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बालासोर ट्रेन हादसे में क्षतिग्रस्त S1 कोच से लाशों के बीच से रेंगकर निकला व्यापारी, पढ़ें खौफनाक अनुभव

शुक्रवार की शाम बालासोर ट्रेन हादसे में कोरोमंडल एक्‍सप्रेस पर सवार चंद ही ऐसे यात्री थे जो मौत के मुंह में जाकर वापस आए। एक ऐसे ही घायल यात्री ने इस भयावह हादसे की दर्द भरी दास्‍तां सुनाई है।

Odisha train accident:

कोरोमंडल एक्सप्रेस ट्रेन 130 किमी घंटे की रफ्तार से पटरी पर दौड़ रही थी। मैं S1 कोच में बैठा मोबाइल पर रिकार्डिंग कर रहा था मैं रिकार्डिंग पूरी कर नहीं पाया था कि चंद मिनटों में जोर से आवाज आई, मेरा सिर जोर से किसी चीज से जोर से भिड़ा और थोड़ी ही देर में आंख खुली तो मैंने सिर बाहर निकाला तो खुद को खून से लतपथ पाया।

धुएं से भरी बोगी मे अंधेरा में चीखने-पुकारने की आवाजें आ रही थी। मेरा दम घुट रहा था और मेरे हाथ में मोबाइल था, मैं लोगों की लाशों के बीच से रेंगते हुए ट्रेन के बाहर किसी तरह से अपने आप को निकाला। जब बाहर आया तो पटरी पर लाशें ही लाशें ही पड़ी हुई थी...ये आंखों देखा मंजर 50 वर्षीय मणिकल तिवारी ने सुनाया।

हादसे में बाल-बाल बची जान

मणिकल तिवारी कोरोमंडल एक्‍सप्रेस पर सवार उन 100 भाग्‍यशाली यात्रियों में शामिल हैं जो इस भीषण हादसे में बच गए हैं। अस्‍पताल में भर्ती मणिकल तिवारी जो व्‍यापारी है और जो इस ट्रेन पर सवार थे। बोले खुद को जब रेंगते हुए बाहर आने की कोशिश कर रहा था तब मेरे साथ के कुछ यात्री धुएं से भरे अंधेरे कोच में मृत पड़े थे।

सदमे की हालत में भाई को फोन मिलाया लेकिन रिसीव नहीं हुआ


मणिकल ने भाई चंदनलाल ने बताया कि उसके भाई का कोच बुरी तरह से चकनाचूर हो गया था। उसने अपना बैग निकालने का प्रयास किया लेकिन नहीं निकाल पाया, विचलित और सदमें ट्रेन से बाहर आकर उसने मुझे फोन किया लेकिन मैं कॉल रिसीव नहीं कर सका।

डॉक्‍टरों ने बताया आपका भाई जिंदा है

पटरी पर आने पर एक व्‍यक्ति की मदद मांगी जो मणिकल प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र खांटापाड़ा लाया गया। मणिकल को उसका भाई मिस काल देखकर बराबर कॉल करता रहा लेकिन फोन नहीं उठा जब ट्रेन हादसे के बारे में पता चला तो व्‍यापारी के घर वाले डर गए लेकिन जब मणिकल का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने फोन कर जब बताया कि भाई जीवित है तो मानो उन्‍हें विश्‍वास ही नहीं हो रहा था। घायल मणिकल ने बताया कि उनके सामने एक युवा जोड़ा बैठा था...वह आदमी मर गया, जबकि उसकी पत्नी बच गई।

सुभ्रांशु कटे हुए अंगों और शरीर पर पैर रखते हुए बाहर निकला

बालासोर के रहने वाले 20 वर्षीय सुभ्रांशु बेहरा भी इसी ट्रेन में सवार थे उन्‍होंने बताया कि मैं अपनी मां से फोन पर बात कर रहा था तब ट्रेन बहनागा स्टेशन की ओर तेजी से बढ़ रही थी। उसने कहा अगली बात जो मुझे याद है वह कोच का पलटना है... मैं कई यात्रियों के बीच में फंसा हुआ था। उसने बताया कि मेरे साथ ट्रेन पर यात्रा कर रहे मेरे मामा को मैंने ढूंढ़ा लेकिन अंधेरे में नहीं मिले। मेरा खून बह रहा था और मैं किसी तरह किसी के कटे हुए अंग या कटे हुए शरीर पर पैर रखते हुए कोच से बाहर निकलने में कामयाब रहा।

मैं खौफ में आकर पास के धान के खेत की ओर भागा और...

सुभांशु ने बताया कि मैं इतना डर गया था कि हादसे के पास के एक धान के खेत में भाग गया और वहां पर कुछ जमीन पर पड़ा बेसुध रहा। जिसके बाद किसी की नजर उस पर पड़ी और उसके बाद उसे प्राथमिक केंद्र ले जाया गया और संभलने के बाद मैंने अपनी मां को फोन किया।

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