Tripura By election results:'कम्युनिस्टों का रास्ता खत्म', त्रिपुरा में कहां से कहां पहुंच गई सीपीएम? जानिए
Tripura By election results 2023: विधानसभा उपचुनाव में त्रिपुरा की दोनों सीटों पर जीत से सत्ताधारी बीजेपी की खुशी का ठिकाना नहीं है। क्योंकि, कुछ वर्ष पहले तक भाजपा के लिए यह सपने से कम नहीं था।
एक दशक से कुछ पहले तक देश में तीन राज्यों को कम्युनिस्टों या वामपंथियों का गढ़ समझा जाता था। लेकिन, अब पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में लेफ्ट के वो किले पूरी तरह से ढह चुके हैं। सिर्फ केरल में ही कम्युनिस्टों की राजनीति आज भी प्रभावी है।

बोक्सानगर में बीजेपी के मुस्लिम प्रत्याशी की बड़ी जीत
त्रिपुरा उपचुनाव में सीपीएम से उसकी सीट छीनने के बाद बीजेपी ने कहा है कि पूर्वोत्तर के इस राज्य में कम्युनिस्टों का रास्ता बंद हो गया है। चुनाव आयोग के मुताबिक त्रिपुरा की बोक्सानगर सीट पर बीजेपी के प्रत्याशी तफज्जल हुसैन 30,237 वोटों के अंतर से जीत गए हैं। जबकि, सीपीएम के मिजान हुसैन को यहां सिर्फ 3,909 वोट ही मिल पाए हैं।
बोक्सानगर सीट पर 66% मुस्लिम वोटर
बोक्सानगर की हार वामपंथी दलों के लिए किसी सदमे से कम नहीं है। क्योंकि, यह न केवल सीपीएम की सीटिंग सीट थी, बल्कि यहां पर 66% वोटर मुस्लिम वोटर हैं। हालांकि, धनपुर सीट बीजेपी के ही पास थी और उसने इसपर कब्जा बरकरार रखा है। बड़ी संख्या में आदिवासी वोटरों वाली इस सीट को बीजेपी के बिंदू देबनाथ ने सीपीएम के कौशिक चंदा को 18,871 वोटों से हराकर जीता है।
त्रिपुरा में कम्युनिस्टों का रास्ता खत्म- बीजेपी
ये दोनों ही सीटें त्रिपुरा के सिपाहीजला जिले में हैं, जहां उप चुनाव में बीजेपी और सीपीएम के बीच सीधा मुकाबला हुआ। क्योंकि, दोनों अन्य विपक्षी दलों यानी टिपरा मोथा और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी नहीं उतारे थे। इस जीत पर बीजेपी के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने X पर लिखा है, 'बीजेपी त्रिपुरा में दोनों विधानसभा सीटें जीत गई.....कम्युनिस्टों का रास्ता खत्म जो कि कभी उनका गढ़ था।'
उपचुनाव में 86.5% हुई थी वोटिंग
5 सितबंर को दोनों सीटों पर हुए उपचुनाव में औसतन 86.5% वोटिंग हुई थी। बोक्सानगर सीट सीपीएम एमलए समसुल हक के निधन की वजह से खाली हुई थी। जबकि, धनपुर सीट केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक के इस्तीफे की वजह से खाली हुई थी। सात महीने पहले हुए त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में बीजेपी पहली बार यह सीट जीती थी।
त्रिपुरा में कहां से कहां पहुंच गई सीपीएम?
कुछ साल पहले तक त्रिपुरा में कम्युनिस्ट पार्टियों का ही बोलबाला था। 2013 के विधानसभा चुनावों में 60 सीटों में से 49 पर सीपीएम और एक पर सीपीआई का कब्जा हुआ था। तब राज्य में कांग्रेस के पास 10 सीटें थीं। बीजेपी के पास एक भी सीट नहीं थी।
शुक्रवार को आए त्रिपुरा उपचुनाव के परिणाम के बाद 60 विधायकों वाले सदन में बीजेपी एमएलए की संख्या 33 हो गई है और उसकी सहयोगी आईपीएफटी (IPFT) का भी एक एमएलए है। जबकि, सीपीएम सिमटकर 10 विधायकों पर आ चुकी है और 13 सीटें टिपरा मोथा और 3 कांग्रेस के पास है।












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