कर्नाटक सरकार ने जाति जनगणना रिपोर्ट स्वीकार की, तो कांग्रेस का क्या होगा?

कर्नाटक की 6 महीने पुरानी कांग्रेस सरकार अबकी बार अपने ही बुने जाल में बुरी तरह से फंसती नजर आ रही है। राज्य में राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से प्रभावशाली लिंगायत समुदाय के सबसे बड़े संगठन सर्व वीरशैव महासभा ने सिद्धारमैया सरकार को जाति जनगणना रिपोर्ट के विरोध में एक तरह से अल्टीमेटम दे दिया है।

सर्व वीरशैव महासभा ने जाति जनगणना रिपोर्ट को स्वीकार करने के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के इरादे के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान शुरू करने का फैसला किया है, ताकि सरकार इस रिपोर्ट को स्वीकार करने का मंसूबा छोड़ दे।

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जाति जनगणना रिपोर्ट स्वीकार करने का विरोध
गौरतलब है कि लिंगायतों की इस जाति जनगणना रिपोर्ट के खिलाफ खुलकर सामने आने से पहले एक और प्रभावशाली समुदाय वोक्कालिगा के प्रमुख संगठन वोक्कालिगरा संघ ने भी सीएम को रिपोर्ट नामंजूर करने को लेकर इसी तरह की चेतावनी दे रखी है।

वोक्कालिगा के बाद लिंगायतों का सबसे बड़ा संगठन भी सामने आया
खास बात ये है कि वोक्कालिगरा संघ की ओर से राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को नामंजूर करने की मांग वाले ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में कांग्रेस सरकार के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कृषि मंत्री एन चेलुवारास्वामी के अलावा कांग्रेस विधायक भी शामिल हैं।

वीरशैव लिंगायत कर्नाटक का सबसे बड़ा जातीय समूह है। इसके बाद वोक्कालिगा का स्थान है। इन दोनों को लगता है कि अगर रिपोर्ट सार्वजनिक हो गई तो प्रदेश की राजनीति पर उनका जो एक प्रभाव बना हुआ है, उसपर पानी फिर सकता है। क्योंकि, जानकारी के मुताबिक जनगणना रिपोर्ट में दोनों ही समुदायों की आबादी मौजूदा अनूमानों से कथित तौर पर कम बताई गई है।

सर्व वीरशैव महासभा अध्यक्ष कांग्रेस के ही एमएलए हैं
सर्व वीरशैव महासभा के वयोवृद्ध (92 साल से अधिक)अध्यक्ष शमनूर शिवशंकरप्पा ने कहा है कि जनगणना रिपोर्ट में खामियां ही खामियां हैं और इसका कंटेंट पहले ही लीक हो चुका है। उनका कहना है कि जनगणना इस समुदाय को वीरशैव-लिंगायत के रूप में दर्ज नहीं करती है।

सबसे बड़ी बात ये है कि शिवशंकरप्पा कांग्रेस के एमएलए भी हैं। उनका कहना है कि अगर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग सर्वे करना चाहता है तो इसके सदस्यों को सभी घरों में जाना चाहिए और डेटा जुटाने चाहिए।

2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर हाई कमान को किया आगाह
उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सिद्दारमैया रिपोर्ट को स्वीकार करते हैं तो इससे 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की उम्मीदों को झटका लगेगा। उन्होंने पार्टी हाई कमान को याद दिलाया है कि लिंगायत को अलग धर्म बनाने की तत्कालीन सरकार की कोशिशों से 2018 के चुनावों में पार्टी को किस तरह से खामियाजा भुगतना पड़ा था।

महासभा को इस बात की चिंता है कि कहीं सीएम सिद्दारमैया रिपोर्ट को स्वीकार न कर लें। क्योंकि, उन्होंने कहा है कि अटकलों के आधार पर रिपोर्ट पर बहस करना सही नहीं। इससे यह संकेत निकाला जा रहा है कि मुख्यमंत्री इस रिपोर्ट को स्वीकार करने की सोच रहे हैं।

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इससे पहले आदि चुंचनगिरि मठ के प्रमुख स्वामी निर्मलानंद तो सरकार से यहां तक कह चुके हैं कि मौजूदा जनगणना रिपोर्ट आधी-अधूरी और खामियों से भरी है, इसलिए सरकार सामाजिक-आर्थिक सर्वे फिर से करवाए।

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