स्टडी: लॉकडाउन के दौरान रेड जोन में तेजी से बढ़े महिला हिंसा के मामले
नई दिल्ली: भारत में कोरोना वायरस के कहर को देखते हुए 25 मार्च से लॉकडाउन लागू हो गया था। इसके बाद लोग ढाई महीनों तक घरों में कैद रहे। इस दौरान घरेलू हिंसा में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हुई थी, खासकर रेड जोन में। इस पर कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जो वाकई में चिंताजनक है, हालांकि रिपोर्ट में यौन शोषण और रेप के मामले कम होने की भी बात सामने आई है।

यूएस नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च पेपर के लिए प्रोफेसर श्रवण रवींद्रन और मनीषा शाह ने भारत के राष्ट्रीय महिला आयोग से आंकड़े इकट्ठा किए और उन्हें रेड जोन वाले जिलों में मैप किया। रिपोर्ट के मुताबिक इस साल मई में घरेलू हिंसा की 392 शिकायतें दर्ज की गई हैं, जबकि पिछले साल मई में ये आंकड़ा 266 था। वहीं महिलाओं ने मई 2019 में 49 साइबर क्राइम की शिकायतें की थीं, जबकि इस साल ये आंकड़ा 73 हो गया। वहीं लॉकडाउन की वजह से भारत में रेप और यौन शोषण के मामले घटे हैं। पिछले साल मई में रेप और यौन शोषण के 163 मामले दर्ज हुए थे, जबकि इस साल मई में ये आंकड़ा 54 रहा।
शोधकर्ताओं ने इस मामले में विस्तार से अध्ययन करने पर पाया कि रेड जोन में घरेलू हिंसा के मामलों की औसत संख्या मार्च में 1.5 थी, जो मई में लगभग 2 हो गई। वहीं ग्रीन जोन वाले जिलों में यह संख्या 0.3 के करीब रही। वहीं रेप और यौन उत्पीड़न के मामले भी रेड जोन वाले जिलों में घटे हैं, जहां मार्च में औसत शिकायतों की संख्या 5 थी, जो अप्रैल में 1 और मई में 2 के करीब थी। ग्रीन जोन में ये 0.1 से घटकर 0 हो गए। वहीं मार्च और अप्रैल में Domestic abuse और Domestic violence helpline गूगल पर ज्यादा सर्च किए गए हैं।












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