पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की हुई बैठक, लिए गए कई अहम फैसले

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आज बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दक्षिण एशियाई समुद्री क्षेत्र में तेल तथा रासायनिक प्रदूषण पर सहयोगके लिए भारत और दक्षिण एशिया सहकारी पर्यावरण कार्यक्रम (एसएसीईपी) के बीच समझौता ज्ञापन को स्‍वीकृति दे दी है। समझौता ज्ञापन का उद्देश्‍य भारत और दक्षिण एशियाई समुद्री क्षेत्र के देश यानी बांग्‍लादेश, मालदीव, पाकिस्‍तान और श्रीलंका के बीच क्षेत्र में समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा के लिए घनिष्‍ठ सहयोग को प्रोत्‍साहित करना है। समझौता ज्ञापन के अंतर्गत भारतीय तटरक्षक (आईसीजी) सक्षम राष्‍ट्रीय प्राधिकार होगा और 'क्षेत्रीय तेल बिखराव आपात योजना'को लागू करने के लिए संचालन की दृष्टि से संपर्क सूत्र होगा। भारतीय तटरक्षक भारत सरकार की ओर से तेल और रसायन के बिखराव का समुचित उत्‍तर देगा।

पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की हुई बैठक, लिए गए कई अहम फैसले

आईसीजी समुद्री बचाव समन्‍वय केंद्र (एमआरसीसी) समुद्री दुर्घटनाओं के लिए राष्‍ट्रीय आपदा अनुक्रिया केंद्र होगा। दक्षिण एशियाई क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण, प्रबंधन और प्रोत्‍साहन को समर्थन देने के लिए 1982 में श्रीलंका में अफगानिस्‍तान, बांग्‍लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका की सरकारों ने एसएसीईपी की स्‍थापना की। एसएसीईपी ने इंटरनेशनल मेरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (आईएमओ) के साथ संयुक्‍त रूप से 'क्षेत्रीय तेल बिखराव आपात योजना' विकसित की ताकि बांग्‍लादेश, भारत, मालदीव, पाकिस्‍तान तथा श्रीलंका के समुद्रों में तेल प्रदूषण की बड़ी घटना से निपटने के लिए अंतराष्‍ट्रीय सहयोग और पारस्‍परिक सहायता की तैयारी की जा सके।

इस दौरान केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शासकीयक्षमता, क्रियान्‍वयन और निगरानी फ्रेमवर्क को सशक्‍त बनाने के लिए राष्‍ट्रीय कौशल विकास कोष (एनएसडीएफ) और राष्‍ट्रीय विकास निगम (एनएसडीसी) के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है। इस पुनर्गठन से एनएसडीसी के कामकाज में ज्‍यादा पारदर्शिता और जवाबदेही तथा बेहतर कॉरपोरेट शासकीय क्षमता सुनिश्‍चित होने के साथ ही एनएसडीएफ की निगरानी भूमिका भी सशक्‍त बनेगी। अनुमोदित प्रस्‍ताव से एनएसडीएफ बोर्ड के संरचनात्‍मक पुनर्गठन के साथ ही एनएसडीसी की शासकीय क्षमता, क्रियान्‍वयन और निगरानी फ्रेमवर्क को मजबूती मिलेगी। कौशल विकास के क्षेत्र में बेहतर समन्‍वय बनाने के लिए वित्‍त मंत्रालय की ओर से एनएसडीसी और एनएसडीएफ का गठन और पंजीकरण क्रमश: जुलाई 2008 और जनवरी 2009 में किया गया था। एनएसडीएफ न्‍यास का गठन सरकार, द्वीपक्षीय / बहुपक्षीय और अन्‍य एजेंसियों द्वारा वित्‍तीय मदद प्राप्‍त करने के लिए किया गया था। इसका मुख्‍य उद्देश्‍य विभिन्‍न क्षेत्रों से जुड़े विशेष कार्यक्रमों के माध्‍यम में भारतीय युवाओं में कौशल विकास को बढ़ावा देना है।

कैबिनेट ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) अधिनियम में संशोधन का अनुमोदन किया। ये संशोधन लोकसभा में दिनांक 2 जनवरी 2018 को विचार करने तथा इसके बाद विभाग से संबंधित संसदीय समिति को विचार के लिए भेजने की पृष्ठभूमि में किये गये हैं। सरकार ने संसदीय समिति द्वारा संसद में दिनांक 20 मार्च 2018 को प्रस्तुत रिर्पोट के अनुमोदनों पर और चिकित्सा छात्रों तथा चिकित्सा पेशा से जुड़े लोगों द्वारा दिये गये विचारों/सलाहों पर विचार किया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मार्च, 2020 तक जारी रखने के लिए पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास (डोनर) मंत्रालय की निम्‍नलिखित योजनाओं को मंजूरी दी है।

एनईसी की योजनाओं के तहत - वर्तमान में जारी परियोजनाओं के लिए मौजूदा वित्‍त पोषण रुख (90:10 आधार) और नई परियोजनाओं के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्‍त पोषण के साथ विशेष विकास परियोजनाएं, एनईसी द्वारा वित्‍त पोषित अन्‍य परियोजनाओं के लिए - राजस्‍व और पूंजीगत दोनों ही - 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्‍त पोषण आधार पर, मौजूदा रुख के साथ जारी रहेंगी, 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्‍त पोषित पूर्वोत्‍तर सड़क क्षेत्र विकास योजना (एनईआरएसडीएस) का विस्‍तार होगा। अव्यपगत केन्‍द्रीय संसाधन पूल (एनएलसीपीआर-सी) को क्रियान्‍वयन के लिए एनईसी को हस्‍तांतरित किया गया। इसके साथ बी विभिन्‍न मंत्रालयों / विभागों के प्रयासों में सामंजस्‍य के जरिए संसाधनों का अनुकूलन सुनिश्चित करने का प्रस्‍ताव दिया गया।

मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने पोषक तत्‍व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) तथा शहर कम्‍पोस्‍ट योजना 12वीं पंचवर्षीय योजना से आगे 2019-20 तक जारी रखने के उर्वरक विभाग के प्रस्‍ताव को स्‍वीकृति दे दी है। दोनों योजनाओं को 2019-20 तक जारी रखने पर 61,972 करोड़ रुपये का कुल व्‍यय होगा। योजना के लिए खर्च वास्‍तविक आधार पर होगा क्‍योंकि प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) को राष्‍ट्रीय स्‍तर पर लागू करने में उर्वरक बनाने वाली कंपनियों को सब्सिडी दर पर किसानों को बेचे गए खाद पर सौ प्रतिशत सब्सिडी के भुगतान का प्रावधान है। पी और के उर्वरकों पर तथा शहर कम्‍पोस्‍ट पर बाजार विकास सहायता (एमडीए) पर सब्सिडी मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति द्वारा वार्षिक आधार पर स्‍वीकृतसब्सिडी दरों पर उपलब्‍ध कराई जाएगी। पोषक तत्‍व आधारित समिति योजना और शहर कम्‍पोस्‍ट योजना यह सुनिश्चित करेगी कि किसानों को वैधानिक रूप से नियंत्रित मूल्‍य पर प्रर्याप्‍त मात्रा में पी और के उपलब्‍ध हों।

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