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BJP Sansadiya Board: BJP में बड़ा उलटफेर, क्या है नई लिस्ट का संकेत ? समझिए

नई दिल्ली, 17 अगस्त: बीजेपी ने आज अपने शीर्ष संगठनों में बहुत बड़ा उलटफेर किया है। जेपी नड्डा की अध्यक्षता वाली पार्टी ने वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान की केंद्रीय संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति से छुट्टी कर दी है। इन नेताओं की जगह बीएस येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोबाल और देवेंद्र फडणवीस (केंद्रीय चुनाव समिति में) जैसे नेताओं को जगह दी गई है। पार्टी ने अपने इन दोनों सर्वोच्च संस्थाओं में पहली बार एक सिख नेता इकबाल सिंह लालपुरा को भी जगह दी है। भाजपा के शीर्ष संगठनों की इन नई लिस्टों में बहुत कुछ सियासी संकेत है।

नितिन गडकरी का कद घटा दिया !

नितिन गडकरी का कद घटा दिया !

भारतीय जनता पार्टी ने आज अपने संगठन की दो शीर्ष संस्थाओं में बहुत बड़ा उलटफेर कर दिया है। पहली है, बीजेपी में तमाम बड़े निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था बीजेपी संसदीय बोर्ड और दूसरी है पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति। पहले भाजपा संसदीय बोर्ड में शामिल किए गए नए सदस्यों के नाम जान लीजिए। ये हैं- बीएस येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा और सुधा यादव। इन नए सदस्यों को पार्टी की नीति-निर्धारक सर्वोच्च संस्था में शामिल करने के बारे में बताने से पहले उन वरिष्ठ नेताओं को जान लेते हैं, जिनकी इससे विदाई कर दी गई है। इनमें सबसे बड़ा नाम है, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजपथ मंत्री नितिन गडकरी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान। गडकरी का संसदीय बोर्ड से हटाया जाना, सियासी तौर पर निश्चित रूप से पार्टी में उनका कद घटना माना जा सकता है।

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    शिवराज के लिए ठीक नहीं हैं संकेत ?

    शिवराज के लिए ठीक नहीं हैं संकेत ?

    जहां तक शिवराज सिंह चौहान की बात है तो तथ्य यह है कि बीजेपी संसदीय बोर्ड के सदस्यों में कोई भी दूसरा मुख्यमंत्री शामिल नहीं है। एक चौहान ही थे, जिन्हें गृहमंत्री अमित शाह ने भाजपा अध्यक्ष रहते हुए विशेष रूप से शामिल कराया था। लेकिन फिर भी शिवराज सिंह का संसदीय बोर्ड से हटना, वह भी प्रदेश विधानसभा चुनाव से एक साल पहले, उनके लिए सही संकेत नहीं है। भाजपा के एक सूत्र ने नाम नहीं जाहिर होने देने की शर्त पर बताया है कि हो सकता है कि आने वाले महीनों में नेतृत्व परिवर्तन पर भी चर्चा चल रही हो। क्योंकि, पार्टी वहां अगला चुनाव किसी नए चेहरे को उतारकर लड़ने पर भी मंथन कर सकती है। यह चेहरा नरोत्तम मिश्रा या ज्योतिरादित्य सिंधिया भी हो सकता है !

    बीजेपी संसदीय बोर्ड के सदस्य:
    1) जगत प्रकाश नड्डा (अध्यक्ष)
    2) नरेंद्र मोदी
    3) राजनाथ सिंह
    4) अमित शाह
    5) बीएस येदियुरप्पा
    6) सर्बानंद सोनोवाल
    7) के लक्ष्मण
    8) इकबाल सिंह लालपुरा
    9) सुधा यादव
    10) सत्यनारायण जटिया
    11) बीएल संतोष (सचिव)

    भाजपा में उलटफेर का संकेत क्या है ?

    भाजपा में उलटफेर का संकेत क्या है ?

