अयोध्या के मुस्लिमों ने राम मंदिर ट्रस्ट से पूछा, 'क्या कब्रिस्तान पर बनेगा राम मंदिर'
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील ने अयोध्या के नौ मुस्लिमों की ओर से राम मंदिर ट्रस्ट को एक पत्र लिखा है। इसमें पूछा गया है कि क्या राम मंदिर मुसलमानों की कब्र पर बनाया जाना चाहिए। पत्र में दावा किया गया है कि बाबरी मस्जिद के आसपास 4-5 एकड़ जमीन पर एक समय में कब्रिस्तान हुआ करता था।

'मुसलमानों की कब्र पर बन सकता है मंदिर?'
वकील एमआर शमशाद ने राम मंदिर जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सभी 10 ट्रस्टों को संबोधित करते हुए पत्र में लिखा है, 'आपको एक बार विचार करने की जरूरत है कि क्या 'सनातन धर्म' के धार्मिक शास्त्रों के अनुसार भगवान राम का मंदिर मुसलमानों की कब्र पर बन सकता है? ये फैसला ट्रस्ट के प्रबंधन को लेना है।'

'जमीन का इस्तेमाल कब्रिस्तान के रूप में हुआ'
इस पत्र में कई तर्क देते हुए शमशाद ने तीसरे नंबर के बिंदु का उल्लेख करते हुए कहा, 'तथ्यों के मुताबिक 1855 के दंगों में मारे गए 75 मुसलमानों कों मस्जिद के आसपास मौजूद कब्रिस्तान में दफनाया गया था। जिसके बाद इस जमीन का इस्तेमाल कब्रिस्तान के तौर पर होने लगा।' मुसलमानों ने अपने दावे में कब्रिस्तान का मुद्दा भी शामिल किया है। हालांकि इस्माइल फारुकी मामले में सुप्रीम कोर्ट के 1994 के फैसले के बाद, मस्जिद और राम मंदिर के बीच विवाद 1480 वर्ग गज तक ही सीमित रह गया। जो आखिरकार नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से सुलझा लिया गया है।

'ये 'धर्म' का उल्लंघन करना है'
पत्र में लिखा है, 'भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण के लिए मुस्लिमों के कब्रिस्तान का उपयोग नहीं करने के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने विचार नहीं किया है। ये 'धर्म' का उल्लंघन करना है। भगवान राम के लिए विनम्रता और सम्मान के साथ मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इस चार से पांच एकड़ की भूमि का इस्तेमाल ना किया जाए, क्योंकि यहां ध्वस्त मस्जिद के आसपास मुसलमानों की कब्र हैं।'

जिला प्रशासन ने क्या कहा?
हालांकि अयोध्या के जिला प्रशासन ने मंगलवार को कहा कि 67 एकड़ की जिस भूमि पर राम मंदिर का निर्माण किया जाना है, वहां कोई कब्रिस्तान नहीं है। पत्र के जवाब में प्रशासन ने कहा कि इसका इस्तेमाल पहले कब्रिस्तान के तौर पर किया जाता था। जिला मजिस्ट्रेट अनुज झा ने कहा, 'वर्तमान में 67 एकड़ भूमि के अंतर्गत कोई कब्रिस्तान नहीं है।'

सभी तथ्यों से कोर्ट को अवगत कराया गया
मजिस्ट्रेट ने आगे कहा, 'सर्वोच्च न्यायालय को मामले की सुनवाई (राम जन्मभूमि विवाद) के दौरान सभी तथ्यों से अवगत कराया गया था, जिसमें पत्र (एमआर शमशाद ने जो पत्र में लिखा है) में लिखी बातें भी शामिल हैं। ये मामला सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सामने आ चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर, 2019 को सुनाए अपने फैसले में इन सभी तथ्यों का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है।'
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