'कई लड़कियों की तरह, मुझे इस आदमी की वजह से...',आखिर क्यों इतने सालों तक चुप रहीं विनेश फोगाट?
विनेश फोगाट ने कहा है कि इंसाफ की हमारी लड़ाई एक महीने पुरानी है फिर भी ऐसा लगता है जैसे हम जंतर-मंतर पर एक साल से हैं। न्याय के लिए हमारी लड़ाई ऐसा लगता है जैसे यह हमेशा से जारी है।

Vinesh Phogat on Brij Bhushan singh: देश की शीर्ष महिला पहलवान विनेश फोगाट और एक नाबालिग पहलवान सहित सात महिला पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
लगभग एक महीने से जंतर-मंतर पर देश के पहलवान बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बीच विनेश फोगाट ने बताया है कि आखिर क्यों वह इतने सालों से चुप थीं।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक विनेश फोगाट ने कहा, ''कई अन्य लड़कियों की तरह, मुझे भी इस आदमी (बृजभूषण शरण सिंह) वजह से इतने साल चुपचाप सहना पड़ा। मेरे पास इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं था।''
विनेश फोगाट बोले, 'फिर भी, आज एक महीने के बाद से हमने विरोध शुरू किया है। लेकिन अभी तक कोई इंसाफ नहीं मिला है। यौन उत्पीड़न के बारे में बार-बार बात करना शिकायतकर्ताओं के लिए किसी यातना से कम नहीं है। क्या आप मुझे बता सकते हैं कि सांसद बृजभूषण को सुरक्षा क्यों की जा रही है। इसका अंदाजा किसी को नहीं है।'
विनेश फोगाट ने कहा, 'लेकिन, जैसा कि हमने कहा है, हम जंतर मंतर से तब तक नहीं हटेंगे जब तक उन्हें (विनेश) गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता। पिछले कुछ महीने तनावपूर्ण रहे हैं और मैंने आंसू बहाए हैं। लेकिन मैं जानती हूं कि महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए यह एक लंबी और कड़ी परीक्षा की लड़ाई हो सकती है और मैं कोई भी कुर्बानी देने के लिए तैयार हूं।'
विनेश फोगाट ने कहा, 'एशिएन गेम्स नजदीक है और ओलंपिक के लिए क्वालीफाइंग शुरू हो रहा है और हालांकि हमें भारत का प्रतिनिधित्व करना है और पदक जीतना है, फिलहाल यह एक बड़ी लड़ाई है। क्योंकि अगर हम न्याय पाए बिना अपना विरोध बंद कर देंगे तो यौन उत्पीड़न झेलने वाली महिलाएं चुप रहेंगी और सहते रहेंगी।'
विनेश फोगाट ने कहा, 'मैं हमेशा से मुखर रही हूं और हर किसी को यह पसंद नहीं है। चाहे वह खेल मंत्रालय के लोग हों या भारतीय खेल प्राधिकरण या डब्ल्यूएफआई के लोग। जब मैंने एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता तो लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया कि जब मैंने अपने मन की बात कहनी शुरू की तो मुझे अहंकार हो गया था। क्या अन्याय होने पर एक महिला के लिए आवाज उठाना गलत है...?
विनेश फोगाट ने आगे कहा, ''मैं जनवरी में पहले विरोध के बाद रोई, खासकर जब मुझे एहसास हुआ कि हमारी एकता को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। लेकिन जो चाहते थे कि हम असफल हों, वे हमारे संकल्प को भंग नहीं कर सके। हम और मजबूत होकर लौटे हैं। पहले हम राजनीतिक खेल के प्यादे थे। अब हम अपने फैसले खुद कर रहे हैं।''












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