबीआई का केस चल रहा था।

टीएमसी के नेता सबसे अधिक सीबीआई के निशाने पर
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार शारदा चिट फंड घोटाला, नारदा स्टिंग ऑपरेशन, स्कूल भर्ती घोटाला में सर्वाधिक टीएमसी के नेताओं के खिलाफ सीबीआई का केस चल रहा है। वर्ष 2013 में डीएमके यूपीए गठबंधन से बाहर हो गई थी। एमके स्टालिन के ठिकानों पर सीबीआई का छापा पड़ा था। सीबीआई के पास 33 अवैध कारों की जानकारी पहले से थी, लेकिन जब स्टालिन सरकार से बाहर हुए तो उनके खिलाफ सीबीआई ने छापेमारी की।

तेजस्वी के खिलाफ छापा
बिहार में एनडीए गठबंधन से अलग होने के बाद नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव के सात मिलकर प्रदेश में नई सरकार का गठन किया था। भाजपा से अलग होने के बाद तेजस्वी यादव के ठिकानों पर छापेमारी हुई थी। बता दें कि तेजस्वी यादव बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं। वहीं सीबीआई का कहना है कि हम विपक्षी दलों को निशाना नहीं बनाते हैं, यह महज एक संयोग है कि केस ऐसे समय में सामने आते हैं।












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