'कर्नाटक संगीत' के मशहूर गायक बालामुरली कृष्णा का निधन
बालामुरली कृष्णा सिर्फ एक गायक नहीं थे, बल्कि अपने पिता की तरह ही कई इंस्ट्रुमेंट बजाने में निपुण थे। बालामुरली कृष्णा वीणा, वॉयलिन, गंजीरा और मृदंग बजाते थे।
चेन्नई। कर्नाटक के मशहूर 'कर्नाटक संगीत' के गायक मंगलामपुल्ली बालामुरली कृष्णा का मंगलवार को चेन्नई स्थित उनके घर में निधन हो गया है। मृत्यु के समय उनकी उम्र 86 साल थी।

बालामुरली कृष्णा सिर्फ एक गायक नहीं थे, बल्कि अपने पिता की तरह ही कई इंस्ट्रुमेंट बजाने में निपुण थे। बालामुरली कृष्णा वीणा, वॉयलिन, गंजीरा और मृदंग बजाते थे।
वह पूर्वी गोदावरी जिले के संकरागुप्तम के रहने वाले थे। पिछले कुछ समय से उनकी तबियत काफी खराब चल रही थी और खराब तबियत के चलते ही उनकी मौत हो गई है।
8 साल की उम्र में दी थी पहली प्रस्तुति
आपको बता दें कि बालामुरली कृष्णा ने अपनी पहली प्रस्तुति महज 8 साल की उम्र में दी थी। जब वह छोटे थे तब उनका नाम मुरली कृष्णा हुआ करता था, लेकिन बाद में उनका नाम बदल दिया गया।
एक बार उनकी प्रतिभा को उस वक्त के मशहूर संगीतकार सूर्यनारायण मुर्ति भगवातार ने देखा। इसके बाद उन्होंने मुरली कृष्णा के नाम के आगे बाला जोड़ दिया, जिसके बाद उन्हें दुनिया बाला मुरली कृष्णा नाम से जाना जाने लगा।
'मिले सुर मेरा तुम्हारा...'
एम बालमुरलीकृष्ण 'कर्नाटक संगीत' की बहुत ही सम्मानित हस्ती तो थे ही साथ ही वह एक गायक भी थे। उन्होंने भारतीय एकता और अखंडता लेकर बहुत सारे गीत गाए थे। उन्होंने 'मिले सुर मेरा तुम्हारा....' गाने में भी अपनी आवाज दी है, जो राष्ट्रीय भावना को दिखाने वाला एक गीत है।
आपको बता दें कि 'मिले सुर मेरा तुम्हारा....' गाने में एम बालामुरलीकृष्ण के अलावा पंडित भीमसेन जोशी, लता मंगेशकर, कविता कृष्णमूर्ति, सुचित्रा मित्रा ने अपने सुर दिए हैं। लेकिन अब दुनिया उनकी आवाज नहीं सुन सकेगी।












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