मोदी मंत्रिपरिषद में बंगाल से ये सारे सांसद हो सकते हैं शामिल

नई दिल्ली- नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के मंत्रिपरिषद (union council of ministers 2019) में इसबार ज्यादा बंगाली सांसदों को जगह मिलने की उम्मीद है। क्योंकि, 2019 में बीजेपी (BJP) को वहां बहुत ज्यादा फायदा मिला है। इसलिए, 2021 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए मंत्रियों की लिस्ट में पश्चिम बंगाल (West Bengal) से कुछ ज्यादा सांसदों के शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं।

बाबुल सुप्रियो को गया है फोन

बाबुल सुप्रियो को गया है फोन

2014 में मोदी मंत्रिपरिषद (union council of ministers 2019) में पश्चिम बंगाल के दो सांसद मंत्री बनाए गए थे। एस एस अहलुवालिया (SS Ahluwalia) और बाबुल सुप्रियो (Babul Supriyo)। इनमें से दोनों इसबार भी पश्चिम बंगाल से जीतकर संसद पहुंचे हैं। अलबत्ता अहलुवालिया की सीट इसबार बदल गई है और वे बर्धमान दुर्गापुर से जीतकर आए हैं, जबकि बाबुल सुप्रियो इसबार भी अपनी आसनसोल सीट से ही विजय रहे हैं। इनमें से बाबुल सुप्रियो के पास नए मंत्रिपरिषद (union council of ministers 2019) में शामिल होने का फोन पहुंचने की भी खबर हैं। अहलुवालिया बीजेपी के कद्दावर नेता हैं, इसलिए उन्हें मंत्री (narendra modi's ministers) बनाए जाने की पूरी संभावना है।

पश्चिम बंगाल से इनके मंत्री बनने की भी है चर्चा

पश्चिम बंगाल से इनके मंत्री बनने की भी है चर्चा

न्यूज 18 की खबरों के मुताबिक इसबार मोदी मंत्रिपरिषद में पश्चिम बंगाल की रायगंज (Raiganj) सीट से चुनाव जीतने वाले सांसद देबाश्री चौधरी (Debasree Chaudhuri) के भी मंत्री बनाए जाने की संभावना है। चौधरी का नाम इसलिए सामने आ रहा है, क्योंकि उन्होनें इस सीट पर टीएमसी (TMC) उम्मीदवार के अलावा कांग्रेस की दीपा दासमुंसी और सीपीएम के दिग्गज मोहम्मद सलीम जैसे धुरंधरों को हराया है।

2021 पर है बीजेपी की नजर

2021 पर है बीजेपी की नजर

2011 में जब ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) ने सीपीएम (CPM) की तीन दशक से ज्यादा पुरानी सरकार को हटाकर बंगाल की सत्ता हथियाई थी, उससे पहले टीएमसी के सांसद लगातार केंद्रीय मंत्रिपरिषद (union council of ministers 2019) में शामिल रहे थे। खुद ममता रेल मंत्री रहकर वहां की राजनीति में दखल देती रहती थीं। तब उन्होंने रेल मंत्री के तौर पर वहां कई प्रोजेक्ट दिए और उन्हें सीपीएम सरकार के खिलाफ नरेटिव सेट करने में आसानी होती गई। बीजेपी भी चाहती है कि उसी तर्ज पर बंगाल की जंग जीते। बीजेपी पहले से ही आरोप लगा रही है कि केंद्र सरकार जो भी योजनाएं शुरू करती है, ममता उसे स्पीड ब्रेकर बनकर रोक देती हैं। लेकिन, अब उसके पास ज्यादा सांसद हैं और अगर उनमें से कुछ ज्यादा मंत्री भी होते हैं, तो उसका काम भी आसान हो सकता है।

2021 से पहले भी है चुनाव

2021 से पहले भी है चुनाव

विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी का एक टारगेट अगले साल वहां होने वाला निगम चुनाव (Municipal Elections) भी है। इसी इरादे से पार्टी ने हाल ही में 50 काउंसिलरों को भाजपा में शामिल कराया है। बीजेपी को उम्मीद है कि नॉर्थ 24 परगना के 4 निकायों को तो वो जीत ही लेगी। वह कोलकाता के उपनगरीय इलाकों बिधाननगर और बारासात में भी अपना प्रभुत्व कायम करना चाहती है।

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