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Cash for Query Case में आया नया मोड़, महुआ मोइत्रा को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत

Cash for Query Case: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा के लिए 19 दिसंबर का दिन बड़ी कानूनी जीत लेकर आया। दिल्ली हाईकोर्ट ने लोकपाल के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसमें सीबीआई (CBI) को उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की मंजूरी दी गई थी। अदालत ने लोकपाल को पूरे मामले पर एक महीने के भीतर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है।

जस्टिस अनिल क्षेतरपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की डिवीजन बेंच ने इस मामले में लोकपाल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां निम्नलिखित हैं:

Mahua Moitra
  • कानूनी व्याख्या में चूक: कोर्ट ने माना कि लोकपाल ने 'लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम' के प्रावधानों को सही ढंग से नहीं समझा।
  • दलीलों की अनदेखी: महुआ मोइत्रा का तर्क था कि लोकपाल ने उनकी लिखित दलीलों को "जल्दबाजी में दी गई" बताकर दरकिनार कर दिया, जो कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है।
  • नया आदेश अनिवार्य: अब लोकपाल को यह तय करना होगा कि क्या वाकई चार्जशीट की जरूरत है या मामले को बंद किया जाना चाहिए।

पक्ष-विपक्ष की दलीलें: एक नजर में

  • महुआ मोइत्रा: लोकपाल ने मौखिक सुनवाई जरूर की, लेकिन उनके लिखित जवाबों पर सही तरीके से विचार किए बिना ही आदेश पारित कर दिया।
  • CBI: कानून के अनुसार सांसद को मौखिक सुनवाई का अधिकार नहीं था, इसके बावजूद उन्हें अतिरिक्त समय और कई अवसर दिए गए।
  • शिकायतकर्ता: कानून के तहत सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की गईं और महुआ मोइत्रा की याचिका निराधार है।
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