बवाना की बड़ी जीत के पीछे हैं बदले हुए केजरीवाल, बोलता कम, मिलता ज्यादा है
ये है अरविंद केजरीवाल की बवाना में जीत की बड़ी वजह, पूरी तरह से बदला हुआ आप का स्वरूप और केजरीवाल का व्यक्तित्व बना निर्णायक
नई दिल्ली। बवाना विधानसभा सीट पर उपचुनाव में जिस तरह से आम आदमी पार्टी को बंपर जीत मिली है, उसकी एक सबसे बड़ी वजह यह थी कि खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हर दिन लोगों के बीच मौजूद रहे। यही एक बड़ी वजह है कि जब आज सुबह जब मतों की गिनती शुरू हुई तो आम आदमी पार्टी ने शुरुआत से ही बढ़त बनाए रखी और आखिरकार भारी मतों से भाजपा उम्मीदवार वेद प्रकाश को हराकर इस सीट पर प्रचंड जीत दर्ज की। यही नहीं पार्टी ने कांग्रेस के तीन बार के बवाना से विधायक सुरेंदर कुमार को तीसरे पायदान पर ढकेलने में भी सफलता हासिल की।

शुरू से ही आप थी आश्वस्त
वोटों की गिनती शुरू होने के बाद जिस तरह से आम आदमी पार्टी लगातार मजबूत होती गई उसने ना सिर्फ भाजपा बल्कि कांग्रेस उम्मीदवार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया, इस चुनाव में दूसरे पायदान पर आने के लिए कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत लगाई लेकिन आखिरकार पार्टी को तीसरे पायदान पर ही संतोष करना पड़ा। इस चुनाव के नतीजों के घोषित होने के पहले से ही आम आदमी पार्टी जीत को लेकर आश्वस्त थी। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह थी कि ऐसा एक भी दिन नहीं था जब अरविंद केजरीवाल ने बवाना में चुनाव प्रचार नहीं किया हो। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहला मौका था जब लोगों ने अरविंद केजरीवाल के दूसरे स्वरूप को देखा है, वह पहले की तुलना में काफी बदले हुए नजर आए।

भाजपा की गलत रणनीति
बवाना में आप की जीत की दो अहम वजहे हैं। पहली वजह यह कि बवाना की सीट उस वक्त खाली हुई थी जब आप विधायक वेद प्रकाश ने आम आदमी पार्टी को छोड़ने का फैसला लिया और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। जाने माने चुनाव विश्लेषक डॉ संदीप शास्त्री का कहना है कि बवाना के नतीजों के बाद तमाम दलों के लिए एक सबक साबित होगा कि कभी भी मौजूदा विधायक को अपनी पार्टी की ओर से चुनावी मैदान में नहीं उतारना चाहिए, जबकि उसका कार्यकाल भी पूरा नहीं हो सका हो।

रामचंद्र एक जमीनी कार्यकर्ता
इससे पहले भी इस तरह के कई उदाहरण हैं जब लोगों ने मौजूदा विधायक के दूसरे दल से चुनाव लड़ने पर उसे हार का मुंह दिखाया होगा। बवाना में वेद प्रकाश को लेकर लोगों में बहुत असंतोष था। आम आदमी पार्टी चुनाव प्रचार के पहले ही दिन से इस बात से बेहतर तरीके से वाकिफ थी। इसके अलावा भाजपा ने वेद प्रकाश को अपनी पार्टी में लेने का गलता गलत अनुमान लगाया। वेद प्रकाश कभी भी लोगों के बीच लोकप्रिय नहीं थे और वह किसी तरह से 2013 में आम आदमी पार्टी बदौलत चुनाव जीतने में सफल हुए थे। वहीं अगर आम आदमी पार्टी के बवाना उम्मीदवार राम चंद्र की बात करें तो वह काफी निम्न परिवार से आते हैं, वह इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन से भी जुड़े थे और काफी सक्रिय थे, वह पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता थे।

