Caste Census: बिहार के बाद अब किन राज्यों में है जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी करने की तैयारी? जानिए

बिहार में जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद कई और राज्यों में इस तरह के आंकड़े जुटाने और जारी करने की होड़ सी लगने लगी है। वैसे तो बिहार में इस रिपोर्ट को जारी करने के पीछे अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को मकसद बताया जा रहा है, लेकिन राजस्थान सरकार ने चुनाव तारीखों के एलान से पहले ही जातिगत जनणगना का कार्ड चल दिया है।

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने पांच राज्यों में विधासभा चुनावों की तारीखों की घोषणा की वजह से आनन-फानन में शनिवार को ही जातिगत सर्वे कराने का एलान कर दिया था। इसके लिए जिलास्तर पर जिलाधिकारियों को नोडल अधिकारियों के तौर पर नियुक्त किया गया है। लेकिन, सोमवार को चुनाव तारीखों एलान के बाद यह मामला 3 दिसंबर को नतीजों के बाद नई सरकार के हाथों में चला गया है।

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राजस्थान में चुनाव तारीखों की घोषणा से पहले जातिगत जनगणना का कार्ड
राजस्थान सरकार ने जातिगत सर्वे के आंकड़े जारी करने के लिए कोई टाइम-लाइन भी नहीं बताए हैं। उसका मकसद एक तरह से विधानसभा चुनावों में वही माहौल बनाने का लग रहा है, जो बिहार में 2024 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए किया गया है। क्योंकि, वहां जातिगत सर्वे का असल लक्ष्य सामाजिक-आर्थिक आंकड़े जुटाना बताया गया था,लेकिन सिर्फ जातियों की संख्या बता दी गई है।

बीजेपी शासित राज्यों में भी इस तरह के सर्वे की सुगबुगाहट
ऐसा नहीं है कि सिर्फ गैर-बीजेपी शासित राज्यों में ही जातिगत जनगणना को बड़ा चुनावी हथियार माना जा रहा है। उन राज्यों में भी जहां बीजेपी सत्ता में इस तरह की कवायद की चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। ईटी ने बिहार सरकार के सूत्रों के हवाले से बताया है कि महाराष्ट्र सरकार की ओर से बिहार में हुए जातिगत सर्वे के आंकड़े जुटाने के लिए अपनाए गए तरीकों को समझने के बारे में संपर्क किया गया था।

असम में सिर्फ स्थानीय मुस्लिमों के सर्वे की घोषणा
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में मीडिया के लोगों से कहा था कि उनकी सरकार पहले बिहार में हुए जातिगत सर्वेक्षण का अध्ययन करेगी और फिर कोई फैसला लेगी। पिछले मंगलवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी कहा था कि उनकी सरकार पांच स्थानीय मुस्लिम समुदायों का एक सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण करवाएगी, जिसकी मदद से उनके कल्याण के लिए नीतियां बनाई जा सकें।

कांग्रेस ने असम में भी जातिगत जनगणना की मांग की है
वहीं असम से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने राज्य में भी बिहार और राजस्थान की तर्ज पर जातिगत जनगणना करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि उनकी पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और अल्पसंख्यकों को सम्मान और न्याय सुनिश्चित हो सके।

झारखंड सरकार भी कर रही है विचार
उधर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी कह चुके हैं कि उनकी सरकार जातिगत सर्वे करवाने की सोच रही है, ताकि जो समुदाय विकास की कड़ी से दूर छूट चुके हैं, उन्हें बेहतर भागीदारी का अवसर मिल सके।

ओडिशा सरकार जल्द जारी कर सकती है जातिगत सर्वे वाली रिपोर्ट
ओडिशा सरकार भी इसी साल मई और जुलाई के बीच बिहार की तरह ही जातिगत सर्वे करवा चुकी है। लेकिन, अब नवीन पटनायक की सरकार इसकी रिपोर्ट जारी करने की योजना पर काम कर रही है, जो राज्य पिछड़ा आयोग इसे सौंप चुका है। हालांकि,रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन आयोग के अध्यक्ष ने प्रदेश में ओबीसी की संख्या करीब 39% बताई है।

इसी तरह से एक राज्य कर्नाटक भी है, जहां जातिगत सर्वे का काम पूरा हुए करीब पांच साल हो गए हैं। यह रिपोर्ट कांग्रेस सरकार ने पिछले कार्यकाल में ही तैयार करवाई थी। अभी के राज्य पिछड़ा आयोग के अध्यक्ष के मुताबिक वह नवंबर में नए सिरे से यह रिपोर्ट सिद्दारमैया सरकार को सौंप देंगे। कांग्रेस सरकार पर पार्टी के भीतर से भी यह रिपोर्ट जारी करने का दबाव बना हुआ है और संभवत: पार्टी आलाकमान से हरी झंडी मिलते ही इसके आंकड़े जारी किए जा सकते हैं।

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