Black Box Lab: दिल्ली में खुली भारत की पहली ‘ब्लैक बॉक्स लैब', जानिए कैसे होगी प्लेन क्रैश हादसों की जांच?
Black Box Lab Delhi India: गुजरात के अहमदाबाद एयरपोर्ट के बाद एयर इंडिया प्लेन क्रैश हादसे के बाद 14 जून 2025 को भारत में ब्लैक बॉक्स लैब की जांच करने वाली पहली लैब की शुरुआत हो गई है। संभवतया यहां की जांच के बाद ही अहमदाबाद विमान हादसे की असली वजह पता चल सकेगी।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री राम मोहन नायडू ने आज दिल्ली स्थित उड़ान भवन में एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) में अत्याधुनिक डिजिटल फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर लैब (DFDR & CVR Lab) का उद्घाटन किया। यह प्रयोगशाला "ब्लैक बॉक्स लैब" के नाम से भी जानी जाएगी और इसे 9 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है।

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इस मौके पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय, DGCA, भारतीय वायुसेना, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी और प्रमुख एयरलाइनों के फ्लाइट सेफ्टी चीफ मौजूद रहे।
अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि यह अत्याधुनिक लैब भारत को एक सुरक्षित एविएशन इकोसिस्टम की ओर ले जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी दुर्घटना के मूल कारणों की पहचान और जिम्मेदारी तय करने के लिए स्वतंत्र और सटीक जांच बेहद जरूरी है।
मंत्री ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के योगदान की सराहना की, जिसने AAIB को DFDR और CVR लैब स्थापित करने में तकनीकी सहयोग दिया। उन्होंने बताया कि HAL की घरेलू तकनीक के जरिए भारत अब FDR उपकरणों का निर्माण और मरम्मत करने में सक्षम है।
यह लैब दुर्घटनाग्रस्त विमानों से ब्लैक बॉक्स निकालकर उसका डेटा रिकवर कर सकेगी और गहन विश्लेषण करेगी। इसमें CVR, रडार और फ्लाइट डाटा को आपस में मिलाकर निष्कर्ष निकाले जाएंगे, जिससे दुर्घटनाओं की जांच और भी सटीक हो सकेगी।
AAIB के महानिदेशक श्री जी वी जी युगंधर ने कहा कि यह लैब न केवल भारत में बल्कि पड़ोसी देशों को भी विमान दुर्घटना जांच में सहयोग देगी। भारत की विमानन सुरक्षा में यह प्रयोगशाला एक मील का पत्थर साबित होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक 350-400 हवाई अड्डों के लक्ष्य की ओर इशारा करते हुए मंत्री ने कहा कि तेज़ी से बढ़ते विमानन क्षेत्र के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को भी उतना ही सशक्त बनाया जाना जरूरी है।
यह लैब अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाई गई है और ICAO के सदस्य देश के रूप में भारत की जिम्मेदारियों को निभाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।












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