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Budget 2025: मध्यम वर्ग बोला, "हम क्या चाहें - आज़ादी... महंगाई से, बेरोजगारी से, टैक्सेशन से!

Budget 2025: मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण एक बार फिर साल 2025 का केंद्रीय बजट प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही हैं। इस बीच भारतीय मध्यवर्ग की निगाहें एक बार फिर वित्त मंत्री के पिटारे पर टिकी हैं।

हर साल की तरह इस बार भी आम आदमी को बजट से ढेरों उम्मीदें हैं-कम टैक्स, महंगाई पर काबू, सस्ती शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं, और बेहतर रोजगार के अवसर। लेकिन क्या इस बार उनकी ये अपेक्षाएँ पूरी होंगी, या फिर उन्हें सिर्फ वादों का झुनझुना पकड़ाया जाएगा?

Budget 2025

Budget 2025: कम टैक्स-ज्यादा बचत

भारतीय मध्यवर्ग की सबसे बड़ी चिंता इनकम टैक्स स्लैब में राहत की है। महंगाई के इस दौर में जहां घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है, वहीं वेतनभोगी वर्ग को उम्मीद है कि सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाएगी और नई टैक्स प्रणाली को और आकर्षक बनाएगी। ओल्ड टैक्स रिजिम के में 80C के तहत निवेश की सीमा को 1.5 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख करने की मांग लगातार उठ रही है, ताकि लोगों को बचत करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। हलांकि सरकार अपने तौर पर नये टैक्स रिजिम को प्रोमोट करना चाहती है ऐसे में पुराने आयकर छूट के ढांचे में शायद ही कोई बदलाव हो।

Budget 2025: महंगाई पर नियंत्रण

मध्यम वर्ग की सबसे बडी चिंता है महंगाई। पिछले कुछ वर्षों में पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस और खाद्य पदार्थों की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। मध्यम वर्ग को उम्मीद है कि सरकार कुछ ऐसे उपाय करेगी जिससे रोजमर्रा की चीजों की कीमतें कम हों। विशेष रूप से, रसोई गैस पर सब्सिडी की बहाली और किराने के सामान पर जीएसटी में राहत की मांग तेज हो गई है। पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी में शामिल करने की भी मांग समय-दर-समय उठती रही है। हलांकि राज्य-सरकारें इससे मिलने वाले राजस्व के कारण इस पर कभी सहमत नहीं होगी लेकिन केंद्र सरकार चाहे तो पहल कर सकती है।

Budget 2025: स्वास्थ्य और शिक्षा पर अधिक निवेश

कोरोना महामारी के बाद से ही स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। मध्यवर्ग चाहता है कि सरकारी अस्पतालों की गुणवत्ता सुधरे, आयुष्मान योजना का दायरा बढ़ाया जाए, और मेडिसिन व हेल्थ चेकअप पर टैक्स में छूट दी जाए। शिक्षा के क्षेत्र में भी उम्मीदें कम नहीं हैं। माता-पिता चाहते हैं कि स्कूल और कॉलेज की फीस पर टैक्स में कुछ राहत दी जाए और एजुकेशन लोन पर ब्याज दरें कम की जाएं, ताकि उच्च शिक्षा हर वर्ग के लिए सुलभ हो सके।

ये भी पढ़ें: Budget 2025: केंद्रीय बजट में Taxpayers को राहत मिलने की क्यों बढ़ गई है उम्मीद?

Budget 2025: रोजगार और स्टार्टअप्स के लिए विशेष योजनाएं

नौकरीपेशा लोगों को जहां वेतन वृद्धि की उम्मीद है, वहीं युवा वर्ग चाहता है कि सरकार स्टार्टअप्स को बढ़ावा दे और स्वरोजगार के लिए आसान लोन योजनाएं लाए। मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों से नए रोजगार सृजित होने की संभावना है, लेकिन क्या सरकार इनके लिए कोई विशेष पैकेज आवंटित करेगी? हाल के दिनों में बंगलोर, पुणे, गुरुग्राम, हैदराबाद और नोएडा के स्टार्ट-अप्स को काफी स्ट्रेस में देखा गया है और कई पर तो ताले लटक गए। सरकारी नौकरी की घटती दर के बीच निजि क्षेत्रों में रोजगार सृजित करने वाली कंपनियों को कर में छूट या प्रोत्साहन पैकेज देने पर यदि केंद्र सरकार विचार करती है तो युवाओं के लिए रोजगार के द्वार खुल सकते हैं।

इसके अतिरिक्त लोग सस्ते घरों की उम्मीद में भी हैं। घर खरीदने का सपना हर भारतीय का होता है, लेकिन बढ़ती ब्याज दरें और महंगे प्रॉपर्टी रेट्स इसे मुश्किल बना रहे हैं। मध्यम वर्ग चाहता है कि होम लोन पर ब्याज दरें कम की जाएं और प्रधानमंत्री आवास योजना का विस्तार हो ताकि घर खरीदना आसान हो सके।

ये भी पढ़ें: Budget 2025: Old और New Income Tax regime में प्रमुख अंतर क्या है? किस बदलाव की हैं अटकलें?

इच्छाएं किसी की भी अनंत होती है और मध्यम वर्ग की भी। अब देखना यह है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बजट में मध्यवर्ग को कितनी राहत देती हैं। क्या यह बजट सिर्फ बड़े उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट सेक्टर को लाभ पहुंचाएगा या फिर आम आदमी को भी कुछ ठोस राहत मिलेगी? जवाब 1 फरवरी 2025 को मिलेगा, जब बजट का पिटारा खुलेगा। तब तक, उम्मीदों का बाजार गर्म है!

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