अदालतों में हिंसा रोकने के लिए CISF की होगी तैनाती? SC ने केंद्र सरकार से ये कहा
नई दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कुछ अदालतों में सीआईएसएफ की तैनाती की संभावनाएं तलाशने को कहा है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने हाल के दिनों में कुछ अदालत में हिंसा की घटनाओं के मद्देनजर केंद्र से ये बात कही है। सबसे बड़ी बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अदालत से ही केंद्र सरकार को सीआईएसएफ का इसके लिए एक अलग कैडर बनाने की संभावना देखने के लिए कहा है। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणी हाल में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में हुई हिंसक झड़कों को देखते हुए की गई है।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुवाई वाली एक बेंच ने कहा है,"अगर सीआईएसएफ की वहां तैनाती होतीं तो दिल्ली की घटना नहीं हुई होती।" माना जा रहा है कि शायद चीफ जस्टिस दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में वकीलों और दिल्ली पुलिस के बीच पिछले नवंबर महीने में हुई हिंसक झड़पों का जिक्र कर रहे थे, जिसको लेकर बहुत ज्यादा बवाल हुआ था।
चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच में जस्टिस बीआर गवई और सूर्य कांत भी शामिल थे। दोनों जजों ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा है कि सीआईएसएफ का एक अलग कैडर होना चाहिए, जो चीफ जस्टिस के फैसले के तहत कुछ चुनिंदा अदालतों को सुरक्षा मुहैया करा सकते हैं।
अदालत के ऐसा कहने पर इस मामले में एमिकस के तौर पर पेश हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लुथरा ने कहा कि हो सकता है कि वकीलों की कुछ समस्याएं हों और उचित ये होगा कि इस मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया का पक्ष भी सुन लिया जाए। इस पर बेंच ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब मांगा है।












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