बिन बुलाए मेहमान की तरह घूम रहे हैं कनाडा के पीएम, मोदी के वेलकम ना करने से कनाडाई नाराज़!
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रड्यू इस समय भारत दौरे पर हैं।ट्र्ड्यू के भारत दौरे पर आते ही एक नया विवाद पीएम मोदी के साथ जुड़ा गया है। जिस समय पीएम ट्रड्यू का एयरक्राफ्ट दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरा तो उस समय उनके वेलकम के लिए पीएम मोदी की जगह एक जूनियर मिनिस्टर वहां मौजूद थे।
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नई दिल्ली। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रड्यू इस समय भारत दौरे पर हैं। ट्रड्यू शनिवार को भारत आए हैं और उनका दौरा एक हफ्ते का है। रविवार को अपने पूरे परिवार समेत उन्होंने आगरा स्थित ताज महल का दौरा किया। 23 फरवरी को वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। ट्र्ड्यू के भारत दौरे पर आते ही एक नया विवाद पीएम मोदी के साथ जुड़ा गया है। जिस समय पीएम ट्रड्यू का एयरक्राफ्ट दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरा तो उस समय उनके वेलकम के लिए पीएम मोदी की जगह एक जूनियर मिनिस्टर उनके वेलकम के लिए मौजूद थे। यहीं से सारे विवाद की शुरुआत हुई है और कनाडा का मीडिया पूछ रहा है कि आखिर पीएम मोदी ने उनके पीएम का उस तरह से स्वागत क्यों नहीं किया जैसे बाकी नेताओं का किया? वह उनके पीएम ट्रड्यू को रिसीव करने के लिए एयरपोर्ट क्यों नहीं पहुंचे।

किस तरह से हुआ बाकी वर्ल्ड लीडर्स का स्वागत
जिस समय जनवरी 2015 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा आए, पीएम मोदी खुद उन्हें लेने एयरपोर्ट पर गए। पीएम मोदी, ओबामा के प्लेन का इंतजार भी करते हुए नजर आए। इसी तरह से हाल ही में इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू भारत पहुंचे तो उनका स्वागत भी पीएम मोदी ने गर्मजोशी से किया। इसी तरह से यूएई के सुल्तान मोहम्मद बन जायद अल नाहन के लिए भी पीएम मोदी रात में एयरपोर्ट पहुंच गए थे। लेकिन ट्रड्यू का ऐसा स्वागत नहीं हुआ और अब पूरी दुनिया इस मुद्दे पर बहस कर रही है। ब्रिटिश मीडिया की मानें तो कई वर्षों में शायद यह पहला मौका है जब भारत में किसी राष्ट्राध्यक्ष का इतना ठंडा वेलकम हुआ है।

ट्विटर पर उठा मसला
सबसे पहले इस मुद्दे को ट्विटर पर लोगों ने उठाया कि आखिर क्यों पीएम मोदी, ट्रड्यू का इंतजार करते हुए नजर नहीं आए। ट्रड्यू का स्वागत कृषि राज्य मंत्री ने किया था। वहीं कनाडा की मीडिया ने भी अब इस सवाल को उठाया है कि आखिर क्यों इस तरह से पीएम मोदी ने ट्रड्यू को नजरअंदाज किया। विशेषज्ञों की मानें तो ट्रड्यू के इस दौरे का मकसद भारत और कनाडा के संबंधों को ऐसे समय में नए मुकाम पर पहुंचाना है जब भारतीय अधिकारियों की ओर से कनाडा पर सिख अलगाववादियों के साथ नरमी बरतने के आरोप लगते हों। कनाडा पर ये आरोप भी हैं कि वह इन अलगाववादियों के पंजाब को एक अलग देश घोषित करने की मांग को भी समर्थन दे रहा है।

कैप्टन अमरिंदर सिंह से नहीं मिलेंगे ट्रड्यू
कनाडा के पीएम ने पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह से मिलने से इनकार कर दिया है। कैप्टन अमरिंदर ने सार्वजनिक तौर पर ट्रड्यू पर आरोप लगाया है कि उनके कैबिनेट में कुछ ऐसे लोग हैं जो खालिस्तान के आतंकियों का समर्थन करते हैं और जिनके तार उन आतंकियों से जुड़े हैं। ट्रड्यू की कैबिनेट कनाडा की पहली ऐसी कैबिनेट है जिसमें सबसे ज्यादा सिख मंत्री हैं। न सिर्फ पीएम मोदी बल्कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की ओर से भी आगरा पहुंचने पर ट्रड्यू का कोई स्वागत नहीं किया गया। कनाडा में 1.4 मिलियन भारतीय रहते हैं लेकिन इसके बाद भी ट्रड्यू पहली बार भारत के दौरे पर आए हैं।

खालिस्तानी आतंकियों का बहिष्कार करें ट्रड्यू
कनाडा की जर्नलिस्ट कैन्डीस मैल्कम ने ट्वीट किया है और कहा है कि पूरी दुनिया इस बात को नोटिस कर रही है कि पीएम मोदी ने किस तरह से कनैडियन पीएम को नजरअंदाज किया है। अब समय आ गया है जब ट्रड्यू को खालिस्तानी आतंकियों का बहिष्कार करना होगा और कैप्टन अमरिंदर सिंह से माफी मांगनी होगी। कार्लटन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर और मुंबई स्थित थिंक टैंक आईडीएफसी में फेलो विवेक दहेजा का कहना है कि इस बात में कोई दो राय नहीं है कि खालिस्तान का सवाल ट्रड्यू के इस भारत दौरे को कमजोर बना देगा। दहेजा मानते हैं कि भारत में आज भी यह महसूस किया जाता है कि कनाडा में सिख आतंकवाद को बढ़ावा दिया गया है और कनाडा की सरकार ने इसे हमेशा अपना समर्थन दिया है। उनका कहना है कि कुछ लोग तो इस बात पर यकीन करने लगे हैं कि सिख-कनैडियन राजनेता खालिस्तानी आतंकियों के लिए मददगार साबित हो रहे हैं ताकि उन्हें एक खास समुदाय का वोट हासिल हो सके।












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