बजट के एलानों से कोरोना की मार झेलती इकोनॉमी कितनी उबर जाएगी
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2022-23 का बजट पेश किया. इसमें कोरोना से सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई उपायों का एलान किया गया.
मोदी सरकार ने बुनियादी ढांचे पर ख़र्च को बढ़ा दिया है. साथ ही छोटे व्यवसायों के लिए क्रेडिट गारंटी भी बढ़ाने का एलान किया गया है. सरकार ने कोशिश की है कि इन उपायों के ज़रिए कम मांग, बढ़ी हुई बेरोज़गारी, उच्च महंगाई दर और कोरोना के बाद 'के आकार' की रिकवरी से अर्थव्यवस्था को छुटकारा मिले.
कोरोना के बाद के हालातों में पाया जा रहा है कि अर्थव्यवस्था के टॉप पर मौजूद संगठित क्षेत्र के उद्योग तेज़ी से विकास कर रहे हैं, लेकिन पहले से कमज़ोर और असंगठित क्षेत्र के छोटे उद्यम बढ़ने की बजाय नीचे की ओर जा रहे हैं.
इसे लेकर सरकार को लगातार आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए ''दो तरह की गति वाली रिकवरी'' ख़तरनाक है.
केंद्रीय वित्त मंत्री ने इन हालातों से निपटने के लिए इस बजट में बहुत बड़े ख़र्च की योजना पेश की और बढ़े राजकोषीय घाटे पर तेज़ी से नियंत्रण पाने की कोशिश छोड़ दी.
हालांकि अर्थशास्त्रियों की चिंता है कि निवेश लक्ष्य पाने के लिए सरकार को कर्ज़ लेना होगा जिससे ब्याज दरों पर और दबाव बढ़ेगा. इससे महंगाई के और बढ़ने का ख़तरा बना रहेगा.
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मध्यवर्ग और नौकरीपेशा को निराशा
केंद्र सरकार ने बजट में बताया कि अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष में पूंजीगत ख़र्च का लक्ष्य पिछले साल से क़रीब 35 फ़ीसदी ज़्यादा रहेगा.
इस ख़र्च से देश में एक्सप्रेस-वे का जाल फैलाया जाएगा. साथ ही 25,000 किमी नए हाइवे बनाए जाएंगे और 100 कार्गो टर्मिनलों का निर्माण किया जाएगा. सौर पैनलों के निर्माण के लिए और सब्सिडी देने का एलान भी किया गया है.
हालांकि आयकर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इससे मध्य वर्ग और नौकरी करने वालों को निराशा हुई, जबकि वे पिछले कई सालों से सरकार से किसी राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
चर्चा थी कि अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए पैसे जुटाने के लिए अमीरों पर नए कर लगाए जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. देश के शेयर बाज़ार ऐसा न होने का जश्न मनाते हुए बढ़कर बंद हुए.
अर्थशास्त्री शुभदा राव कहती हैं कि निजी खपत बढ़ाने पर उम्मीद से कम ज़ोर दिया गया, जबकि यह देश की अर्थव्यवस्था का 55 फ़ीसदी हिस्सा है.
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रोज़गार बढ़ाने वाले उपायों का अभाव
देश में बेरोज़गारी संकट दूर करने के लिए किसी ख़ास प्रस्ताव का एलान न होने से भी लोगों को दुख हआ. जबकि बजट से क़रीब एक हफ़्ते पहले ही बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों के हज़ारों युवा रोज़गार से जुड़ी दिक़्क़तों के चलते सड़क पर उतर गए. वहां युवाओं का ग़ुस्सा अभी भी बना हुआ है.
गांवों में ग़रीबों औ मज़दूरों को सहारा देने वाली मनरेगा योजना का आवंटन भी पहले से घटा दिया गया है. इस योजना के तहत, ग्रामीणों को मांगने पर 100 दिनों का निश्चित रोज़गार देने का प्रावधान है.
सेंटर फ़ॉर मॉनिटरिंग द इंडियन इकोनॉमी यानी सीएमआईई के सीईओ महेश व्यास कहते हैं, "सरकार से मनरेगा की ही तरह शहरों के लिए एक योजना के एलान की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ जिससे निराशा हुई."
निर्मला सीतारमण ने खाद्य और उर्वरक सब्सिडी भी पहले से घटाने का एलान किया है. अर्थशास्त्रियों को लगता है कि मुफ़्त अनाज बांटने की योजना सरकार धीरे-धीरे ख़त्म कर देगी.
नोमुरा के प्रबंध निदेशक और कंट्री हेड प्रभात अवस्थी कहते हैं कि बजट में किसी बड़े लोक-लुभावन छूट का एलान नहीं किया गया, जो बताता है कि राजनीतिक फ़ायदे पर देश के आर्थिक विकास को एक बार फिर तरजीह दी गई.
वो कहते हैं कि सार्वजनिक योजनाओं पर बढ़ा हुआ ख़र्च भी लोगों तक नक़द जाने की बजाय बुनियादी ढांचे के विकास के ज़रिए पहुंचेगा. उदाहरण के लिए सस्ते घर बनाने की योजना. ऐसे उपायों से नए रोज़गार पैदा होने के साथ आय और खपत के बढ़ने की उम्मीद है.
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क्रिप्टो करेंसी
इस बजट में क्रिप्टो करेंसी से जुड़े बड़े फ़ैसले का एलान किया गया. वित्त मंत्री ने कहा कि देश का केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिज़र्व बैंक इस साल 'ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी' का उपयोग करके एक "डिजिटल रुपया" पेश करेगा.
यदि ऐसा होता है तो भारत ऐसा करने वाले दुनिया के पहले कुछ देशों में से एक हो जाएगा. हालांकि देश में अभी तक इस करेंसी से जुड़ा क़ानून नहीं बना है.
वित्त मंत्री ने यह घोषणा भी की कि वर्चुअल डिजिटल संपदा से होने वाली आमदनी पर 30 फ़ीसदी का कर लगाया जाएगा.
उन्होंने कहा, "केंद्रीय बैंक के डिजिटल करेंसी शुरू करने से डिजिटल इकोनॉमी को बहुत बढ़ावा मिलेगा. इससे ज़्यादा कुशल और सस्ता करेंसी मैनेजमेंट सिस्टम भी तैयार होगा."
एबी बर्नस्टीन के एमडी गौतम छुगानी ने ट्वीट करके कहा, "जानकार इस फ़ैसले का स्वागत कर रहे हैं. मान्यता के लिए 30 प्रतिशत का भुगतान करना छोटी बात है. भारत जैसे बाज़ार के लिए क्रिप्टो लाना वाक़ई बड़े बदलाव लाने वाला फ़ैसला है."
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