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क्या राज्य सरकारें सीबीआई को अपने प्रदेश में बैन कर सकती हैं?

By Bbc Hindi

पहले तो आंध्र प्रदेश की चंद्रबाबू नायडू सरकार ने सीबीआई के लिए अपने दरवाज़े बंद कर दिये और उनके बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सीबीआई को अपने राज्य में ऑपरेट करने की इजाज़त यानी कंसेंट वापस ले लिया है.

सीबीआई की स्थापना 1946 में दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टेब्लिशमेंट एक्ट- 1946 के ज़रिए हुई थी.

इसके दायरे में दिल्ली और बाक़ी केंद्र शासित प्रदेश आते हैं लेकिन इस क़ानून के सेक्शन 6 के मुताबिक़, दूसरे किसी राज्य में कार्रवाई करने के लिए राज्य की लिखित इजाज़त लेना ज़रूरी होता है.

आंध्र प्रदेश ने पहले एक आदेश पारित करके सीबीआई को 'जनरल' इजाज़त दी हुई थी और पश्चिम बंगाल ने भी 1989 में ऐसी इजाज़त दी थी.

चंद्रबाबू नायडू
Getty Images
चंद्रबाबू नायडू

अब सीबीआई किसी राज्य में घुस नहीं पाएगी?

वरिष्ठ वकील गौतम अवस्थी बताते हैं कि लॉ एंड ऑर्डर राज्य के अंतर्गत आता है लेकिन सीबीआई अपने दिशानिर्देशों के हिसाब से केंद्र सरकार के विभागों या मंत्रालयों से संबंधित अपराधों के मामलों में दख़ल दे सकती है. जैसे कि 10 करोड़ से ऊपर के भ्रष्टाचार के मामले सीबीआई को ही जाते हैं.

दूसरा, अगर राज्य ख़ुद किसी मामले में सीबीआई जांच की दरख़्वास्त दे तो सीबीआई जांच हो सकती है.

तीसरा, अगर किसी मामले में हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया हो तो तब राज्य की इजाज़त का मसला नहीं होता.

गौतम अवस्थी कहते हैं, "राज्यों के सीबीआई को बैन करने के फ़ैसले के बाद भी जो मामले सीबीआई के दायरे में आते हैं, वहां बेशक सीबीआई अपना काम करती रहेगी. अगर केंद्र सरकार के किसी दफ्तर में कहीं भी, किसी भी राज्य में कोई अपराध हो रहा है तो केंद्र सरकार सीबीआई को अपनी शिकायत दे सकती है और सीबीआई को जांच करनी होगी. उसमें राज्य की इजाज़त की ज़रूरत नहीं होगी."

गौतम अवस्थी पश्चिम बंगाल के शारदा चिट स्कैम का उदाहरण देते हुए समझाते हैं, "सबसे पहले इस स्कैम की शिकायत राज्य पुलिस में दर्ज हुई. किसी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी कि बहुत से राजनेता इस मामले में शामिल हैं तो राज्य पुलिस से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती, इसलिए सीबीआई जांच का आदेश दिया जाए."

"तो याचिका को दाखिल किया गया, उसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा और कोर्ट ने माना कि इस मामले में उड़ीसा और बाक़ी राज्य भी शामिल हैं तो सीबीआई जांच की जा सकती है. लेकिन अगर कोर्ट ना कहता और सिर्फ़ केंद्र सरकार अपने स्तर पर जांच का आदेश देती तो राज्य मना कर सकते थे."

क्या सीबीआई काम नहीं कर रही?

सीबीआई के पूर्व जॉइंट डारेक्टर एन.के. सिंह मानते हैं कि इस फ़ैसले का असर सीबीआई पर पड़ेगा ही.

"सीबीआई केंद्र सरकार के अफ़सरों पर तो कार्रवाई कर सकती है, उस पर कोई रोक नहीं है. लेकिन किसी राज्य में सर्च करना है, छापा मारना है तो उस वक्त राज्य की इजाज़त की ज़रूरत पड़ेगी. मान लीजिए राज्य ने पहले कंसेट दे दिया था लेकिन बाद में जिस भी दिन कंसेट वापस ले लिया तो सीबीआई उस दिन से राज्य में ऑपरेट नहीं कर पाएगी."

"पुरानी बात है, जब मैं सीबीआई में था तो नगालैंड के मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा था. उस वक्त नगालैंड ने कंसेंट वापस ले लिया था. कर्नाटक ने वापस ले लिया था. वैसे भी आज के वक़्त में सीबीआई इतनी कमज़ोर हो गई है, आम लोग भी जानते हैं कि सीबीआई काम कर ही नहीं रही. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि सीबीआई के अंतरिम निदेशक कोई फ़ैसले नहीं लेंगे. फिर राज्य क्यों उन्हें इजाज़त देंगे? सीबीआई में कौन फ़ैसले लेगा?"

संविधान विशेषज्ञ पीडीटी आचार्य कहते हैं कि केंद्र-राज्य संबंध सिर्फ़ सीबीआई पर निर्भर नहीं करते हैं.

वह कहते हैं, "केंद्र और राज्य के अधिकार स्पष्ट हैं. केंद्र चाहे तो संसद में सीबीआई को लेकर पुराने क़ानून में संशोधन कर सकता है लेकिन फ़िलहाल जो क़ानून है, वह कहता है कि सीबीआई को किसी भी राज्य में ऑपरेट करने के लिए उस राज्य की सरकार की इजाज़त लेनी पड़ती है. मौजूदा क़ानून में ये साफ़ है. बाकी राज्य भी ये कदम उठा सकते हैं."

वहीं गौतम अवस्थी मानते हैं कि सीबीआई को अब राज्य भी राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.

उनका कहना है, "ये मुद्दा क़ानून और व्यवस्था का उतना नहीं है जितना कि केंद्र-राज्य संबंध का है. किसी अपराध में जांच होनी चाहिए और सज़ा मिलनी चाहिए, इस पर तो कोई दो राय नहीं हो सकती. लेकिन ऐसे वक़्त में, जब सीबीआई की अंदरूनी लड़ाई बाहर आ रही है और लोगों का उसपर विश्वास काम हो रहा है, तब राज्य इसे राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करेंगे. वे इसे राजनीतिक स्टैंड लेने के लिए इस्तेमाल करेंगे कि हमारा सीबीआई में भरोसा ही नहीं है."

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English summary
Can the state governments ban the CBI in their state
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