साइना नेहवाल की एंट्री से क्या भाजपा को दिल्ली चुनाव में कोई फायदा मिल सकता है?
नई दिल्ली- भारतीय जनता पार्टी हर चुनाव की तरह दिल्ली चुनाव भी राष्ट्रवाद के मुद्दे पर लड़ने का दावा करती है। पार्टी ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल को भाजपा में शामिल किया है और वो भी अपने ट्विटर प्रोफाइल में खुद को पहले प्राउड इंडियन लिखती हैं और उसके बाद ओलंपिक एथलीट होने की जिक्र करती हैं। मतलब, साइन बीजेपी से तभी जुड़ी हैं, जब वह उसकी विचारधारा को पसंद करती हैं, इसलिए वह अपनी बहन चंद्रांशु (वॉलीबॉल खिलाड़ी) को लेकर भी भारतीय जनता पार्टी में आई हैं। जहां तक साइना की शख्सियत का सवाल है तो वह कोई परिचय की मोहताज नहीं हैं और उन्होंने खेल की दुनिया में देश का जो सिर ऊंचा किया है, उसपर हर भारतीय को फक्र है। लेकिन, अब वह सिर्फ बैडमिंटन खिलाड़ी नहीं रहीं। वह एक राजनीतिक पार्टी की सदस्य भी बन चुकी हैं। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि भाजपा ने जिस सोच के साथ दिल्ली चुनाव के दौरान उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई है, उससे केंद्र के सत्ताधारी दल को कितना फायदा मिल सकता है।

शानदार फैन फॉलोइंग वाली शख्सियत
दिल्ली चुनाव के करीब 10 दिन पहले साइना को बीजेपी में शामिल करने का एक मकसद ये हो सकता है कि सोशल मीडिया पर उनकी फैन फॉलोइंग बहुत ही शानदार है। खासकर दिल्ली के वोटर जिस तरह से जागरूक हैं, उनके बीच साइना की ये पहचान बहुत ही मायने रखती है। खेल की दुनिया में अंतरराष्ट्रयीय शख्सियत की सोशल मीडिया पर लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ट्विटर पर उनके फॉलोअर्स की संख्या 85 लाख, फेसबुक पर 76 लाख 36 हजार से ज्यादा और इंस्टाग्राम पर 14 लाख से ज्यादा हैं। अगर बात पहले के चुनावों में बड़े स्पोर्ट्समैन को भाजपा में शामिल करने के परिणामों की बात करें तो इसका नतीजा मिला-जुला देखने को मिलता है। मसलन, लोकसभा चुनाव से पहले क्रिकेटर गौतम गंभीर को पार्टी ने टिकट दिया तो वे पूर्वी दिल्ली से भारी वोटों से जीत गए, लेकिन हरियाणा चुनाव में रेसलर बबिता फोगाट अपनी सीट भी नहीं बचा पाईं। यही हाल रेसलर सुशील कुमार का भी हुआ। लेकिन, उसी चुनाव में हॉकी टीम के पूर्व कप्तान संदीप सिंह जीतने में कामयाब रहे और उन्हें हरियाणा में मंत्री भी बनाया गया।

देश की गौरवशाली महिला एचीवर
मौजूदा चुनाव में दिल्ली में महिला वोटरों की तादाद बढ़कर 66.35 लाख हो चुकी है। ऐसे में साइना नेहवाल की पार्टी में एंट्री का एक मकसद महिलाओं को भी रिझाना है और उनकी कामयाबी की बदौलत हर उम्र और वर्ग के वोटरों को भी पार्टी के पक्ष में खींचकर लाना है। अगर साइना के करियर की बात करें तो वह ओलंपिक में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी तो हैं ही, देश में बैडमिंटन की पोस्टर गर्ल भी रह चुकी हैं। उनके नाम लंदन ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल समेत कुल 24 इंटरनेशनल टाइटल हैं, जिसमें से 22 सुपर सीरीज और ग्रैंड प्रिक्स खिताब शामिल हैं। साइना के पक्ष में एक बात ये जाती है कि करियर में कुल 438 जीत दर्ज करने वाली यह महिला खिलाड़ी अभी भी अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं, जिनका गोल अगले ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड जीतकर लाना है। अपनी इन्हीं सफलताओं की वजह से वह इतनी कम उम्र में ही राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार (2010), अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री पुरस्कारों से नवाजी जा चुकी हैं। जाहिर है कि दिल्ली के महिला, युवा और जागरूक वोटरों के लिए उनकी ये पहचान बहुत अहमियत रखती है।

