तेलंगाना: चुनाव प्रचार के दौरान KCR की पार्टी के सांसद को मारा चाकू, कोठा प्रभाकर रेड्डी अस्पताल में भर्ती
Telangana News: तेलंगाना विधानसभा चुनाव के प्रचार के बीच सत्तारूढ़ दल मुख्यमंत्री केसीआर की पार्टी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) सांसद कोठा प्रभाकर रेड्डी को सिद्दीपेट में उनके कैंपेन के दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने पेट में चाकू मार दिया।
सांसद कोठा प्रभाकर रेड्डी पर हमला उस वक्त हुआ, जब वह सिद्दीपेट जिले में अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार करते हुए समर्थन मांग रहे थे, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हमलावर ने चाकू सांसद को तब मारा, जब वह एक पादरी के घर की ओर जा रहे थे।

इस हमले में सांसद कोठा प्रभाकर रेड्डी सुरक्षित हैं। घटना दौलताबाद मंडल के सुरमपल्ली गांव में हुई। सिद्दीपेट कमिश्नर एन श्वेता के मुताबिक उन्हें गजवेल में रेफर कर दिया गया है। कथित आरोपी हिरासत में है, मामले की पुलिस जांच कर रही हैं।
चश्मदीदों के अनुसार एक अज्ञात शख्स उनके पास आया और ऐसा लगा जैसे वह नेता उनसे (सांसद) हाथ मिलाना चाहता हो, लेकिन उसने अचानक चाकू निकाला और उनके पेट में घोंप दिया। हमलावर को रैली में बीआरएस कार्यकर्ताओं ने पकड़ लिया और जमकर पीटा भी। बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया।
बताया जा रहा है, जिस वक्त यह वारदात हुआ। पूरा माहौल गरमा गया। तुरंत सांसद की कमर में कपड़ा बांधकर कार तक पहुंचाया, जहां से उनको अस्पताल रेफर किया। फिलहाल सांसद कोठा प्रभाकर रेड्डी पूरी तरह से सुरक्षित हैं।
खुद प्रत्याशी हैं प्रभाकर रेड्डी
दरअसल, तेलंगाना के मेडक से सांसद और विधानसभा चुनाव में BRS प्रत्याशी कोठा प्रभाकर रेड्डी सुरामपल्ली गांव में चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे थे। घायल प्रभाकर को तुरंत गजवेल अस्पताल ले जाया गया। जहां से उनको हैदराबाद शिफ्ट किया गया है।
30 नवंबर को वोटिंग, 3 दिसंबर को नतीजे
सिद्दीपेट के पुलिस आयुक्त एन श्वेता ने बताया कि हमलावर को हिरासत में ले लिया गया है। हम उसके जुड़ी हर डिटेल की गहनता से जांच कर रहे हैं। बता दें कि तेलंगाना में विधानसभा चुनाव 2023 के लिए वोटिंग एक ही चरण में 30 नवंबर को होगी। तेलंगाना चुनाव का रिजल्ट 3 दिसंबर को आएगा। कुल 119 सीटों पर मतदान होगा।
राज्यपाल ने दिए सुरक्षा के निर्देश
सिद्दीपेट में बीआरएस सांसद कोठा प्रभाकर रेड्डी पर हुए हमले पर तेलंगाना की राज्यपाल डॉ.तमिलिसाई सौंदर्यराजन की प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है और ऐसी घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरा हैं। राज्यपाल ने डीजीपी को चुनाव अवधि के दौरान चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों और प्रचारकों की जांच और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया है।









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