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कैबिनेट में फेरबदल की चर्चा तेज, जानें पीएम मोदी के मंत्रिपरिषद को लेकर क्या चल रही हैं अटकलें ?

Cabinet reshuffle 2023: बजट सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अपनी कैबिनेट में बदलाव की चर्चा जोरों पर है। इसका कारण इस साल होने वाले विधानसभा और अगला लोकसभा चुनाव है।

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Cabinet reshuffle 2023: मकर संक्रांति के बाद और संसद के बजट सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मंत्रिपरिषद में फेरबदल कर सकते हैं। बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले इस तरह की चर्चा जोरों से चल रही है। वजह ये है कि पीएम मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में सिर्फ एक बार फेरबदल किया है, जबकि कई सारे मंत्रियों के पद खाली हो चुके हैं। इस साल करीब 10 राज्यों में विधानसभा चुनाव भी होने हैं और करीब 15 महीने बाद लोकसभा चुनाव भी तय है। ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी अपनी राजनीतिक जरूरतों के अनुसार सत्ता और संगठन में बदलाव करने की सोच रही है।

जनवरी में पीएम मोदी कैबिनेट में फेरबदल की चर्चा तेज

जनवरी में पीएम मोदी कैबिनेट में फेरबदल की चर्चा तेज

बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की तैयारियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रिपरिषद के विस्तार और फेरबदल की चर्चा भी तेज हो गई है। पार्टी की यह बैठक आने वाले विधानसभा चुनावों और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के मद्देनजर महत्वपूर्ण है। अगले महीने मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट भी पेश करने जा रही है। ऐसे में इसी महीने मंत्रिमंडल में फेरबदल की भी संभावना बढ़ गई है। यह फेरबदल मंत्रियों की परफॉर्मेंस और चुनावों के मद्देनजर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की संगठन की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जा सकता है।

संसद के बजट सत्र से पहले कैबिनेट फेरबदल की संभावना-सूत्र

संसद के बजट सत्र से पहले कैबिनेट फेरबदल की संभावना-सूत्र

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में सिर्फ एक बार जुलाई, 2021 को ही मंत्रिपरिषद में फेरबदल किया था। जबकि, अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने तीन बार कैबिनेट विस्तार और फेरबदल किया था। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक हालांकि, इसके बारे में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन सूत्रों के अनुसार मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल 31 जनवरी से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र से पहले हो सकता है। बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 16 और 17 जनवरी को आयोजित की गई है।

आने वाले चुनावों की चिंता ?

आने वाले चुनावों की चिंता ?

ऐसा माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव गुजरात विधानसभा चुनाव में पार्टी की ऐतिहासिक जीत और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव और दिल्ली की एमसीडी चुनावों से मिली सबक से प्रभावित हो सकता है। साथ ही साथ चुनावी राज्यों मसलन, कर्नाटक, राजस्थान,मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनावों को देखते हुए भी इस बदलाव पर असर पड़ सकता है। यह भी कहा जा रहा है कि अगला आम चुनाव अब से सिर्फ 15 महीने बाद होना है, लिहाजा इसमें बड़े पैमाने पर फेरबद किया जा सकता है, क्योंकि यह नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का संभवत: आखिरी बदलाव होने की संभावना है। इस फेरबदल में बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और यहां तक कि महाराष्ट्र में बदले हुए राजनीतिक समीकरण का भी असर देखा जा सकता है।

सरकार और संगठन में भी फेरबदल की चर्चा

सरकार और संगठन में भी फेरबदल की चर्चा

ऐसी चर्चा काफी दिनों से चल रही है कि कुछ बड़े मंत्रियों को संगठन की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है और चुनावों को ध्यान में रखकर संगठन से कुछ नेताओं को सरकार में लाया जा सकता है। पीएम मोदी ने जब भी मंत्रिपरिषद में बदलाव किया है, उसमे कई चौंकाने वाले चेहरे देखे जाते हैं। इसी तरह से कुछ चौंकाने वाले नामों को बाहर भी बिठाया जाता रहा है। जैसे पिछली बार प्रकाश जावड़ेकर और रविशंकर प्रसाद जैसे भारी-भरकम मंत्रियों की सरकार से छुट्टी कर दी गई थी और पूर्व आईएएस अश्विनी वैष्णव जैसे नामों को जगह दी गई थी और उन्हें रेलवे और सूचना प्रॉद्योगिकी जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी दे दी गई।

बदले राजनीतिक समीकरणों का भी ख्याल

बदले राजनीतिक समीकरणों का भी ख्याल

मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल की एक बड़ी संभावना इसलिए भी है, क्योंकि कई सारे मंत्री सरकार से निकले हैं, लेकिन उनकी जगह किसी को मिल नहीं पाई है। जैसे कि मुख्तार अब्बास नकवी का राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो गया था। जनता दल (यूनाइटेड) और शिवसेना भी अब विपक्ष का हिस्सा बन चुकी हैं। माना जा रहा है कि अब शिवसेना कोटे से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट के नेताओं को प्रतिनिधित्व मिल सकता है। वहीं ऐसा भी कहा जा रहा है कि इस बार बिहार से चिराग पासवान को भी मंत्री बनने का मौका मिल सकता है। बिहार के दलित नेता रामविलास पास की राजनीतिक विरासत उन्हीं के पास है। फिलहाल उनके चाचा पशुपति कुमार पास एलजेपी का अलग गुट बनाकर मंत्री बने हुए हैं। उनके साथ 5 सांसद हैं।


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