बसपा संस्थापक कांशीराम को भारतरत्न देने में बीजेपी को नफा या नुकसान?
UP News: यूपी की शाहजहांपुर लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद अरुण कुमार सागर ने हाल ही में अपनी ही सरकार से बसपा संस्थापक कांशीराम को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारतरत्न देने की मांग की है। बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने भी इसका स्वागत किया है। सवाल है कि अगर मोदी सरकार यह फैसला करती है तो इसका क्या असर होगा।
शाहजहांपुर दलितों के लिए आरक्षित सीट है। भाजपा सांसद अरुण कुमार सागर अनुसूचित जाति (SC) के उसी जाटव बिरादरी से आते हैं, जिससे बीएसपी अध्यक्ष मायावती आती हैं। यूपी में जाटव की आबादी दलितों में सबसे ज्यादा है।

भाजपा के काम करने के तरीके से अच्छे से वाकिफ हैं पार्टी सांसद
सागर अब बीजेपी में नए नहीं हैं। वे करीब एक दशक से पार्टी में हैं और ब्रज क्षेत्र में पार्टी के उपाध्यक्ष के तौर पर भी संगठन का काम कर चुके हैं। वह इस समय यूपी से भाजपा के इकलौते जाटव सांसद हैं। 2019 में भी वे इसी सीट से भाजपा के टिकट पर चुने गए थे। उन्हें पार्टी की नीतियों और संगठन के काम करने के तरीके की काफी जानकारी हो चुकी है।
दलितों के वोटिंग पैटर्न की अच्छी जानकारी रखते हैं बीजेपी सांसद
वैसे, उनकी राजनीति बीएसपी से शुरू हुई थी। वे पार्टी के जोनल संयोजक भी रह चुके हैं और 2007 से 2012 के बीच मायावती सरकार में राज्यमंत्री की भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसलिए उन्हें उत्तर प्रदेश में दलितों के वोटिंग पैटर्न की भी अच्छी समझ है।
'पीएम मोदी से उम्मीद है कि कांशीराम को भारतरत्न से सम्मानित करेंगे'
उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा है, 'मैंने कांशीराम को सम्मान देने की मांग की है, क्योंकि उन्होंने समाज में बदलाव लाया और दलितों और पिछड़े वर्गों के लिए त्याग किया। मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो कि हमेशा दलितों, दबे-कुचलों और समाज के पिछड़े वर्गों के हितों की बात करते हैं, कांशीराम को भारतरत्न से सम्मानित करेंगे।'
2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को दलित वोटों का हुआ नुकसान
दरअसल, ऐसा कहा जा रहा है कि 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में भाजपा का प्रदर्शन बहुत बेहतर इसलिए रहा था, क्योंकि वह दलित वोट जुटाने में सफल रही थी। लेकिन, इस बार कहा जा रहा है कि यह सपा की अगुवाई वाले इंडिया ब्लॉक की ओर शिफ्ट हुआ है।
सपा-कांग्रेस के झूठे प्रोपेगेंडा से हुआ नुकसान- बीजेपी सांसद
भाजपा के दलित सांसद भी इस हकीकत को कबूल करते हैं और ऐसा होने की वजह कांग्रेस और सपा के कथित झूठे प्रोपेगेंडा को बता रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मैं 25 साल से राजनीति में हूं। जाटव समुदाय ने कभी भी सपा को वोट नहीं दिया। लेकिन, इंडिया ब्लॉक ने यह झूठा प्रोपेगेंडा खड़ा कर दिया कि बीजेपी संविधान बदल देगी और आरक्षण खत्म कर देगी। इससे भाजपा को नुकसान हो गया।'
डॉक्टर अंबेडकर को भारतरत्न दिलाने में भी बीजेपी का रोल- सागर
भाजपा के दलित नेता का कहना है कि देश के सबसे बड़े दलित आइकन बीआर अंबेडकर को भारतरत्न दिए जाने का भी श्रेय उन्हीं की पार्टी का है। क्योंकि, कांशीराम की मांग पर जिस वीपी सिंह की सरकार ने यह फैसला लिया, वह बीजेपी के समर्थन पर ही टिकी थी।
हालांकि, नगीना सीट से एक और युवा दलित नेता चंद्रशेखर आजाद की जीत ने बीजेपी को ही नहीं, बल्कि बसपा की राजनीति को भी झटका दिया है। मायावती ने तो फौरन उनके मुकाबले अपने भतीजे आकाश आनंद को बैटिंग के लिए उतार दिया है।
भाजपा सांसद ने पार्टी के लिए जगा दी है एक उम्मीद
जहां तक बदली परिस्थियों में बीजेपी की संभावना की बात है तो बीजेपी सांसद का कहना है, 'पिछले दो चुनावों में दलितों ने पूरी तरह से बीजेपी का साथ दिया। मेरी लोकसभा सीट पर सभी 6 विधानसभा सीटों पर पार्टी जीती है। मुझे दूसरे इलाकों में क्या हुआ या अन्य क्षेत्रों के समीकरण का नहीं पता, लेकिन यहां (शाहजहांपुर) सभी बीजेपी के साथ डटे रहे।'
उनका यह भी कहा है कि 'वैसे जो लोग बीजेपी से चले गए हैं, वे भी वापस आ जाएंगे, क्योंकि उन्हें सपा-कांग्रेस को वोट देने की अपनी गलती का एहसास हो चुका है। उनमें अपराध बोध है और वे अवश्य लौटेंगे।'
बीजेपी के दलित सांसद ने अपनी ही लोकसभा सीट की जो राजनीतिक तस्वीर पेश की है, उसमें बीजेपी के लिए उम्मीदों की किरण दिख रही है। ऐसे में अगर केंद्र सरकार ने अपने नेता की राय को अहमियत दी तो शायद ट्रैक पर अटकने के बाद भाजपा की गाड़ी एक बार फिर से दौड़ भी सकती है।












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