Bypolls 2018: जानिए किस तरह महाराष्ट्र में भाजपा की जीत अन्य दलों के गणित को बिगाड़ सकती है
नई दिल्ली। महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना लंबे समय तक साथ रहते हुए कई चुनाव में जीत दर्ज की है। लेकिन एक अरसे तक रहे इस गठबंधन के बाद आखिरकार महाराष्ट्र के पालघर सीट पर शिवसेना ने भाजपा के उम्मीदवार के खिलाफ अपना उम्मीदवार मैदान में उतारा है। ऐसे में यह देखना काफी दिलचस्प है कि एक अरसे तक एक दूसरे के साथ रहने वाली भाजपा-शिवसेना अलग-अलग होकर किस तरह का प्रदर्शन करती हैं।

शिवसेना बनी चुनौती
शिवसेना और भाजपा केंद्र और राज्य दोनों में एक दूसरे की सहयोगी हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से लगातार शिवसेना भाजपा की आलोचना कर रही है और कोई भी ऐसा मौका नहीं छोड़ा है जब केंद्र सरकार और पीएम मोदी पर निशाना नहीं साधा हो। ऐसे में शिवसेना इस बार उपचुनाव में अगर जीत दर्ज करती है तो 2019 के लोकसभा चुनाव ससे पहले उसके हौसले काफी बुलंद हो जाएंगे। शिवसेना प्रदेश में अधिक सीटों पर उम्मीदवारी चाहती है, लेकिन भाजपा इसके लिए तैयार नहीं है, इसपर दोनों दलों के बीच तनातनी लगातार बरकरार है।
एनसीपी-कांग्रेस की चुनौती
अगर भाजपा यहां से जीत दर्ज करती है तो वह समझौता करने के मूड में नहीं रहेगी। इसके साथ ही भंडारा-गोंडिया की सीट पर भी मामला दिलचस्प है। यहां भाजपा के उम्मीदवार के खिलाफ एनसीपी-कांग्रेस का उम्मीदवार मैदान में है। स्थानीय चुनाव में दोनों दल एक साथ लड़ चुके हैं, लेकिन यह पहली बार है जब बड़े चुनाव में दोनों दल एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। आपको बता दें कि कांग्रेस और एनसीपी ने कभी भी एक साथ मिलकर लोकसभा और विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा है।
नतीजों पर भविष्य निर्भर
दोनों ही सीट पर भाजपा के लिए जीत काफी अहम है, अगर यहां भाजपा जीत दर्ज करती है तो महाराष्ट्र में प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की स्थित मजबूत होगी। साथ ही भाजपा 2019 के लोकसभा चुनाव में अन्य दलों के साथ बेहतर समझौता करने की स्थिति में रहेगी। साथ ही भाजपा की जीत के बाद यहां कांग्रेस-एनसीपी की आगामी गठबंधन के बारे में भी दोनों दलों को फिर से सोचने पर मजबूर होना पड़ेगा।












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