CAA लागू होने का बंगाल के मटुआ-राजबंशी समुदाय के लिए क्या है मायने, लोकसभा चुनाव से पहले लागू होने का मतलब?

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू होने की खबर मिलते ही पश्चिम बंगाल में मटुआ समुदाय के लोगों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर में जिसे समुदाय का मुख्यालय माना जाता है, वहां लोगों की खुशियों का ठिकाना नहीं था।

मटुआ समुदाय के लोगों के मुताबिक नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू होना, उनके लिए 'दूसरा स्वतंत्रता दिवस' की तरह है। मटुआ मूल रूप से पूर्वी पाकिस्तान के रहने वाले हिंदू हैं, जो पहली बार देश के विभाजन के समय और फिर बांग्लादेश की मुक्ति के दौरान धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर शरणार्थी बनकर भारत चले आए।

caa and matua rajbanshi

बंगाल में बहुत बड़े दलित समुदाय हैं मटुआ और राजबंशी
बंगाल में पूर्वी पाकिस्तान से आने वाले मटुआ और राजबंशी दोनों समुदाय दलित वर्ग में आते हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक बंगाल में करीब 23.5% दलित वोटर हैं।

इनमें मटुआ समुदाय की आबादी करीब 35% और राजबंशी समुदाय की 32% बताई जाती है। हालांकि, इनकी संख्या को लेकर अलग-अलग दावे भी किए जाते हैं।

लंबे समय से कर रहे थे नागरिकता संशोधन कानून की मांग
इन दोनों समुदायों की हमेशा से मांग थी कि बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर आने वाले शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने के लिए नागरिकता संशोधन कानून बनाया जाए।

भारतीय जनता पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में इसका वादा किया था और उसी साल इसे संसद के दोनों सदनों से पारित करवा कर कानून भी बना दिया गया। लेकिन, यह तब लागू नहीं हो सका था

केंद्र सरकार ने कहा था-लोकसभा चुनाव से पहले करेंगे लागू
मटुआ समुदाय के नेता और केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने कुछ समय पहले ही दावा किया था कि लोकसभा चुनावों से पहले ही सीएए लागू हो जाएगा।

बाद में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी इस बात की पुष्टि की थी और उसी के अनुसार 11 मार्च, 2024 को पूरे देश में सीएए लागू कर दिया गया है।

करीब 15 लोकसभा सीटों पर मटुआ-राजबंशी समुदाय का प्रभाव
मटुआ समुदाय के लोग ज्यादातर बंगाल के उत्तर और दक्षिण 24 परगना और नदिया जिले में रहते हैं। कई और जिलों में इनकी काफी आबादी है। जानकारों की मानें तो बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से लगभग 15 सीटों पर ये दोनों समुदाय किसी भी पार्टी की हार या जीत को प्रभावित कर सकते हैं।

इन लोकसभा क्षेत्रों में चुनाव परिणाम कर सकते हैं प्रभावित
मटुआ समुदाय का खास प्रभाव मूल रूप बनगांव, बारासात, कृष्णानगर, राणाघाट, कूचबिहार और जलपाईगुड़ी में माना जाता है। इनके अलावा भी कई सीटों पर इनका अच्छा वोट बैंक है।

मटुआ समुदाय का बांग्लादेश से सटे सीमावर्ती इलाकों में इतना प्रभाव है कि 30 से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों में यह अकेले चुनाव परिणाम को प्रभावित करने का दम रखते हैं। राज्य में इनकी आबादी करीब 30 लाख बतायी जाती है।

राजबंशी समुदाय मूल रूप से उत्तर बंगाल में रहता है और कूचबिहार और जलपाईगुड़ी में उनका काफी प्रभाव माना जाता है। मटुआ समुदाय से आने वाले केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर बनगांव से ही भाजपा सांसद हैं।

2019 में भाजपा को दोनों समुदायों का मिला था समर्थन
मटुआ समुदाय को पहले बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस समर्थक माना जाता था। लेकिन, सीएए लागू करने का वादा करने की वजह से भाजपा को इनका समर्थन मिला और 2019 में 18 सीटें जीतने में मटुआ और राजबंशी समुदाय का बहुत बड़ा रोल रहा था।

लेकिन, 2019 में नागरिकता संशोधन कानून बनने के बाद इसको लेकर जिस तरह से देशव्यापी हिंसक विरोध शुरू हुआ और उसके साथ-साथ कोविड-19 महामारी फैल गई तो इसके नियमों को लागू करने का काम लटका रह गया।

सीएए नहीं लागू होने की वजह से 2021 में बीजेपी को हुआ नुकसान
2021 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने सीएए लागू करने का वादा किया। लेकिन, वादा नहीं पूरा कर पाने की वजह से मटुआ और राजबंशी समुदाय का वोट बीजेपी और टीएमसी में बंट गया। यही वजह है कि भाजपा को पिछले चुनाव में इसका बहुत बड़ा खमियाजा भुगतना पड़ा।

लोकसभा चुनाव से पहले लागू होने का मतलब?
अब मोदी सरकार ने सीएए ऐसे समय में लागू किया है, जब लोकसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा होने वाली है। राजनीतिक मायने साफ हैं।

मटुआ और राजबंशियों की दशकों पुरानी मांग पूरी हुई है। टीएमसी की तीखी प्रतिक्रिया से भी अंदाजा लगता है कि बंगाल ही नहीं, असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों के लिए इसके लागू होने का मतलब क्या है।(इनपुट-एजेंसियां)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+