अगर नेता झूठ बोले तो क्या चुनाव आयोग कर सकता है कार्रवाई? मुख्य चुनाव आयुक्त का जवाब हैरान कर देगा
Election Commission: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया शुरू होने के बाद चुनाव आयोग (ECI) ने नेशनल मीडिया सेंटर में पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस प्रेस ब्रीफिंग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, दो अन्य चुनाव आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। प्रेस कॉन्फ्रेंस का माहौल गंभीर था, क्योंकि आयोग ने मतदाता सूची, वोट चोरी और राजनीतिक आरोपों पर स्पष्टता देने का प्रयास किया।
CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। उन्होंने बताया कि बिहार में 1.6 लाख बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) ने मतदाता सूची का ड्राफ्ट तैयार किया और सभी राजनीतिक दलों के एजेंट्स ने इसे हस्ताक्षर कर सत्यापित किया। इस दौरान 28,370 दावे और आपत्तियां भी दर्ज की गईं।

मतदाताओं की गोपनीयता पर चिंता
मुख्य चुनाव आयुक्त ने चेताया कि हाल ही में कुछ मतदाताओं की तस्वीरें उनकी अनुमति के बिना मीडिया में दिखाई गईं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आयोग किसी मतदाता, उसकी मां या बेटी का सीसीटीवी वीडियो साझा कर सकता है। CEC ने दोहराया कि केवल वही लोग मतदान करते हैं जिनके नाम सूची में दर्ज होते हैं।
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डबल वोटिंग और झूठे आरोप
CEC ने कहा कि कुछ लोगों ने डबल वोटिंग का आरोप लगाया, लेकिन जब सबूत मांगे गए तो कोई जवाब नहीं मिला। आयोग और मतदाता ऐसे बेबुनियाद आरोपों से नहीं डरते। उन्होंने बताया कि लोकसभा चुनाव में 1 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी, 10 लाख से अधिक BLA और 20 लाख से ज्यादा पोलिंग एजेंट काम करते हैं।
इतने बड़े और पारदर्शी सिस्टम में "वोट चोरी" जैसी बात संभव ही नहीं है। आयोग ने विपक्षी नेताओं से कहा कि अगर "वोट चोरी" के आरोप सही हैं तो शपथपत्र के साथ सबूत पेश करें। बिना प्रमाण के इस तरह के बयान लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाते हैं।
राहुल गांधी से मांगा जवाब
चुनाव आयोग ने 'वोट चोरी' के आरोपों पर कहा कि इस मामले में राजनीतिक दल को अपने आरोपों की शिकायत 7 दिन के अंदर एफिडेविट के साथ चुनाव आयोग को देनी होगी। उन्होंने ये भी कहा कि अगर वो ऐसा नहीं कर पाते हैं तो उन्हें देश की जनता से माफी मांगनी होगी। उन्होंने कहा शिकायत के आभाव में ये सारे आरोप निराधार माने जाएंगे।
विदेशी नागरिक चुनाव नहीं लड़ सकते
CEC ने स्पष्ट किया कि केवल भारतीय नागरिक ही सांसद या विधायक का चुनाव लड़ सकते हैं। अगर किसी विदेशी ने नामांकन भरा है, तो SIR प्रक्रिया में उसे दस्तावेजों के जरिए अपनी नागरिकता साबित करनी होगी, वरना उसका नाम हटा दिया जाएगा।
45 दिन की कानूनी प्रक्रिया
CEC ने कहा कि नतीजे घोषित होने के बाद 45 दिन तक सुप्रीम कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की जा सकती है। यदि इस अवधि में कोई अनियमितता सामने नहीं आती और बाद में आरोप लगाए जाते हैं, तो लोग खुद समझ जाते हैं कि इन आरोपों के पीछे असली मकसद क्या है।
मशीन रीडेबल वोटर लिस्ट पर सुप्रीम कोर्ट का हवाला
CEC ने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही 2019 में कह चुका है कि मशीन से पढ़ी जाने वाली वोटर लिस्ट मतदाता की निजता का उल्लंघन हो सकती है।
क्या चुनाव आयोग राजनेता पर कार्रवाई कर सकता है?
चुनाव आयोग (ECI) के पास चुनाव आचार संहिता (Model Code of Conduct - MCC) लागू होने के दौरान नेताओं की गलत या भ्रामक बयानबाज़ी पर कार्रवाई करने की शक्ति होती है। आयोग ऐसे मामलों में -
- नोटिस जारी कर सकता है और नेता से जवाब मांग सकता है।
- चेतावनी दे सकता है या चुनाव प्रचार से कुछ समय के लिए रोक सकता है।
- गंभीर मामलों में FIR दर्ज कराने की सिफारिश कर सकता है।
लेकिन अगर कोई नेता संसद/विधानसभा के बाहर राजनीतिक भाषणों में झूठ बोलता है और वह सीधे चुनाव नियमों का उल्लंघन नहीं करता, तो चुनाव आयोग की शक्ति सीमित होती है। उस स्थिति में मामला अदालत या संबंधित कानून (जैसे मानहानि, IPC की धाराएं आदि) के तहत आता है।
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