अरविंद केजरीवाल 2.0
इसके अलावा अरविंद केजरीवाल का इस चुनाव में बदला हुआ स्वरूप भी पार्टी के लिए काफी निर्णायक साबित हुआ, उन्होंने खुद को काफी संयमित और सुलझे हुए नेता के तौर पर लोगों के बीच पेश किया। गोवा, पंजाब में हार के बाद अरविंद केजरीवाल ने अपनी स्थिति का सही आंकलन करते हुए दिल्ली के चुनाव में खुद को बेहतर तरीके से केंद्रित करने का लक्ष्य बनाया जोकि उनके पक्ष में गया। गोवा और पंजाब में हार ने अरविंद केजरीवाल को आत्ममंथन करने का मौका दिया, जिसके बाद उनका पूरा नजरिया बदल गया, उन्होंने पीएम मोदी के खिलाफ भाषण देने कम कर दिए। इसके साथ ही केजरीवाल ने इस बात को भी स्वीकार किया कि उन्हें उस क्षेत्र में बेहतर काम करने की जरूरत है जहां उनकी स्थिति मजबूत है बजाए इसके कि वह खुद को राष्ट्रीय राजनीति में खफाएं।

खुद को काफी संतुलित किया
केजरीवाल को इस बात का अंदाजा लग गया था कि चुनाव जीतने के लिए हमेशा टीवी पर बने रहना जरूरी नहीं है। अगर गोरखपुर हादसे की बात करें तो केजरीवाल ने काफी सधी हुई प्रतिक्रिया इस मसले पर दी थी। उन्होंने घटना के तुरंत बाद इसपर प्रतिक्रिया नहीं दी बल्कि इस बात का इंतजार किया और खुद को तथ्यों के आ जाने तक संयमित बनाए रखा। जिसके बाद उन्होंने दिल्ली के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट के साथ एक बैठक की और अस्पताल में दवा व अन्य उपकरणों सहित ऑक्सीजन की समीक्षा की। आप के सूत्र ने बताया कि केजरीवाल ने बेहद संतुलित तरीके से अपनी रणनीति बनाए और खुद को नए सांचे में ढाला। केजरीवाल के बदले स्वरूप का यह आलम था कि उनके विरोधी तक यह कहने लगे थे कि केजरीवाल तो गायब हो गए हैं और अब वह किसी भी बात पर अपनी प्रतिक्रिया ही नहीं देते हैं।

खुद पानी भरी सड़कों पर पैदल चलें केजरीवाल
बवाना में प्रचार अभियान के दौरान अरविंद केजरीवाल ने हर दिन प्रचार किया और लोगों से मुलाकात की, उन्होंने इस दौरान तमाम स्थानीय कार्यकर्ताओं से मुलाकात की, वह पैदल ही उन रास्तों पर चलते थे जहां पानी भरा होता था और स्थानीय लोगों से मुलाकात करते थे, वह लोगों से कहते थे कि मैं वायदा करता हूं कि इस रोड का निर्माण जल्द पूरा कराउंगा। आप के प्रवक्ता दीपक वाजपेयी का कहना है कि केजरीवाल का जादू अभी कम नहीं हुआ है, वह अभी भी आम लोगों के बीच लोकप्रिय हैं, उन्होंने अपने व्यक्तित्व के दम पर लोगों का बवाना में दिल जीता है।

आप के मनोबल को बढ़ाने के लिए यह जीत अहम
बवाना में लोगों से मुलाकात के दौरान एक बार अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रवाद पर भी लोगों से बात की और उन्होंने कहा भाजपा राष्ट्रवाद की बात तो करती है, लेकिन काम कुछ भी नहीं करती है। अगर दिल्ली का कोई जवान शहीद होता है तो हमारी सरकार उसके परिवार को एक करोड़ रुपए का मुआवजा देती है, जब किसान की फसल बर्बाद होती है तो हम उसे मुआवजा देते हैं। दिल्ली में बवाना की जीत पार्टी के लिए काफी अहम है, सोशल मीडिया पर आप की एक बदली हुई तस्वीर सामने आ रही है। यह जीत आप के लिए महज एक सीट पर जीत हो सकती है, लेकिन आने वाले समय में यह पार्टी के मनोबल को कई गुना बढ़ाने में मदद करेगी। इस जीत के साथ ही आप को इस बात का एहसास होगा कि फिलहाल के समय के लिए पार्टी को दिल्ली के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है बजाए इसके कि दिल्ली के बाहर तमाम अन्य मुद्दों पर अपना ध्यान भटकाए।












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