ब्राह्मण पुजारियों ने निकाला CAA और NRC के खिलाफ मार्च

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देशभर में लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ अब ब्राह्मण और पुजारी भी प्रदर्शन कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर और नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ धार्मिक समुदाय के लोगों ने मोर्चा खोल दिया है। तमाम पुजारियों ने सोमवार को इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और रैली निकाली। सीएए में धर्म के आधार पर जिस तरह से भेदभाव करके देश को बांटने की कोशिश हो रही है उसपर इन लोगों ने चिंता जाहिर की है।

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100 पुजारियों ने लिया हिस्सा
तमाम पुजारियों ने नो एनआरसी, नो सीएए के बैनर लेकर सड़क पर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में तकरीबन 100 पुजारियों ने हिस्सा लिया और ये लोग कोलकाता स्थित मेयो रोड पर महात्मा गांधी की मूर्ति के पास इकट्ठा हुए। यह प्रदर्शन पश्चिम बंग सनातन ब्राह्मण ट्रस्ट के तहत किया गया और एनआरसी व सीएए के खिलाफ नारेबाजी की गई। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि विकास के लिए शांति का होना बहुत जरूरी है, सीएए व संभावित एनआरसी की वजह से देशभर में हिंसा हुई है।

देश को बांटने की कोशिश
ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी श्रीधर मिश्रा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक समुदाय विशेष के लोगों को अलग करने की कोशिश हो रही है, उन्हें एनआरसी और सीएए के जरिए अलग करने का प्रयास किया जा रहा है। हम इस बात को लेकर चिंतित हैं कि इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं, धर्म के आधार पर देश को बांटने की कोशिश हो रही है। बता दें कि सीएए और एनआरसी के खिलाफ तमाम विपक्षी दल एकजुट होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार इस कानून का विरोध कर रही हैं।

ममता बनर्जी समेत तमाम विपक्षी दल सीएए के खिलाफ
ममता बनर्जी को एनसीपी के मुखिया शरद पवार ने भी अपना समर्थन दिया है। एक पत्र लिखकर शरद पवार ने कहा कि वे इस मुद्दे पर ममता बनर्जी से पूरी तरह सहमत है और नागरिकता कानून तथा राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर को लागू करने का विरोध करने वाले सभी नेताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने की शपथ लेते हैं। देश की संसद नागरिकता कानून पर बहस के दौरान ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस पार्टी, शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी, मायावती की बहुजन समाज पार्टी, डीएमके तथा कुछ अन्य विपक्षी दलों ने बिल के विरोध में वोटिंग की थी जबकि शिवसेना ने लोकसभा में पक्ष में वोटिंग की थी और राज्यसभा में वोटिंग में भाग नहीं लिया था। महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के साथ मिलकर शिवसेना सरकार चला रही है।

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