BrahMos Missile IAF के छोटे युद्धक विमानों से भी जुड़े, ऐसा संस्करण बनाएं, वायुसेना प्रमुख ने किया आह्वान
BrahMos Missile IAF की नजरों में बेहद कारगर और मारक अस्त्र है। वायुसेना इसकी क्षमता से कितना प्रभावित है, इसका अंदाजा इसी बात से होता है कि वायुसेना प्रमुख इसके छोटे संस्करण विकसित करने पर जोर दे रहे हैं।

BrahMos Missile IAF के छोटे विमानों से भी जुड़े, ऐसे संस्करण के विकास पर काम करने की जरूरत है। ये कहना है भारतीय वायुसेना प्रमुख एयरमार्शल वीआर चौधरी का। अभी केवल सुखोई -30MKI फाइटर्स से इसे लॉन्च किया जाता है।
मिग -29, मिराज 2000 और स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमानों का जिक्र कर भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने बुधवार को कहा, छोटे वॉरप्लेन के लिए ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एक छोटे संस्करण का विकास जरूरी है।
वायुसेना का मानना है कि छोटे विमान ब्रह्मोस से लैस होने पर जमीन पर इनका प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है। ब्रह्मोस एयर-लॉन्च संस्करण 2.5 टन की मिसाइल है, जो ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना अधिक गति से उड़ती है।
अधिकारियों ने कहा कि छोटी मिसाइल, ब्रह्मोस-नेक्स्ट जेनरेशन का वजन 1.2 टन होने और हवा से लॉन्च किए गए मौजूदा संस्करण की तुलना में अधिक घातक होने की उम्मीद है।
ब्रह्मोस भारत-रूस का संयुक्त उपक्रम है। चौधरी ने ब्रह्मोस एयरोस्पेस की रजत जयंती के अवसर पर कहा, "इस मील के पत्थर (ब्रह्मोस-एनजी मिसाइल का विकास) को हासिल करना सबसे बड़ी छलांग होगी। आत्मानिर्भर बनने में मदद मिलेगी।
अधिकारियों ने कहा कि वायु सेना ने शुरुआत में मिसाइल को ले जाने के लिए 40 एसयू-30 लड़ाकू विमानों को संशोधित करने की योजना बनाई थी, लेकिन आज पूरे एसयू-30 बेड़े को ब्रह्मोस ले जाने के लिए संशोधित किया गया है।












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