पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक, जानिए क्या कहते हैं ब्लू-बुक के नियम
नई दिल्ली, 06 जनवरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिस तरह से पंजाब के फिरोजपुर में अपने कार्यक्रम को बीच में रद्द करके वापस लौटना पड़ा उसके बाद लगातार पीएम मोदी की सुरक्षा में हुई चूक चर्चा का विषय बनी हुई है। एक तरफ जहां भाजपा कांग्रेस सरकार पर जानबूझकर पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक का आरोप लगा रही है तो दूसरी तरफ कांग्रेस आरोप लगा रही है कि रैली में भीड़ नहीं जुटने की वजह से पीएम मोदी ने जानबूझकर कार्यक्रम को रद्द किया। दोनों ही ओर से आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। इन सब के बीच ब्लू बुक को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है जिसमे पीएम मोदी के कार्यक्रम के दौरान उनकी सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल की जानकारी होती है।
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पीएम की सुरक्षा में सेंध ने पकड़ा तूल
दरअसल प्रधानमंत्री मोदी का काफिल पंजाब में तकरीबन 20 मिनट तक प्रदर्शनकारियों की वजह से फंसा रहा, जिसके बाद यह पूरा मसला तूल पकड़ चुका है। प्रदेश सरकार पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि उसने कानून-व्यवस्था को बेहतर तरह से नहीं संभाला, जिसकी वजह से पीएम मोदी की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक हुई। हालांकि पंजाब सरकार ने इन तमाम आरोपों से इनकार किया है, लेकिन भाजपा आरोप लगा रही है कि प्रदेश सरकार ने ब्लू बुक के चैप्टर 24 का पालन नहीं किया जोकि वीआई के लिए जुड़ी सुरक्षा को लेकर काफी अहम है।

ब्लू बुक के नियम अहम
प्रदेश में जब भी वीवीआई आते हैं तो सड़क पर उनके सफर को लेकर कुछ नियम तय हैं जोकि ब्लू बुक में दर्ज हैं। नियम कहते हैं कि पायलट और स्कॉर्ट को जरूरत के अनुसार मुहैया कराना चाहिए। नियम के अनुसार वीवीआई कार स्कॉर्ट-1 और स्कॉर्ट-2 एक ही रंग और एक ही मॉडल की होनी चाहिए। जरूरत के अनुसार सिक्योरिटी बॉक्स में मुख्य कार और खाली कार बुलेट प्रूफ होनी चाहिए।

ड्राइवर के लिए निर्देश
इन गाड़ियों को चलाने वाले ड्राइवर का अनुभवी होना जरूरी है। साथ ही ड्राइवर की विस्तृत जानकारी होना भी अहम है। एक बार कारों का काफिला तय होने का बाद इसे बदला नहीं जाना चाहिए। कार में बैठने वालों का क्रम भी पहले से तय होना चाहिए, साथ ही ड्राइवर को यह निर्देश दिए जाते हैं कि वह हमेशा अपनी कार के पास रहें। ड्राइवर को कार की रफ्तार की जानकारी होनी चाहिए जिससे कि वह काफिले में उस रफ्तार को बरकरार रख सके। कार पर लगने वाली फ्लैग रॉड कार के बोनट के बीच में नहीं बल्कि बाएं किनारे लगनी चाहिए।

बिल्डिंग की पहचान
एक जगह से दूसरी जगह जाने में लगने वाले समय को पहले से तय किया जाता है और इसपर विस्तार से तैयारी की जाती है। अगर कारों का काफिला बड़ी बिल्डिंग के बीच से गुजर रहा हो तो इन बिल्डिंग की पहचान होनी चाहिए, यहां पर स्टाफ के कर्मचारी को तैनात किया जाता है। सभी वाहन जो चिन्हित नहीं हैं उनकी पहचान की जानी चाहिए और उन्हें तत्काल प्रभाव से रूट से हटाना चाहिए। रास्ते में पड़ने वाले सभी पुल, नालों आदि को चेक किया जाना चाहिए।

आकस्मिक व्यवस्था
वीवीआई के काफिले के लिए आकस्मिक रास्ता, आकस्मिक अस्पताल और सेफ हाउस भी तैयार रहना चाहिए। साथ ही कारों के काफिले में तैनात अधिकारी को इस बाबत जानकारी दी जानी चाहिए। जब वीवीआई रास्ते में लोगों का अभिवादन स्वीकार करने के लिए रुकते हैं या फिर उनसे फूल-माला लेते हैं तो इसके लिए सबसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को वहां मौजूद होना चाहिए और इस तरह के इंतजाम करने चाहिए जिससे किसी भी परिस्थिति से निपटा जा सके। अगर काफिला काफी भीड़-भाड़ वाले इलाके से गुजर रहा है और यह रास्ता लंबा है तो इसे छोटे-छोटे सेक्टर में बांटा जाता है और हर सेक्टर की जिम्मेदारी एक अधिकारी को दी जाती है जोकि इसपर नजर रखता है।

हर सेक्टर पर तैनाती
जिस सेक्टर की जिम्मेदारी अधिकारी को दी जाती है वहां पर सिपाहियों की तैनाती उतनी दूरी पर ही की जाती है ताकि वह लोगों की भीड़ को संभाल सके। इस इलाके में बुजुर्ग लोगों की देखभाल की जिम्मेदारी भी इन्ही पर होती है। जब रास्ते पर बड़ी भीड़ इकट्ठा होती है तो अचानक बढ़ने वाली भीड़ से निपटने के लिए कूटनीतिक तैयारी होनी चाहिए। जब पर कम जरूरत हो वहां पर अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती नहीं की जा सकती है। सिर्फ सुरक्षाकर्मियों की संख्या मायने नहीं रखती है बल्कि जरूरत के अनुसार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती अहम है।












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