वोटर्स को एकजुट रखने के लिए अमित शाह का मास्टर प्लान
नई दिल्ली। आगामी पांच विधानसभा चुनाव को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह लगातार इसपर अपनी नजर बनाए हुए हैं, साथ ही वह 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर भी लगातार अपनी रणनीति बना रहे हैं। लेकिन इन दोनों के बीच वह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश पर खासतौर पर पैनी नजर रख रहे हैं। यहां वह व्यक्तिगत तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संगठन के महासचिव सुनील बंसल के साथ मिलकर रणनीति बनाने में जुटे हैं। यही वजह है कि वह बार-बार प्रदेश का दौरा कर रहे हैं।

अमित शाह एक्शन में
अमित शाह इस बात पर मुख्य रूप से ध्यान दे रहे हैं कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मिलकर पार्टी को 51 फीसदी वोट दिलाने की कोशिश करें। साथ ही उनकी इस बात पर भी नजर है कि भाजपा के खुद के मतदाता उनकी पार्टी से ना भटके और 100 फीसदी वोट पार्टी के खाते में गिरे। जिसकी बदौलत वह एक बार फिर से 2019 के लोकसभा चुनाव में 2014 के प्रदर्शन को दोहरा सकें। सूत्रों की मानें तो भाजपा का कहना है कि इस मसले पर दो सिरे से काम कर रहे हैं। पार्टी उन तमाम बूथ पर अपनी पूरी ताकत झोंक देना चाहती है जहां अधिक मतदान होता है। इन बूथ पर पार्टी के तमाम समर्थक और कार्यकर्ता तैनात रहेंगे। पार्टी मुख्य रूप से उन जगहों पर भी फोकस कर रही हैं जहां महिला मतदाता अधिक हैं।

हर स्तर पर चल रही तैयारी
पार्टी की दूसरी प्राथमिकता यह है कि वह उन छोटे वर्ग पर भी ध्यान दे रही है जिनपर किसी की नजर नहीं है और उन्हें महत्ता नहीं दी जा रही है। पार्टी ऐसे वर्ग की एक सूचि तैयार कर रही है और ताकि इसपर जल्द से जल्द काम शुरू किया जा सके। इसके लिए पार्टी ना सिर्फ अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से सुझाव मांग रही है बल्कि आरएसएस से भी मदद मांग रही है। साथ ही पार्टी को लेकर जिन लोगों में असंतोष है उसे भी पार्टी जानने की कोशिश कर रही है ताकि समय रहते उसे दूर किया जा सके। यही वजह है कि अमित शाह ना सिर्फ मंत्रियों से मुलाकात कर रहे हैं बल्कि अलग-अलग स्तर पर पार्टी के कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात कर रहे हैं।

कैबिनेट फेरबदल में नहीं हस्तक्षेप
हालांकि पार्टी सूत्रों ने इस बात को सिरे से खारिज किया है कि अमित शाह उत्तर प्रदेश कैबिनेट में होने वाले बदलाव में भी हिस्सा ले रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इससे पार्टी के भीतर और मुश्किल बढ़ सकती है अगर किसी को खुश किए जाने की कोशिश की जाती है। कैबिनेट में बदलाव को मुख्य रूप से पार्टी के नेतृत्व ने हरी झंडी दे दी है और यह आगामी लोकसभा चुनाव के बाद होगा। राम मंदिर का मुद्दा भाजपा के लिए काफी अहम है, यही वजह है कि पार्टी हर वर्ग के लोगों से मुलाकात कर रही है।
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