युवा मतदाताओं पर भाजपा की नजर
साइना नेहवाल ने 30 साल से भी कम उम्र में भी खेल की दुनिया में जो मुकाम हासिल किया है, वह भारतीय युवाओं के लिए बहुत ही प्रेरणादायक है। भाजपा को उम्मीद है कि पिछले पांच वर्षों में दिल्ली में जो 13 लाख नए वोटर जुड़े हैं, उनमें से ज्यादातर युवा हैं और उनपर साइना का बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है। इन युवा वोटरों की उम्र 18 से 23 साल के बीच है, जिनमें से 1.11 लाख नए वोटर तो 19 साल से भी कम हैं और पिछले एक साल के भीतर ही मतदाता बने हैं। इनके अलावा दिल्ली के कुल 1.46 लाख वोटरों में 23 साल से ज्यादा के युवा वोटरों की तादाद भी कई लाखों में है, जिनके लिए साइना नेहवाल हमेशा रोल मॉडल रही हैं।

हरियाणा के वोटरों पर बीजेपी की खास नजर
साइना नेहवाल भले ही हैदराबाद में रहकर करियर में इतना ऊंचा मुकाम बनाया है, लेकिन वह हरियाणा की धरती पर पैदा हुई हैं। दिल्ली के चुनाव में हरियाणावी वोटरों का रोल बहुत ही अहम है। पश्चिमी और दक्षिणी दिल्ली का बड़ा इलाका सीधे हरियाणा के बॉर्डर से लगा है और जाहिर है उसका प्रभाव यहां के चुनाव में भी पड़ता आया है। हरियाणा में पिछले अक्टूबर में ही बीजेपी ने तमाम मुश्किलों के बाद दोबारा सरकार बनाई है और पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी ने वहां की 10 में से 10 सीटें जीत ली थी। इसलिए, दिल्ली के चुनाव में हरियाणवी वोटरों पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, यह मानना बेमानी होगा। जाहिर है कि साइना भले ही अब हरियाणा में नहीं रहतीं, लेकिन हरियाणा से उनका और हरियाणा के लोगों को उनसे सरोकार बना हुआ है, जो बहुत ही गहरा है।

पार्टी के लिए पूरी दिल्ली में प्रचार करेंगी साइना
जाहिर है कि ऊपर के चारों फैक्टर्स को ध्यान में रखकर ही पार्टी ने उन्हें दिल्ली चुनाव से पहले पार्टी में शामिल कराया है। पार्टी ने ये भी घोषणा की है कि साइना राजधानी के हर चुनाव क्षेत्र में पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में वोट मांगेंगी। पार्टी की औपचारिक सदस्यता लेने से पहले भी साइना का झुकाव भाजपा की ओर रहा है। लेकिन, अब वह खुलकर बीजेपी के विचारों को वोटरों तक ले जा सकती हैं। अब इसका वोटरों पर किस हद तक असर पड़ेगा यह कहना तो बहुत मुश्किल है, लेकिन साइना की शख्सियत को देखकर लगता है कि हाई प्रोफाइल प्रचार की माहिर खिलाड़ी बीजेपी ने एक युवा महिला खिलाड़ी पर चुनावी दांव लगाकर मास्टरस्ट्रोक लगाने की कोशिश जरूर की है।












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