बीजेपी ने पीडीपी से तोड़ा गठबंधन, सीएम महबूबा ने दिया इस्तीफा

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    BJP, PDP का Alliance End, Governor के शासन की उठी मांग | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने जम्मू कश्मीर की सरकार पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया है। बीजेपी राष्ट्र अध्यक्ष के घर पर हुई मीटिंग में पीडीपी से गठबंधन तोड़ दिया है। बीजेपी ने स्पष्ट किया है कि पीडीपी के साथ चलना हमारे लिए संभव नहीं है। सीएम महबूबा के आग्रह पर जम्मू कश्मीर में रमजान के दौरान केंद्र सरकार ने सीजफायर की घोषणा की थी। राम माधव ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि महबूबा सरकार नहीं चल पाई, इसलिए यह फैसला लिया गया।

    क्या बोलें राम माधव

    क्या बोलें राम माधव


    • तीन साल पहले सरकार बनाए थे। उस समय जनता का जनादेश विखंडित था। जम्‍मू क्षेत्र में पूर्ण रूप से भाजपा को समर्थन मिला था और कश्‍मीर क्षेत्र में पीडीपी को बहुमत मिला था। एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत हमारी सरकार चली।
    • भाजपा के दो मकसद थे। पहला- शांति बनी रहे और दूसरा- विकास कार्य तेजी से हो। आज जो स्थिति बनी है। कश्‍मीर में कट्टरवाद तेजी से बढ़ रही है। घाटी में अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता भी खतरे में आ गई है।
    • आपने देखा, घाटी में मूर्धन्‍य पत्रकार शुजात बुखारी की हत्‍या कर दी गई। जहां तक केंद्र सरकार का मामला है, केंद्र ने राज्‍य सरकार को हर संभव मदद की।केंद्र सरकार ने जम्‍मू-कश्‍मीर को 80,000 करोड़ का पैकेज दिया। हम सरकार में तीन साल भागीदार रहे हैं, लेकिन हमें दुख है कि जो सरकार में महत्‍वपूर्ण स्थिति में रहे हैं, वे सरकार संभालने में सफल नहीं रहे हैं। जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख में विकास का जो कार्य होना था, उसमें भी उतना काम नहीं हुआ।
    • महबूबा की सरकार गिरनी तय

      महबूबा की सरकार गिरनी तय

      जम्मू कश्मीर में महबूबा मुफ्ती की गठबंधन वाली सरकार का अब गिरना तय है। बीजेपी से नाता टूटने के बाद जम्मू कश्मीर की सरकार अब अल्पमत में आ जाएगी और महबूबा की सरकार के पास बहुमत नहीं होने की वजह से सरकार गिर जाएगी।

      अमित शाह के घर हुई थी बैठक

      अमित शाह के घर हुई थी बैठक

      बता दें कि इससे पहलेबीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर सरकार में शामिल बीजेपी मंत्रियों की एक बैठक दिल्ली में बुलाई थी। पीडीपी चाहती है कि केंद्र सरकार अलगाववादियों से बात करे जबकि, केंद्र का तर्क है कि अलगाववादियों ने इसका मौका गंवा दिया है। दिनेश्वर शर्मा इस वक्त घाटी में ही हैं जिन्हें कश्मीर विवाद पर बातचीत के लिए भेजा गया था। बता दें कि सीज फायर के आखिरी दिनों में ईद से ठीक पहले पत्रकार शुजात बुखारी और जवान औरंगजेब को आतंकियों ने गोलियों से छलनी कर दिया था।

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