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गरीब परिवारों, प्रवासी मजदूरों को तीन महीने तक दिए जाएं सात हजार रुपए: अजीम प्रेमजी

नई दिल्ली। आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनी विप्रो के फाउंडर अजीम प्रेमजी ने कहा कि इस समय देश गरीब परिवारों और प्रवासी मजदूरों को नकद पैसा दिए जाने की जरूरत है। प्रेमजी ने कहा है कि कम से कम तीन महीने तक गरीब परिवारों को सात हजार रुपए महीना दिया जाए, जिससे उनकी जिंदगी चलती रहे। अजीम प्रेमजी ने सड़कों पर पैदल जाने को मजबूर मजदूरों के दर्द को कभी माफ ना की जा सकने वाली त्रासदी कहा है तो वहीं श्रमकानूनों में बदलावों पर भी नाखुशी जाहिर की है।

वित्तमंत्री की घोषणाओं पर अजीम प्रेमजी

वित्तमंत्री की घोषणाओं पर अजीम प्रेमजी

ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार की ओर से घोषित आर्थिक पैकेज में मजदूरों और किसानों को लेकर किए गए फैसलों की जानकारी दी है। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए अजीम प्रेमजी ने कहा, मनरेगा का विस्तार करना और इससे मजदूरों को जोड़ना बहुत प्रभावशाली कदम हो सकता है। इसके साथ-साथ हमें 3 से 6 महीने के लिए सभी लोगों के लिए डबल पीडीएस राशन उनके घरों तक उपलब्ध कराना चाहिए। इसमे तेल, दालें, नमक, मसाला, सेनेटरी पैड और अन्य अवश्य सामग्री भी शामिल की जाए।

मजदूरों को इमरजेंसी कैश रिलीफ की जरूरत

मजदूरों को इमरजेंसी कैश रिलीफ की जरूरत

मजदूरों की हालत पर प्रेमजी ने कहा किइन लोगों का दर्द और इनकी मौतें एक त्रासदी हैं, जिसे शायद माफ ना किया जा सके।प्रवासी मजदूरों को उनकी यात्रा के लिए स्वतंत्रता प्रदान की जानी चाहिए। साथ ही महामारी के रोकथाम के सभी उपायों को सुनिश्चित करना चाहिए। किसी को भी रुकने या अपने गृहराज्य जाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। फंसे हुए श्रमिकों के लिए बसों और ट्रेनों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जानी चाहिए।

प्रेमजी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में मदद के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। प्रत्येक गरीब परिवार और प्रवासी मजदूर को कम से कम तीन महीने तक बिना किसी बायोमेट्रिक प्रमाण के 7,000 रुपए की आपातकालीन नकद राहत हर महीने दी जाए।

श्रम कानून में बदलाव करना ठीक नहीं

श्रम कानून में बदलाव करना ठीक नहीं

कई प्रदेश सरकारों को श्रम कानूनों को खत्म कर या बदलाव कर इसे पूरी तरह से मालिकों के हक में करने और मजदूरों के अधिकारों को खत्म करने पर प्रेमजी ने कहा कि ये हैरान करने वाला है। इस पर उन्होंने कहा, ऐसे कई श्रम कानून जो श्रमिकों की रक्षा करते हैं उसे विभिन्न राज्य सरकारें निलंबित करने पर विचार कर रही हैं। कई सरकार तो पहले ही निलंबित कर चुकी हैं। जिन प्रवासी श्रमिकों को हम अपने लिए और अपने परिवारों के लिए जूझते देखते है, इसके बाद उनके पास कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं होगी।

बता दें कि कोरोना महामारी के दौरान जिन कारोबारियों ने सबसे ज्यादा दान किया है। दुनियाभर में उनमें प्रेमजी तीसरे नंबर पर हैं। फोर्ब्स मैग्जीन के अनुसार, पहले नंबर पर ट्विटर के जैक डॉर्सी और दूसरे नंबर पर माइक्रोसॉफ्ट के बिल गेट्स हैं। तीसरे नंबर पर भारत के अजीम प्रेमजी हैं। अजीम प्रेमजी अभी तक 132 मिलियन डॉलर (लगभग एक हजार करोड़ रुपये) दाने दे चुके हैं।

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