    भाजपा सूत्र का कहना है कि संसदीय बोर्ड में बीएस येदियुरप्पा और सर्बानंद सोनोवाल जैसे नेताओं को जगह देने का मतलब है कि पार्टी उन नेताओं को उचित सम्मान देती है, जिन्होंने उसके लिए कुछ त्याग किया है। येदियुरप्पा ने कर्नाटक में खुद को साइडलाइन किया और सोनोवाल ने हेमंत बिस्व सरमा के लिए अपनी सीएम की कुर्सी छोड़ दी। वहीं के लक्षमण पार्टी के काफी वरिष्ठ नेता हैं और उनके अनुभव का बीजेपी लाभ लेना चाहती है। जबकि, इकबाल सिंह लालपुरा को लाने का मकसद सिख समुदाय में एक सकारात्मक राजनीतिक संकेत देना है। इससे अल्पसंख्यक कोटा भी पूरा होता है। ये रिटायर्ड आईपीएस भी हैं और एक दशक से भाजपा से जुड़े हैं। वह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। भाजपा पंजाब में अपनी मौजूदगी को हर हाल में बनाए रखना चाहती है। जहां तक सुधा यादव का सवाल है तो वह हरियाणा से हैं, महेंद्रगढ़ से सांसद रह चुकी हैं और आईआईटीयन भी हैं। हरियाणा में 2024 में ही विधानसभा चुनाव भी होने हैं।

    देवेंद्र फडणवीस का कद बढ़ा

    देवेंद्र फडणवीस का कद बढ़ा

    अब भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति में हुए फेरबदल से निकले संकेतों को समझने की कोशिश करते हैं। इसमें संसदीय बोर्ड के सदस्यों के अलावा सिर्फ चार अतिरिक्त नाम शामिल हैं। संसदीय बोर्ड से हटने की वजह से इस समिति से भी नितिन गडकरी की छुट्टी हो चुकी है और इसमें महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को जगह दी गई है। फडणवीस को केंद्रीय चुनाव समिति में जगह देने से लगता है कि महाराष्ट्र में पार्टी उनको ही अपना प्रमुख चेहरा पेश करना चाहती है। एक बार यहां भी पार्टी के लिए त्याग की बात आती है कि फडणवीस ना चाहते हुए भी उपमुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार हुए हैं। जबकि, उनके नेतृत्व में भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने 2019 में पूर्ण बहुमत हासिल किया था और बाद में उद्धव ठाकरे के साथ छोड़ने की वजह से जीता हुआ गठबंधन भी सरकार नहीं बना पाया था।

    शाहनवाज हुसैन को लगा है दोहरा झटका

    शाहनवाज हुसैन को लगा है दोहरा झटका

    वहीं केंद्रीय चुनाव समिति से शाहनवाज हुसैन का भी पत्ता कट गया है। उनके लिए यह दोहरे झटके की तरह है। क्योंकि,हाल ही में नीतीश कुमार ने बिहार में जिस तरह से कलाबाजी खाकर भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया और लालू यादव की पार्टी के साथ मिलकर सरकार बना ली, उससे शाहनवाज हुसैन का वहां पर कैबिनेट मंत्री का पद भी जा चुका है। इस समिति में अल्पसंख्यक नुमाइंदे के तौर पर इकबाल सिंह लालपुरा की एंट्री हुई है। लेकिन, बीजेपी सूत्रों का कहना है कि शाहनवाज को आगे मोदी कैबिनेट की संभावित विस्तार में जगह मिल सकती है, क्योंकि बिहार पर पार्टी अब नए सिरे से और बदले माहौल में फोकस कर रही है।

    बीजेपी केंद्रीय चुनाव समिति
    1) जगत प्रकाश नड्डा (अध्यक्ष)
    2) नरेंद्र मोदी
    3) राजनाथ सिंह
    4) अमित शाह
    5) बीएस येदियुरप्पा
    6) सर्बानंद सोनोवाल
    7) के लक्ष्मण
    8) इकबाल सिंह लालपुरा
    9) सुधा यादव
    10) सत्यनारायण जटिया
    11) भूपेंद्र यादव
    12) देवेंद्र फडणवीस
    13) ओम माथुर
    14) बीएल संतोष (सचिव)
    15) वनथी श्रीनिवास (पदेन)

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